पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कार्रवाई:फर्जी बैंक अधिकारी बनकर ठगी करने वाले 11 साइबर अपराधी गिरफ्तार, आरोपी केवाईसी अपडेट करने के नाम पर भी करते थे ठगी

देवघर8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
एसपी अश्विनी कुमार ने बताया कि ये सभी फर्जी मोबाइल नंबर से फर्जी बैंक पदाधिकारी बन कर आम लोगों को एटीएम बंद होने एवं उसे चालू कराने के नाम ठगी करते थे। - Dainik Bhaskar
एसपी अश्विनी कुमार ने बताया कि ये सभी फर्जी मोबाइल नंबर से फर्जी बैंक पदाधिकारी बन कर आम लोगों को एटीएम बंद होने एवं उसे चालू कराने के नाम ठगी करते थे।
  • पुलिस ने जसीडीह थाना क्षेत्र से 6 और देवीपुर थाना क्षेत्र से 5 लोगों को पकड़ा है
  • पुलिस ने इनके पास से 22 मोबाइल फोन और 36 सीम कार्ड बरामद किया है

पुलिस ने बुधवार को छापामार कर 11 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। एसपी अश्विनी कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने दो टीम बनाकर जसीडीह थाना क्षेत्र के राजाडीह से 6 और देवीपुर थाना क्षेत्र के ढकढका से 5 साइबर अपराधियों को पकड़ा है। ये सभी फर्जी बैंक पदाधिकारी बन कर आम लोगों को एटीएम बंद होने और उसे चालू कराने के नाम ठगी करते थे।

गिरफ्तार आरोपियों में जसीडीह थाना क्षेत्र के रोहित दास, अजीत दास, रंजीत कुमार दास, उज्जवल कुमार दास, राहुल कुमार दास, सनोज दास और देवीपुर थाना क्षेत्र से अनिल दास, किशन दास, मिथुन दास, गौतम कुमार दास और संजय दास शामिल हैं।

सभी आरोपी केवाईसी अपडेट करने के नाम पर, फोन पे/पेटीएम मनी रिक्वेस्ट भेज कर, गूगल पर विभिन्न प्रकार के वॉलेट एवं बैंक के फर्जी कस्टमर केयर नंबर का विज्ञापन देकर और रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल करवा कर लोगों से ठगी किया करते थे। पुलिस ने इनके पास से 22 मोबाइल फोन, 36 सीम कार्ड, 14 पासबुक, 14 एटीएम, 1 चेकबुक, 1 लौपटॉप और 30 हजार रुपए नगद बरामद किया है।

कैसे करते थे ठगी

  • फर्जी मोबाइल नंबर से फर्जी बैंक पदाधिकारी बनकर आम लोगों को एटीएम कार्ड बंद होने और उसे शुरू कराने के लिए आरोपियों द्वारा फोन किया जाता था। इसके बाद उपभोक्ता को झांसा में लेकर उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी सेंड करते थे और ओटीपी नंबर पूछ लेते थे। इसके बाद उपभोक्ता के बैंक अकाउंट से पैसे की निकासी कर लेते थे।
  • केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर आरोपियों द्वारा लोगों को फोन कर आधार कार्ड का नंबर पूछ ओटीपी सेंड करते थे। इसके बाद कस्टमर से ओटीपी नंबर पूछ लेते थे और आधार लिंक खाता से पैसों की ठगी करते थे।
  • आरोपियों द्वारा गूगल पर विभिन्न प्रकार के वॉलेट्स एवं बैंक के फर्जी कस्टमर केयर नंबर का विज्ञापन दिया जाता था। ऐसे में कस्टमर को जब कोई परेशानी होती तो वो गूगल पर सर्च कर सही जगह फोन लगाने की बजाए इनके फर्जी कस्टमर केयर नंबर पर कॉल कर देते थे। इसके बाद आरोपी उनसे अकाउंट संबंधी जानकारी लेकर पैसों की ठगी कर लेते थे।
खबरें और भी हैं...