बोकारो पुलिस की कार्यशैली पर सवाल:शिक्षक को थाने बुलाकर पैर के नाखून उखाड़े, मंत्री ने लिया संज्ञान, 48 घंटे गुजरे, कोई कार्रवाई नहीं

बोकारो7 महीने पहले
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पुलिस ने दी अमानवीय यातना। - Dainik Bhaskar
पुलिस ने दी अमानवीय यातना।

बोकारो में पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है। जिले के बालीडीह थाना क्षेत्र में एक घर में हुई चोरी के मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए थाने बुलाए गए एक शिक्षक को अमानवीय यातनाएं दी हैं। आरोप है कि थाना प्रभारी नूतन मोदी ने पूछताछ के दौरान जबरन आरोप कबूल करने के लिए अमानत हुसैन नाम के व्यक्ति को प्रताड़ित किया। पैर के नाखून तक उखाड़ दिए । जमकर मारपीट की। यह आचरण तब किया गया जब अमानत पेशे से शिक्षक हैं। वह इलाके में निजी स्कूल चलाकर बच्चों को पढ़ाते हैं। घटना 30 दिसंबर 2021 की है। 1 जनवरी 2022 को मामले में पुलिस अधीक्षक बोकारो के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई। झारखंड सरकार के मंत्री हफीजुल हसन ने मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस को मामले में कार्रवाई का निर्देश दिया। मामला सामने आने के 48 घंटे बाद तक थाना प्रभारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस की ओर से बताया गया है कि बोकारो SP चंदन कुमार झा ने मुख्यालय DSP मुकेश कुमार को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

पीड़ित परिवार।
पीड़ित परिवार।

कुछ ऐसा था पूरा मामला
पीड़ित अमानत हुसैन ने बताया कि वह मखदुमपुर के रहने वाले है। पड़ोसी युनूस हाशमी के घर के सदस्य इलाज के लिए दिल्ली गए। पड़ोसी होने के नाते उन्हें घर की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा। वहां वह रात को जाकर सो रहे थे। एक दिन तबीयत खराब हो गई। जिसके कारण वहां सोने नहीं जा सके। उसी रात घर में चोरी हो गई। इसकी शिकायत घर वालों ने बालीडीह पुलिस थाने में की। जहां पूछताछ के लिए बालीडीह थाना प्रभारी नूतन मोदी के द्वारा फोन कर पीड़ित को थाने बुलाया गया। थाने में ही पूछताछ के दौरान अमानत हुसैन की अमानवीय तरीके से पिटाई की गई। उसके पैर के अंगूठे का नाखून उखाड़ दिया गया। पीड़ित को स्थानीय दो मुखियाओं के द्वारा PR बांड से रिहा कराकर घर लाया गया था।

मंत्री ने लिया संज्ञान।
मंत्री ने लिया संज्ञान।

पुलिस का तर्क
पुलिस अधिकारियों की माने तो चोरी की दिन पीड़ित और उसकी पत्नी घर में रहने के बावजूद फोन से एक दूसरे के संपर्क में थे। पुलिस इसी शक के आधार पर पीड़ित से पूछताछ करने की बात कह रही है।

सरकार से इंसाफ की गुहार
इस अमानवीय घटना की शिकायत झारखंड के मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री के ट्विटर अकाउंट में भी की है। पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने की मांग उठ रही है। धनबाद के सांसद ने बोकारो के DIG को पत्र लिखकर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। लोग पीड़ित परिवार के समर्थन में आंदोलन चला रहे हैं।

पीड़ित पक्ष का दावा, राजनीतिक संरक्षण के कारण नहीं हो रही कार्रवाई
पीड़ित परिवार का कहना है कि थाना प्रभारी पर राजनीतिक संरक्षण होने के कारण कार्रवाई नहीं हो रही। वह झारखंड सरकार में बड़े पद पर बैठे व्यक्ति की करीबी बताती हैं। यही कारण हैं कि अपनी सेवा के दौरान थाना प्रभारी को सबसे अधिक बोकारो जिले में ही पदस्थापना मिली। दूसरे जिलों में भेजे जाने के कुछ समय बाद उन्हें फिर बोकारो बुला लिया गया।