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झारखंड:कोल ब्लॉक नीलामी: राज्य की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की सहमति, केंद्र को जवाब दाखिल करने का निर्देश

रांची10 महीने पहले
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झारखंड सरकार की ओर से याचिका दायर करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि यह केंद्र सरकार का बहुत बड़ा नीतिगत निर्णय है। इसमें राज्य सरकार को भी विश्वास में लेने की जरूरत है। - Dainik Bhaskar
झारखंड सरकार की ओर से याचिका दायर करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि यह केंद्र सरकार का बहुत बड़ा नीतिगत निर्णय है। इसमें राज्य सरकार को भी विश्वास में लेने की जरूरत है।
  • मुख्यमंत्री ने याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट को दिया धन्यवाद
  • कहा- राज्य सरकार पर्यावरण और वनों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध

कोयला ब्लॉक नीलामी के खिलाफ झारखण्ड सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। न्यायालय ने केंद्र को वाणिज्यिक खनन के लिए कोयला ब्लॉक नीलामी के खिलाफ झारखंड सरकार की याचिका पर चार सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोयला ब्लॉक की नीलामी के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति देने के लिए धन्यवाद दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण, वनों और वन में निवास करने वाले समुदायों को सुरक्षित करने के लिए सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। 

हेमंत ने कहा था- राज्य सरकार को भी विश्वास में लेने की जरूरत
कोल ब्लॉक नीलामी के खिलाफ झारखंड सरकार की ओर से याचिका दायर करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि यह केंद्र सरकार का बहुत बड़ा नीतिगत निर्णय है। इसमें राज्य सरकार को भी विश्वास में लेने की जरूरत है। केंद्र और राज्य सरकार समन्वय स्थापित कर आगे बढ़ सकते हैं। एक स्वस्थ परंपरा कायम हो सकती है।

हेमंत ने कहा था कि खनन की पुरानी व्यवस्था से बाहर निकलने के बाद भी यहां के रैयतों (किसान) को उनका अधिकार नहीं मिला है। विस्थापन का दंश जारी है। बड़े पैमाने पर समस्याएं और जमीन विवाद उलझा हुआ है। -फाइल फोटो।
हेमंत ने कहा था कि खनन की पुरानी व्यवस्था से बाहर निकलने के बाद भी यहां के रैयतों (किसान) को उनका अधिकार नहीं मिला है। विस्थापन का दंश जारी है। बड़े पैमाने पर समस्याएं और जमीन विवाद उलझा हुआ है। -फाइल फोटो।

हेमंत सोरेन ने सवाल खड़ा किया था कि क्या यह जरूरी नहीं था कि पहले से बंद पड़े उद्योग-धंधों की जरूरतों का आकलन कर लिया जाता। राज्य में हमेशा खनन एक ज्वलंत विषय रहा है। इसको लेकर अब नई प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उसमें फिर पुरानी व्यवस्था में जाने की संभावना है जिससे हम बाहर आए थे। हेमंत ने कहा था कि खनन की पुरानी व्यवस्था से बाहर निकलने के बाद भी यहां के रैयतों (किसान) को उनका अधिकार नहीं मिला है। विस्थापन का दंश जारी है। बड़े पैमाने पर समस्याएं और जमीन विवाद उलझा हुआ है। इसको लेकर मजदूर और इससे जुड़े संगठन सड़क पर हैं। इसीलिए हम लोगों ने केंद्र सरकार से इस मामले में जल्दबाजी नहीं करने का आग्रह किया था। लेकिन, केंद्र की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला।

सोरेन ने कहा था कि यह नहीं दिखा कि केंद्र की नीति में कोई पारदर्शिता है। राज्य और यहां के लोगों को कैसे फायदा है। जरूरत तो यह थी कि यहां इतने दिनों से खनन हो रहा है तो एक सर्वे होता, जिसमें यह स्पष्ट होता कि यहां के लोगों कितना लाभ होगा। पहले नहीं मिला तो क्यों नहीं मिला। लेकिन केंद्र ने हड़बड़ी दिखाई। लॉकडाउन में विदेश निवेश कैसे होगा, यह भी सवाल है। इसलिए झारखंड ने कोल ब्लॉक नीलामी को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है।

व्यवसायियों का समूह केंद्र को जकड़ रखा है
हेमंत ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की हड़बड़ी के पीछे यह कारण है कि उसे व्यवसायियों के एक समूह ने जकड़ रखा है। उन्होंने कहा कि महामारी के बीच इस तरह का काम करना, वही बात है- जैसे गांव में आग लगी हो और कुछ लोग सामान चुरा कर भाग निकले।

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