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फर्जीवाड़ा:पीएम रिलीफ फंड की फर्जी वेबसाइट बना दो बैंकों में अकाउंट खुलवा 52 लाख से अधिक की फर्जी निकासी, दो गिरफ्तार

हजारीबागएक वर्ष पहले
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एसडीपीओ ने बताया कि इसके एवज में खाताधारकों को कुछ निर्धारित राशि दी जाती थी। उन्होंने बताया कि कहा कि सरगना की गिरफ्तारी के बाद सामने आएगा कि इस साइबर अपराध में और कितने लोग शामिल हैं। - Dainik Bhaskar
एसडीपीओ ने बताया कि इसके एवज में खाताधारकों को कुछ निर्धारित राशि दी जाती थी। उन्होंने बताया कि कहा कि सरगना की गिरफ्तारी के बाद सामने आएगा कि इस साइबर अपराध में और कितने लोग शामिल हैं।
  • दोनों बैंक के शाखा प्रबंधकों ने मामला दर्ज कराया, कोरोना वायरस को लेकर पीएम केयर फंड में दान देने के लिए वेबसाइट पर की गई थी अपील
  • पंजाब नेशनल बैंक और यूनियन बैंक शाखा में खुलवाया था अकाउंट, गिरफ्तार दो आरोपी हैं सगे भाई, सरगना की तलाश में छापेमारी में जुटी पुलिस

जिले में अपराधियों ने साइबर ठगी के लिए पीएम केयर रिलीफ फंड डॉट कॉम नाम से एक फर्जी वेबसाइट तैयार किया। उसमें अपील की कि कोरोना वायरस से बचाव को लेकर लोग निम्न अकाउंट में दान दे सकते हैं। वेबसाइट में जिन अकाउंट का उल्लेख किया गया है, उसमें खाताधारक का भी नाम पीएम केयर लिखा गया था। शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया फिर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेपी कारागार भेज दिया है।

ऐसे हुआ खुलासा पंजाब नेशनल बैंक बड़ी बाजार शाखा के मैनेजर सुजीत कुमार सिंह ने और यूनियन बैंक शाखा अन्नदा चौक के मैनेजर अमित कुमार ने उक्त खाता को सर्च किया तो दोनों खाता के खाता धारक सगे भाई निकले जो मुफस्सिल थाना क्षेत्र के लाखे के रहने वाले हैं। शाखा प्रबंधकों को संदेह हुआ और उन्होंने सदर थाने में अलग-अलग आवेदन दिया। दोनों बैंक से इस फर्जी वेबसाइट और अकाउंट के माध्यम से कुल 5258442.26 का डिजिटल माध्यम से ठगी करने का उल्लेख है। आरोपी खाताधारक लाखे निवासी सिराजुद्दीन का पुत्र नूर हसन और मोहम्मद इफ्तेखार हैं जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर गुरुवार को जेपी कारा भेज दिया। 

पूछताछ में मुख्य सरगना के रूप में मुफस्सिल थाना क्षेत्र के ओरिया निवासी परमेश्वर साव का नाम आया है जो वर्तमान में फरार चल रहा है। पुलिस ने पकड़े गए खाताधारकों के निशानदेही पर परमेश्वर साव के घर पर छापामारी कर गुरुवार की सुबह उसके अल्टो कार में रखे भारी मात्रा में बैंक पासबुक, चेक बुक, एटीएम कार्ड सहित कई दस्तावेज बरामद किया है। इस संबंध में यूनियन बैंक के शाखा प्रबंधक अमित कुमार और पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक सुजीत कुमार सिंह के आवेदन पर संबंधित एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

यूनियन बैंक के शाखा प्रबंधक ने 1770741 रुपए और पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक ने 3487701.26 रुपए का साइबर अपराध किए जाने का आरोप लगाया है। दोनों शाखा से कुल 5258442.26 की राशि का साइबर अपराध करने का मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर में यूनियन बैंक के शाखा प्रबंधक ने कहा है कि डब्लूडब्लूडब्लू पीएम केयर रिलीफ फंड डॉट कॉम के नाम से फर्जी वेबसाइट बनायी गई जिसमें अकाउंट 519102010958743 का उल्लेख किया गया है। जिसमें खाता धारक का नाम पीएम केयर लिखा हुआ है जबकि इस खाता धारक का नाम बैंक में नूर हसन ग्राम लाखे है। यह खाता 26 दिसंबर 2019 को ऑनलाइन खोला गया है। 21 मार्च 2020 से अब तक 1770741 की राशि जमा करायी गयी जिसे निकाल लिया गया है। साथ ही दूसरे बैंकों के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर भी किया गया है। 

जबकि पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर सुजीत कुमार सिंह ने कहा है कि रिलीफ फंड के नाम से बनाए गए फर्जी वेबसाइट में खाता संख्या 6635000100047154 का उल्लेख किया गया है। जिसमें खाता धारक का नाम पीएम केयर लिखा गया है जबकि पंजाब नेशनल बैंक में उक्त खाता संख्या मोहम्मद इफ्तेखार ग्राम लाखे के नाम से खोला गया है। यह अकाउंट 13 जनवरी 2020 को खोला गया। यह अकाउंट आधार आइडेंटिफिकेशन के आधार पर खोला गया है। 

13 जनवरी 2020 से अब तक इस खाते में दान के नाम पर कुल 3487701.26 राशि करायी गयी जिसमें फर्जी वेबसाइट के अलावे नगद एवं अन्य डिजिटल माध्यम से भी पैसे जमा कराए गए, जैसे निफ्ट, यूपीआई से भी गलत तरीके से पैसे मंगाए गए और डिजिटल माध्यम से राशि को अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया।

इस संबंध में एसडीपीओ सदर कमल किशोर ने कहा कि फर्जी वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू पीएम केयर रिलीफ फंड डॉट कॉम के नाम से संचालित कर लोगों से खाते में पैसे मंगाए गए और उसे फिर अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया। इस साइबर अपराध का मुख्य सरगना ओरिया निवासी परमेश्वर साहू है जो अभी फरार है। 

गिरफ्तार खाताधारकों का कहना है कि परमेश्वर साव ने ही इनसे दोनों बैंकों में अकाउंट खुलवा कर उनका पासबुक अपने पास रख लिया था और इस साइबर ट्रांजेक्शन का खेल को अंजाम दे रहा था। इसके एवज में खाताधारकों को कुछ निर्धारित राशि दी जाती थी। उन्होंने बताया कि कहा कि सरगना की गिरफ्तारी के बाद सामने आएगा कि इस साइबर अपराध में और कितने लोग शामिल हैं।

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