मासूम की नासमझी:पलामू में मास्क नहीं लगाने पर आठवीं के बच्चे को स्कूल में टीचर ने डांटा, घर में मां से हुई बहस,फांसी लगाकर दे दी जान

पलामू2 महीने पहले
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पलामू का शहर थाना भवन। - Dainik Bhaskar
पलामू का शहर थाना भवन।

झारखंड के पलामू जिले में महज पंद्रह वर्ष के बच्चे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह कक्षा आठवीं का छात्र था। बताया जा रहा है कि शहर थानान्तर्गत सुदना पटेलनगर में रहने वाले संजीव कुमार सिंह का बेटा हिमांशु कुमार बिना मास्क लगाए स्कूल चला गया था। वहां शिक्षक ने उसे कोरोना महामारी से सुरक्षा में लापरवाही का हवाला देते हुए डांट दिया।

स्कूल से घर लौटने पर मां से बहस हो गई। मासूम ने नासमझी में आकर आत्महत्या कर ली। वह अघोर आश्रम रोड में संचालित न्यू विजन पब्लिक स्कूल का छात्र था। घटना की सूचना मिलने के बाद बच्चे के घर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
कुछ ऐसे हुई घटना
बच्चे के पिता के मुताबिक मंगलवार की सुबह हिमांशु स्कूल गया था।वह बिना मास्क लगाए स्कूल चला गया था। मास्क नहीं पहनने पर टीचर की ओर से उसे डांटा गया था। दोपहर करीब साढ़े ग्यारह बजे स्कूल की छुट्टी हुई। गुस्से में हिमांशु घर पहुंचा। घर आने पर मास्क को लेकर मां के साथ भी हिमांशु का विवाद हो गया। मां से बहस के बाद वह एक कमरे में चला गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

इधर मां घर के कार्यो में व्यस्त थी। एक बजे के करीब हिमांशु को खाना खाने के लिए वह बुलाने गई। कई बार दरवाजा पीटने और आवाज़ देने पर दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद मां ने दरवाजा तोड़ दिया। अंदर जाकर देखा कि बेटा फांसी के फंदे से झूल रहा था। इस वक्त उसके पिता घर पर नहीं थे। पुलिस को घटना की जानकारी दी गई।
स्कूल प्रबंधन का दावा
इस मामले पर न्यू विजन पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल अमित सिंह का कहना है कि स्कूल में मास्क लगाने के लिए किसी बच्चे को प्रताड़ित नहीं किया जाता है।मास्क लगाना सरकार की गाइडलाइन है । इसलिए उसका अनुपालन करने की बात कही जाती है। प्रतिदिन कई बच्चे मास्क के बगैर स्कूल आते हैं। उन्हें मास्क लगाने के लिए समझाया जाता है। स्कूल में मास्क उपलब्ध रहने पर स्टूडेंट को दिया भी जाता है।

मनोवैज्ञानिक की राय
बच्चों के साथ बातचीत में बड़ों को शालीनता का परिचय देना चाहिए। घर व स्कूल के माहौल का बच्चों के मन मस्तिष्क पर बड़ा गहरा असर पड़ता है। बच्चों के साथ कभी भी तेज आवाज में बात करने अथवा मारपीट करने से बचना चाहिए। कुछ बच्चे बहुत अधिक संवेदनशील होते हैं। वह छोटी-छोटी बातों से नाराज हो जाते हैं। कई बार यह बच्चों में तनाव की वजह बन जाता है।
डा. जेपी मिश्रा, मनोविशेषज्ञ सह वीसी, रामचंद्र चंद्रवंशी विवि, पलामू

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