जज का मर्डर या एक्सीडेंट, देखें VIDEO:धनबाद में मॉर्निंग वॉक पर निकले थे जज, ऑटो चालक धक्का मारकर हुआ फरार; सिंह मेंशन के करीबी की हत्या समेत चर्चित मामलों की कर रहे थे सुनवाई

धनबाद4 महीने पहले
घटना की सूचना मिलने के बाद पूरा प्रशासनिक अमला घटनास्थल पर पहुंच कर मामले की जांच में जुट गया है।

झारखंड के धनबाद में बुधवार सुबह एक ऑटो ने धनबाद कोर्ट के ADG-8 उत्तम आनंद को रणधीर वर्मा चौक के पास धक्का मार दिया। घटना के बाद ऑटो चालक फरार हो गया। आनन-फानन में स्थानीय लोगों ने उन्हें शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SNMCH) में एडमिट कराया, जहां उनकी मौत हो गई है।

घटना के बाद मिले CCTV फुटेज ने दुर्घटना पर सवाल खड़ा कर दिया है। लोग इसे साजिश के तहत हत्या बता रहे हैं। दोपहर होते-हाेते न्यायाधीश की माैत का मामला रांची हाईकोर्ट तक पहुंच गया। हाईकोर्ट ने धनबाद के जिला जज से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, धनबाद SSP संजीव कुमार ने अपने दफ्तर में हाई लेवल मीटिंग की।

उत्तम आनंद के कोर्ट में कई बड़े केस की सुनवाई चल रही थी। इसमें सिंह मेंशन के करीबी रंजय सिंह का हत्याकांड भी शामिल है। इतना ही नहीं जेल में बंद दर्जनों हत्याकांड में संलिप्त गैंगस्टर अमन सिंह मामले की सुनवाई भी इनके कोर्ट में चल रही थी। साथ ही यूपी के शूटर अभिनव प्रताप सिंह, जिसने धनबाद में कई घटनाओं को अंजाम दिया है, के मामले की सुनवाई भी इनके कोर्ट में हो रही थी।

घटना की जानकारी परिजनों को नहीं मिल पाई। काफी देर तक जब वह घर नहीं लौटे तब परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया। तब जाकर पुलिस ने SNMCH में इलाजरत अज्ञात व्यक्ति के एडीजे-8 होने की पुष्टि की।

CCTV में जानबुझकर धक्का मारते दिखा ऑटो
सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद संदेह गहरा गया है। इसे देखकर कोई भी बोल पड़ेगा कि यह साजिश है। न्यायाधीश सड़क के किनारे धीमी गति से दौड़ लगा रहे थे। अचानक पीछे से एक ऑटो आता है। पहले सड़क पर ऑटो की दिशा सीधी होती है। लेकिन न्यायाधीश के पास पहुंचते ही बाईं तरफ मुड़ जाता है। फिर धक्का मारकर तेजी से भाग निकलता है।

घटना के बाद घंटों SNMCH में अज्ञात मरीज के रूप में उनका इलाज चलता रहा।
घटना के बाद घंटों SNMCH में अज्ञात मरीज के रूप में उनका इलाज चलता रहा।

6 महीने पहले आए थे धनबाद
उत्तम आनंद छह माह पूर्व ही बोकारो जिले से ट्रांसफर होकर धनबाद आए थे। वह धनबाद के बहुचर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में सुनवाई कर रहे थे। इस मामले में झरिया की कांग्रेस विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह के माैसेरे देवर हर्ष सिंह आरोपित हैं। न्यायाधीश ने तीन दिन पूर्व यूपी के शूटर अमन सिंह ने एक शार्गिद की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

29 जनवरी 2017 को रंजय की हुई थी हत्या
पूर्व विधायक संजीव सिंह के करीबी रंजय सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 को हुई थी। घटना के समय रंजय चाणक्य नगर स्थित अपने फ्लैट से राजा यादव के साथ मेंशन जा रहे थे। रास्ते में ही उन पर गोलियों की बौछार हो गई। घायल स्थिति में उन्हें सेंट्रल अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

साथी राजा यादव के बयान पर सरायढेला थाना में अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बाद में जांच के बाद इस मामले में हर्ष सिंह और मामा के खिलाफ आरोप गठित किया गया था।

रंजय सिंह हत्याकांड के बाद सिंह मेंशन और रघुकुल में ठनी
झारखंड कोयलांचल के धनबाद शहर में सिंह मेंशन और रघुकुल काफी चर्चित है। सिंह मेंशन की बुनियाद दंबग विधायक सूर्यदेव सिंह ने रखी थी, जो यूपी के बलिया जिले के मूल निवासी थे। कभी सिंह मेंशन बंगले में सूर्यदेव सिंह, बच्चा सिंह, विक्रम सिंह, राजन सिंह, रामधीर सिंह पांचों भाई रहते थे। बाद में बिक्रम सिंह बलिया में रहने लगे।

सूर्यदेव सिंह के निधन के बाद बच्चा सिंह झरिया के विधायक व झारखंड के नगर विकास मंत्री बने। इस क्रम में उन्होंने सरायढेला इलाके में सूर्योदय नामक अपना बंगला बनवाया और उसमें रहने लगे। इसके बाद राजन सिंह ने रघुकुल के नाम से आलीशान बंगला बनाया और सपरिवार उसमें रहने लगे। सिंह मेंशन में सूर्यदेव सिंह व रामधीर सिंह का परिवार रहता है।

सूर्यदेव सिंह की पत्नी कुंती सिंह भी झरिया क्षेत्र की विधायक रह चुकी हैं। उनके पुत्र संजीव सिंह भी वहां से भाजपा के विधायक रहे हैं। नीरज सिंह ने कांग्रेस ज्वाइन कर लिया। चचेरे भाई संजीव सिंह के खिलाफ झरिया से झारखंड विधानसभा का चुनाव लड़े, पर हार गए। 2019 के चुनाव में झरिया से नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा सिंह ने संजीव सिंह को शिकस्त दी थी।

रणधीर वर्मा चौक का इतिहास जान लीजिए
3 जनबरी 1991 की सुबह धनबाद के एक बैंक में कुछ चोर लूट के उदेश्य से घुस गये। उन्होंने पूरे बैंक स्टाफ को बंदी बना लिया और बैंक पर कब्जा कर लिया। उस समय वहां के आईपीएस थे रणधीर प्रसाद वर्मा। आइपीएस ने मौके पर पहुंच कर कारवाई की और अकेले ही चोरों से भिड़ गए।

अकेले ही उन्होंने पांच चोरों का मुकाबला किया और उन्हें धर दबोचा गया, लेकिन मुठभेड़ के दौरान रणधीर वर्मा की जान नहीं बच पाई और उनकी मौत हो गई। रणधीर ने अपनी जान गवां कर वहां मौजूद हर व्यक्ति की जिंदगी बचाई थी जिस कारण उन्हे कई सम्मान से भी नवाजा गया। इसके बाद इस चौराहे का नाम रणधीर वर्मा चौक रखा गया था।

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