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पुराने विवाद में नया Twist:नवअंगीभूत कॉलेजों में फर्जी तरीके से बहाल शिक्षकों व कर्मचारियों की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फॉरेंसिक जांच शुरू

जमशेदपुर2 महीने पहले
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जमशेदपुर स्थित एबीएम कॉलेज का भवन। - Dainik Bhaskar
जमशेदपुर स्थित एबीएम कॉलेज का भवन।

संयुक्त बिहार के समय नवअंगीभूत किए गए महाविद्यालयों में फर्जी तरीके से बहाल हुए शिक्षकों व कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी फॉरेंसिक टीम ने इन महाविद्यालयों में बहाल शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच प्रारंभ कर दी है। कोर्ट के आदेश पर कोल्हान विश्वविद्यालय के एक मात्र नवअंगीभूत महाविद्यालय एबीएम कॉलेज पहुंचकर फॉरेंसिक टीम ने जांच की है। कई कागजात जब्त कर अपने साथ ले गई। यह कार्रवाई बिहार व झारखंड के सभी नवअंगीभूत कॉलेजों में होनी है। इसके लिए अलग-अलग तिथि निर्धारित की गई है। मामला सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा होने के कारण इस कार्रवाई में पूरी तरह गोपनीयता बरती जा रही है। जांच शुरू होते ही पुराने विवाद में नया Twiist आ गया है। शिक्षकों व कर्मचारियों के बीच हडकंप मचा हुआ है।

संयुक्त बिहार के समय कुल 40 कॉलेजों को नवअंगीभूत किया गया था। राज्य विभाजन के बाद 12 महाविद्यालय झारखंड के हिस्से आ गए। कोर्ट के पास याचिका दायर कर शिकायत की गई कि इन कॉलेजों में कई लोग शिक्षक व कर्मचारियों के पदों पर फर्जी तरीके से बहाल हो गए। कुछ लोगों ने बिना सेवा दिए ही वेतन व बकाया भुगतान तक ले लिया। वहीं सही तरीके से बहाल लोगों का पेंशन निर्गत नहीं हो रहा था। इसके बाद कोर्ट ने इसकी जांच कराने का निर्णय लिया।

कुछ ऐसा है विवाद
दरअसल बिहार सरकार की ओर से नवअंगीभूत किए गए कॉलेजों में सेवा दे रहे शिक्षकों व कर्मचारियों के सेवा समायोजन के लिए पहले अग्रवाल कमीशन का गठन हुआ। कमीशन ने इसके लिए दो ग्रेड निर्धारित किए। इसे आर वन एवं आर टू नाम दिया गया। आर वन श्रेणी में आए लोगों का समायोजन तत्काल प्रभाव से कर दिया गया। वहीं आर टू श्रेणी में रहे लोगों को रिक्त पद के विरूद्ध समायोजित किया जाना था। कुछ समय बाद समायोजन नहीं होने पर प्रभावित लोगों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद एसबी सिन्हा कमीशन का गठन किया। इस आयोग ने ज्वाइनिंग तिथि के आधार पर शिक्षकों व कर्मचारियों का समायोजन किया।

जिन कॉलेजों में पद नहीं थे। वहां छायापद सृजित किया। इसके तहत यह पद तब तक ही बने रहते, जबतक इस पद के विरूद्ध नियुक्त संबंधित व्यक्ति सेवानिवृत्त नहीं हो जाता। यह मामला वर्ष 1986 से चल रहा है। आरोप है कि एसबी सिन्हा आयोग के आदेश के हवाले से कई जगहों पर लोगों ने अपनी नियुक्ति फर्जी तरीके से करा ली। बिना सेवा दिए ही सारा लाभ अर्जित कर लिया। इसके बाद मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने ऐसे मामलों का सत्यापन कराने के लिए फॉरेंसिक टीम गठित कर जांच करने का आदेश दिया।

विभाग ने रोक दिया था वेतन भुगतान
नवअंगीभूत कॉलेजों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद झारखंड सरकार के उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग ने राज्य के सभी नवअंगीभूत कॉलेजों में सेवा देने वाले शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए रोक दिया था। कोर्ट की ओर से कागजातों की जांच के लिए टीम गठित करने के फैसले के बाद सभी लोगों का वेतन भुगतान फिर प्रारंभ हुआ।

डा. पीके पाणि
डा. पीके पाणि

विवि का पक्ष
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित टीम अपना काम कर रही है। टीम ने कोल्हान विवि के एक मात्र नवअंगीभूत महाविद्यालय एबीएम कॉलेज का दौरा किया। टीम का विवि के साथ कोई संपर्क नहीं है। वह स्वतंत्र तरीके से अपना काम कर रही है।
डा. पीके पाणि, जनसंपर्क पदाधिकारी, केयू

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