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नक्सलियों के खिलाफ अभियान:सुरक्षाबलों और नक्सलियों में मुठभेड़, मारा गया 10 लाख रुपए का इनामी नक्सली

चतरा12 दिन पहले
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  • घटनास्थल से पुलिस ने एक एके 56, एक इंसास, रेडियो सेट, डेटोनेटर व नक्सली साहित्य बारामद किया
  • ग्रामीणों का कहना है कि जोनल कमांडर आलोक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान वीरेंद्र यादव के साथ संघर्ष में मारा गया

कोबरा बटालियन के साथ हुई मुठभेड़ में दस लाख का इनामी माओवादी जोनल कमांडर आलोक यादव उर्फ गुलशन उर्फ रवि मारा गया। आलोक बाराचट्टी थाना क्षेत्र के महुअरी गांव में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में नदरपुर पंचायत की मुखिया शारदा देवी के देवर वीरेंद्र यादव व उसके साथी जयराम यादव की हत्या कर सुरक्षित स्थान की ओर निकलने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान आलोक व उसके दस्ते की कोबरा बटालियन 205 के 17 नंबर टीम के साथ मुठभेड़ हो गई। इस मुठभेड़ में आलोक मारा गया।

घटनास्थल से पुलिस ने एक एके 56, एक इंसास, रेडियो सेट, डेटोनेटर व नक्सली साहित्य बारामद किया है। पुलिस के अनुसार, इस घटना में तीन ग्रामीण भी घायल हो गए। इनमें से एक विकास कुमार की मौत पीएमसीएच में इलाज के दौरान हो गई। इस तरह इस पूरे घटनाक्रम में चार लोगों की मौत हो गई।

महुअरी गांव में ग्रामीणों द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में आलोक और उसके दस्ते ने रात 12:05 बजे हमला बोला और कार्यक्रम देख रहे वीरेंद्र यादव व उसके साथी जयराम यादव को गोली मार दी। इस घटना में तीन अन्य लोग भी घायल हो गए। वीरेंद्र यादव पूर्व से माओवादियों की हिट लिस्ट में था। 2008 में नक्सलियों ने वीरेंद्र यादव के बड़े भाई व मुखिया शारदा देवी के पति शंभू यादव की भी हत्या कर दी थी।

माओवादी आलोक सदर थाना क्षेत्र के सिकिद गांव का रहने वाला था। वह 14 साल की उम्र में ही माओवादियों के साथ चला गया था। पुलिस के अनुसार, आलोक व उसके दस्ते के सांस्कृतिक कार्यक्रम में आने की गुप्त सूचना मिली थी। इस सूचना पर उस क्षेत्र में कोबरा बटालियन देर शाम से ही सक्रिय थी। सांस्कृतिक कार्यक्रम में जैसे ही गोली चलने की आवाज सुनाई पड़ी, वैसी ही कोबरा बटालियन के जवानों ने क्षेत्र की घेराबंदी कर लिया। इसी दौरान आलोक व जवानों के बीच सीधी मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ 40 मिनट तक चली। घटनास्थल झारखंड के चतरा जिले के हंटरगंज थाना क्षेत्र से सटा हुआ है। यह इलाका बिहार व झारखंड का सीमावर्ती क्षेत्र है।

ग्रामीणों ने कहा- शनिवार की रात नक्सलियों के खिलाफ वीरेंद्र और उसके साथियों ने जमकर संघर्ष किया था

इधर, ग्रामीणों का कहना है कि जोनल कमांडर आलोक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान वीरेंद्र यादव के साथ संघर्ष में मारा गया। वीरेंद्र व उसका परिवार पहले से माओवादियों के टारगेट पर था। उनकी नक्सलियों से पुरानी दुश्मनी रही है। भाई शंभू यादव की हत्या के बाद वीरेंद्र को लाइसेंसी राइफल मिला हुआ था। वह निजी बॉडी गार्ड भी रखा हुआ था। उनके पास भी हथियार था। घटना की रात नक्सलियों के खिलाफ वीरेंद्र और उसके साथियों ने जमकर संघर्ष किया था। पुलिस वहां तड़के तीन बजे पहुंची थी।

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