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  • Due To Financial Constraints, Only 13 Thousand Children Of Ranchi Dhanbad Reached The Government After Cutting Their Names From Private Schools.

तंगहाली का असर बच्चों की शिक्षा पर:आर्थिक तंगी के कारण रांची-धनबाद के ही 13 हजार बच्चे, निजी स्कूलों से नाम कटाकर सरकारी में पहुंचे

रांची/धनबाद5 महीने पहले
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रांची में 8वीं के बाद 5वीं कक्षा  में सबसे ज्यादा नामांकन - Dainik Bhaskar
रांची में 8वीं के बाद 5वीं कक्षा में सबसे ज्यादा नामांकन
  • रांची में अन्य 12 हजार बच्चाें ने शपथ पत्र देकर लिया दाखिला
  • इनमें भी कई बच्चों के निजी स्कूलों के होने की है संभावना

कोरोना की दूसरी लहर में परिवारों की आर्थिक स्थिति के साथ बच्चों के सपने भी टूट रहे हैं। रोजगार छिनने और आमदनी घटने से अभिभावक निजी स्कूलों में अपने बच्चों की फीस जमा करने में असमर्थ हैं। विवश होकर वे अपने बच्चों का नाम निजी स्कूलों से कटा रहे हैं। भास्कर ने रांची में 40 प्राइमरी व 20 हाई स्कूल और धनबाद में 35 सरकारी स्कूलों की पड़ताल की। इसमें पता चला कि इन स्कूलों में एडमिशन लेने वाले लगभग 13000 छात्र-छात्राएं निजी स्कूलों से नाम कटाकर आए हैं।

झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा तैयार किए गए डाटा की मानें तो रांची जिले में इस वर्ष पिछले वर्ष के मुकाबले 24 हजार से अधिक बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में हुआ है। नामांकन के वक्त बच्चों द्वारा जमा किए गए स्थानांतरण प्रमाण पत्रों की जांच की तो उसमें 50% निजी विद्यालयों के ट्रांसफर सर्टिफिकेट मिले। यानी रांची में 12 हजार विद्यार्थी निजी स्कूल से नाम कटाकर सरकारी स्कूल पहुंचे। बाकी बच्चे शपथ पत्र देकर आए, इनमें भी कई निजी स्कूलों के हो सकते हैं। वहीं, धनबाद में 35 स्कूलों की पड़ताल में पता चला कि 1006 बच्चे निजी स्कूलों से नाम कटाकर सरकारी स्कूलों में आए हैं।

  • कोरोनाकाल में तंगहाली का असर बच्चों की शिक्षा पर, अभिभावक मजबूरी में निजी स्कूलों से नाम कटाकर सरकारी स्कूलों में करा रहे दाखिला, रांची-धनबाद में 95 सरकारी स्कूलों की पड़ताल...
  • पड़ताल का आधार... सरकारी स्कूलों में एडमिशन के समय बच्चों द्वारा जमा किए गए अधिकतर ट्रांसफर सर्टिफिकेट प्राइवेट स्कूलों के मिले, रांची में ऐसे बच्चों की संख्या 12 हजार के करीब

4 चौंकाने वाले तथ्य आए सामने

धनबाद में निजी स्कूलों से नाम कटाने वालों में 50% बेटियां

1.धनबाद में पता चला कि सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं में करीब 1006 बच्चे निजी स्कूलों से नाम कटा कर आए हैं। यह 35 स्कूलों में हुए कुल नामांकन का करीब 40% है। निजी स्कूलों से नाम कटवा कर सरकारी स्कूल पहुंचने वाले विद्यार्थियों में 51 प्रतिशत से अधिक बेटियां हैं। ये शहर के कई प्रतिष्ठित सीबीएसई-आईसीएसई स्कूलों में पढ़ती थीं।

कई गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में कोरोनाकाल में ताले लग गए

2. सरकारी स्कूलों में एडमिशन बढ़ने का प्रमुख कारण कई गैर मान्यता प्राप्त स्कूल का कोरोनाकाल में बंद होना भी है। ऐसे स्कूल कोरोना में मंदी के कारण पढ़ाई जारी नहीं रख पाए और अंतत: स्कूलों में ताला लग गया। रांची के जिला शिक्षा अधीक्षक भी इसकी पुष्टि करते हैं। उनके अनुसार रांची में कई ऐसे स्कूल बंद हो गए हैं। इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने भी सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया।

