झारखंड / क्वारैंटाइन सेंटर की सुविधा नहीं मिलने पर मंदिर में रात गुजार रहे 11 मजदूर, दो दिन पहले लौटे हैं बेंगलुरू से

मजदूरों ने बताया कि गांव में 10 बेड के क्वारैंटाइन सेंटर की व्यवस्था जिला प्रशासन की ओर से की गई है लेकिन उन्हें ये सुविधा नहीं मिल पा रही है। वे क्वारैंटाइन सेंटर में ही रहना चाहते हैं। मजदूरों ने बताया कि गांव में 10 बेड के क्वारैंटाइन सेंटर की व्यवस्था जिला प्रशासन की ओर से की गई है लेकिन उन्हें ये सुविधा नहीं मिल पा रही है। वे क्वारैंटाइन सेंटर में ही रहना चाहते हैं।
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मजदूरों ने बताया कि गांव में 10 बेड के क्वारैंटाइन सेंटर की व्यवस्था जिला प्रशासन की ओर से की गई है लेकिन उन्हें ये सुविधा नहीं मिल पा रही है। वे क्वारैंटाइन सेंटर में ही रहना चाहते हैं।मजदूरों ने बताया कि गांव में 10 बेड के क्वारैंटाइन सेंटर की व्यवस्था जिला प्रशासन की ओर से की गई है लेकिन उन्हें ये सुविधा नहीं मिल पा रही है। वे क्वारैंटाइन सेंटर में ही रहना चाहते हैं।

  • मजदूरों ने कहा- मुखिया पति और वार्ड मेंबर ने सुविधा दिलाने में हाथ खड़े किए, गांव में 10 बेड का है क्वारैंटाइन सेंटर

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 04:07 PM IST

धनबाद. पुटकी थाना क्षेत्र के मुनीडीह ओपी अंतर्गत गोपीनाथडीह निवासी 11 मजदूर क्वारैंटाइन सुविधा नहीं मिलने के चलते मंदिर में दिन-रात गुजार रहे हैं। सभी प्रवासी 21 मई की दोपहर स्पेशल ट्रेन के जरिए घर पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में 10 बेड के क्वारैंटाइन सेंटर की व्यवस्था जिला प्रशासन की ओर से की गई है, लेकिन उन्हें ये सुविधा नहीं मिल पा रही है। वे क्वारैंटाइन सेंटर में ही रहना चाहते हैं।

प्रवासी मजदूरों ने बताया कि वे ट्रेन से बरकाकाना रेलवे स्टेशन पर उतरे। यहां से उन्हें बस के जरिए धनबाद लाया गया। फिर थर्मल स्क्रीनिंग व अन्य जांच में पूरी रात पीएमसीएच में गुजरी। फिर 22 को उन्हें पुटकी छोड़ दिया गया। यहां वे गांव में पहुंचने के बाद घरवालों को और गांव के मुखिया पति विजय पासवान के साथ वार्ड मेंबर देवाशीष पासवान ने क्वारैंटाइन सेंटर न होने की बात कही। प्रवासी मजदूरों के मुताबिक, गांव के मुखिया पति कहा है कि बीडीओ का कहना है कि गांव में क्वारैंटाइन सेंटर की कोई व्यवस्था नहीं है।

बेंगलुरू में करते थे मजदूरी, भूखे रहने पड़ा तो घर आना पड़ा
मजदूरों ने बताया कि वे बंगलुरू के सेमीगली और मनिपाल इलाके में रहकर मजदूरी करते थे। लॉकडाउन लगने के कुछ दिन बाद तक सब ठीक चला। ठेकेदार ने खाना-पानी मुहैया कराया। लेकिन बाद में उसने हाथ खड़े कर दिए। पास में पैसे भी नहीं थे तो भूखे रहकर भी रात गुजारी। फिर उन्होंने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने बताया कि ट्रेन की व्यवस्था होगी, तब आप लोगों को बता दिया जाएगा। फिर प्रवासियों ने पुलिस के बताने पर झारखंड सरकार के सहायता एप पर अपना रजिस्ट्रेशन करा दिया। 19 मई को उन्हें ट्रेन मिली और वे 21 मई को बरकाकाना पहुंचे।

कहा- 14 दिन तक परिवार के संपर्क में नहीं आना चाहते
मजदूरों ने बताया कि थर्मल स्क्रीनिंग व अन्य मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें 14 दिन के क्वारैंटाइन में रहने को कहा। जब वे घर पहुंचे तो घर में इतनी सुविधाएं नहीं थी कि वे होम क्वारैंटाइन में रह सकें और वे खुद भी परिवार के संपर्क में नहीं आना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने मुखिया पति और वार्ड मेंबर को इसकी सूचना दी।

गांववाले मिलकर कर रहे खाने और रहने की व्यवस्था
उधर, जानकारी के मुताबिक, मामला सामने आने के बाद गांववाले मिलकर टेंट लगाकर प्रवासियों के रहने की व्यवस्था कर रहे हैं। साथ ही खाने-पीने की व्यवस्था भी कर रहे हैं। 

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