लातेहार में आदिम जनजाति का हाल:8 साल से बिरहाेर परिवार लकड़ी और पत्तों से घर बना रहने को हैं मजबूर, कुछ भी नहीं मिली सरकारी सुविधा

लातेहार9 महीने पहले
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सुधन बिरहोर का पूरा परिवार लगभग 8 सालों से झोपड़ी नुमा घर में रहने को मजबूर हैं। - Dainik Bhaskar
सुधन बिरहोर का पूरा परिवार लगभग 8 सालों से झोपड़ी नुमा घर में रहने को मजबूर हैं।

सरकार से लेकर जिला प्रशासन दावा करती है कि जिन आदिम जनजाति बिरहोर परिवार के पास आशियाना नहीं है, उसे बिरसा आवास योजना का लाभ दिया जाएगा। लेकिन लातेहार में आदिम जनजाति का एक बिरहोर 12 सदस्यों का परिवार पत्तों और लकड़ी से झोपड़ी बना रहने को मजबूर हैं। जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी में सदर प्रखंड के बेंदी पंचायत का एक गांव बंगला टोला है। जहां आज भी आदिम जनजाति के एक बिरहोर परिवार को बिरसा आवास का लाभ नहीं मिल पाया है।

सुधन बिरहोर का पूरा परिवार लगभग 8 सालों से झोपड़ी नुमा घर में रहने को मजबूर हैं। सुधन बिरहोर के परिवार में 12 लोग हैं। सभी इसी झोपड़ी में एक साथ रहने को मजबूर हैं। हालांकि परिवार के किसी एक सदस्य के नाम से आवास मिला है। लेकिन वह भी अभी तक अधूरा है।

परिवार के पास राशन कार्ड भी नहीं
इस बिरहोर परिवार को सरकारी सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिला पाया है। परिवार वालों का आज तक राशन कार्ड भी नहीं बन पाया है। जिस कारण राशन भी नहीं मिलता है। कोरोना काल में जिन परिवार का राशन कार्ड नहीं है, उसे भी 10 किलो चावल दिया जाना था। वह भी इस परिवार को नहीं मिल पाया है। बृद्धा पेंशन का भी लाभ नहीं मिलता है।

आज भी आदिम जनजाति के एक बिरहोर परिवार को बिरसा आवास का लाभ नहीं मिल पाया है।
आज भी आदिम जनजाति के एक बिरहोर परिवार को बिरसा आवास का लाभ नहीं मिल पाया है।

बरसात के दिनों में होती है परेशानी

बिरहोर परिवार को सबसे बड़ी परेशानी बरसात के दिन में होती है। लगातार बारिश होने के कारण पूरा परिवार रात भर जाग कर समय काटता है। वह किसी तरह अपनी झोपड़ी नुमा घर को घेराबंदी कर उसके अंदर रहने को मजबूर हैं।

मामले की जानकारी लेते हैं। अगर इस तरह का मामला है तो उस परिवार को बिरसा आवास का लाभ दिया जाएगा। -मेघनाथ उरांव,बीडीओ, लातेहार

रिपोर्ट: पंकज प्रसाद।

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