आदेश के बावजूद बकाया फीस पर ऑनलाइन क्लास से हटाया

3. धनबाद के बाड़ामूड़ी निवासी उदय प्रताप सिंह ने बताया कि उनके दो बच्चे शहर के एक प्रतिष्ठित आईसीएसई स्कूल में पढ़ते थे। मई में स्कूल प्रबंधन ने बकाया फीस के रूप में 60 हजार रुपए की मांग की। फीस जमा नहीं होने पर बच्चों का नाम ऑनलाइन क्लास से हटा दिया। कोरोना से आर्थिक स्थिति खराब होने से उन्होंने बच्चों का नाम पास के ही सरकारी विद्यालय उत्क्रमित उवि लोवाडीह में करा दिया।

8वीं कक्षा में इस साल 40% तक विद्यार्थी बढ़ गए सरकारी स्कूलों में

4. रांची के सरकारी स्कूलों में इस साल आठवीं कक्षा में पिछले सालों की अपेक्षा 40% ज्यादा छात्र-छात्राओं ने नामांकन लिया है। शिक्षा अधिकारी इसके लिए भी कोरोनाकाल में तंगी को आधार बताते हैं। कहते हैं जिन्हें निजी स्कूलों में फीस महंगी लगने लगी, उन्होंने इसी समय स्कूल बदलना उचित समझा। सरकारी स्कूलों में एडमिशन लेने के लिए 8वीं कक्षा तक स्थानांतरण प्रमाण पत्र की भी जरूरत नहीं पड़ी।

चुनिंदा कारणों से जानिए क्यों निजी स्कूलों में छूटी पढ़ाई

लाॅकडाउन में नौकरी गई, 3 महीने में ही बेटे को निजी स्कूल से हटाना पड़ा

धनबाद के रानी बांध मल्लिक बस्ती निवासी मणि देवी कहती हैं कि अप्रैल में निजी स्कूल में बेटे का नामांकन कराया। लॉकडाउन के कारण पति की नौकरी छूट गई। तीन माह में ही बेटे का नाम कटाकर सरकारी मध्य स्कूल धैया में लिखाना पड़ा।

6 माह से बंद है काम, पब्लिक स्कूल की महंगी फीस नहीं जमा कर पाए

रांची के सिंह मोड़ निवासी मनोज कुमार कहते हैं कि छह माह से काम ठप है। वे ठेकेदारी करते हैं। अभी की कमाई से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में बच्चों की स्कूल फीस जमा करने में असमर्थ हैं। इसलिए निजी स्कूलों से नाम कटाना पड़ा।

पहले लॉकडाउन के बाद से नया जॉब नहीं मिला तो नाम कटाना ही पड़ा

धबनाद की लाहबनी धैया निवासी लक्ष्मी देवी कहती हैं कि पहले लॉकडाउन में ही पति की नौकरी चली गई। अब तक कोई नया स्थायी जॉब नहीं मिला है। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने से बेटे का नाम निजी स्कूल से कटाना पड़ा।

अधिकारियों ने भी माना

गैर मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों के ज्यादा बच्चे आए

सरकारी स्कूलों में इस वर्ष नामांकन बढ़ा है। इसमें काफी बच्चे प्राइवेट स्कूलों से नाम कटाकर आए हैं। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष कक्षा पहली से 8वीं तक मेंं करीब 20000 बच्चे बढ़े हैं। ये बच्चे उन गैर मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों के हैं जो कोरोनाकाल में पढ़ाई जारी नहीं रख पाए हैं।

- कमला सिंह, जिला शिक्षा अधीक्षक, रांची

और बच्चे छोड़ सकते हैं...

सरकारी स्कूलाें में निजी स्कूलाें के काफी बच्चाें ने भी दाखिला लिया है। इसकी बड़ी वजह काेराेनाकाल में अभिभावकाें की आर्थिक स्थिति का कमजाेर हाेना भी है। सरकारी स्कूल में 1-8वीं कक्षा में दाखिले के लिए टीसी की जरूरत नहीं है। केवल अभिभावकाें का घाेषणा पत्र चाहिए। अभी निजी स्कूलाें से और बच्चों के आने की उम्मीद है।

-इंद्रभूषण सिंह, डीएसई, धनबाद

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