बेटे ने अर्थी को कंधा देने से किया इंकार:आगे आईं बेटियां, पिता के शव को श्मशान तक पहुंचाया, दबाव में पुत्र ने दी मुखाग्नि

गुमला3 महीने पहले
शव को ले जातीं बेटियां।

झारखंड के गुमला जिले में बेटियों ने पिता के शव को कंधा दिया है। मामला कामडारा प्रखंड के सालेगुटू गांव का है। एक बेटे ने अपने पिता की अर्थी को कंधा देने से इंकार कर दिया। इसके बाद पांच बेटियां एक साथ खड़ी हो गईं। पिता की अर्थी को कंधे पर उठाकर श्मशान घाट तक ले गईं। सारे विधि-विधान में हिस्सा लिया। बेटियों को परंपरा निभाते देखकर गांव के लोगों ने बेटे को धिक्कारा। आखिरकार सामाजिक दबाव में बेटा सामने आया। चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान बेटियां श्मशान घाट पर मौजूद रहीं।

ग्रामीणों ने किया सहयोग।
ग्रामीणों ने किया सहयोग।

जानकारी के अनुसार सालेगुटू निवासी 75 वर्षीय लक्ष्मी नारायण साहू की मौत मंगलवार को बीमारी के कारण हो गई। पिता लक्ष्मीनारायण और पुत्र भुवनेश्वर के बीच काफी दिनों से आपसी विवाद चल रहा था। इसके कारण आपस में पिता व पुत्र के बीच बातचीत नहीं होती थी। पिता के मौत हो जाने पर पुत्र ने शव को कंधा देने से इंकार कर दिया। रिश्तेदारों और ग्रामीणों के के समझाने पर भी जब वह नहीं अर्थी को कंधा देने के लिए तैयार नहीं हुआ। तब बेटियां सामने आकर खड़ी हो गईं। वृद्ध कर पांच बेटियों ने कहा कि वह अपने पिता को कंधा देकर श्मशान घाट तक पहुंचाएंगी। विमला देवी (कोड़ाकेल),सुमित्रा देवी(अरगोड़ा),मैनी देवी(करौंदी),पदमा देवी(तोरपा) और शांति देवी (कुलाबिरा) ने पिता के शव को कंधा देकर श्मशान घाट तक पहुंचाया।

पांच बेटियां हुईं शामिल।
पांच बेटियां हुईं शामिल।

चिता को जलाने के लिए ट्रैक्टर के जरिए लकड़ियां पहुंचाई गईं। बड़ी बेटी पिता की चिता को आग देने के लिए आगे बढ़ी। इस बीच ग्रामीणों ने बेटे घुनेश्व को धिक्कारना शुरू किया। गांव व समाज के दबाव में आखिरकार बेटा पिता के शव को मुखाग्नि देने के लिए तैयार हुआ। इसके बाद बेटे ने शव को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार की यह प्रक्रिया कोयल नदी के किनारे बालाघाट में संपन्न हुई।