स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल:इलाज के अभाव में हजारीबाग के बिरहोर की रिम्स में मौत, पीड़ित परिवार ने कहा, नहीं मिली सरकारी मदद

कटकमसांडी​​​​​​​ (हजारीबाग)7 महीने पहले
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मौत के बाद बिरहोर टांडा में पसरा मातम। - Dainik Bhaskar
मौत के बाद बिरहोर टांडा में पसरा मातम।

झारखंड के हजारीबाग जिले के कटकमसांडी बिरहोर टांडा निवासी बिफया बिरहोर (40 वर्ष)की मौत हो गई। वह कुछ समय से बीमार था। आरोप है कि विलुप्त हो रही आदिम जनजाति से आने वाले इस व्यक्ति को स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय रहते समुचित चिकित्सा सुविधा मुहैया नहीं कराई गई। पीड़ित परिवार ने कहा कि इलाके में विभाग की ओर से स्वास्थ्य जांच शिविर नहीं लगाया जाता। इस कारण उन्हें बेहतर इलाज मुहैया नहीं हो पाता।

परिवार ने बताया कि बिफया बिरहोर की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब थी। स्वास्थ्य विभाग के किसी कर्मचारी अथवा अधिकारी ने मदद नहीं की। गुरुवार की शाम को वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। घटना की जानकारी परिजनों ने प्रमुख कुमारी श्रीती पांडेय को दी। इसके बाद उसे इलाज के लिए वह अपने खर्चे पर एंबुलेंस से हजारीबाग ले गईं।

चिकित्सकों ने प्राथमिक इलाज के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते रिम्स रांची रेफर कर दिया। रिम्स में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बिरहोर की मौत के बाद बिरहोर टांडा में मातम पसर रहा। मृतक की पत्नी बिरसी बिरहोर सहित तीन बच्चे क्रमशः मुकेश बिरहोर ,पिंकी कुमारी तथा मुन्नी कुमारी अनाथ हो गए हैं। हजारीबाग के उपायुक्त आदित्य कुमार आनंद ने इलाज के अभाव में मौत की सूचना को गलत करार दिया है। कहा है कि बिरहोर ब्रेन हेमरेज से पीड़ित था। लंबे समय से इलाज चल रहा था। इसी बीमारी के कारण उसकी मौत हुई।

पत्नी ने कहा, पति की बीमारी के कारण परिवार चलाना हुआ मुश्किल
मृतक की पत्नी बिरसी बिरहोर का कहना है कि पति के बीमार होने के कारण वह मजदूरी भी नहीं कर पा रही थी। परिवार चलाना मुश्किल हो गया था। बिफया की मौत के बाद इसकी जानकारी प्रमुख ने स्थानीय प्रशासन को दी। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। आनन-फानन में सितंबर व अक्टूबर माह का राशन परिवार को 20 नवंबर को दिया गया। प्रमुख ने पांच सौ रुपये देकर अंतिम संस्कार की सामग्री उपलब्ध कराई। मामला संज्ञान में आने के बाद बीडीओ पीड़ित परिवार के घर जांच के लिए पहुंचीं।

इलाके में पानी तक की व्यवस्था नहीं
बिरहोर टांडा में रहने वाले बिरहोर समाज को मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं हो पा रही हैं। इलाके में दो नल पिछले तीन माह से खराब पड़े हुए हैं। जल मीनार से भी लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। पेयजलापूर्ति नही होने के कारण वहां के लोग रेलवे स्टेशन में लगे नल से पानी लाने के लिए जाते हैं। इसके लिए उन्हें कई बार स्टेशन पर खड़ी ट्रेन को नीचे से पार होना पड़ता है। खराब चापानल की मरम्मति को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन व पीएचईडी के समक्ष शिकायत की गई। इस पर किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया।
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बिरहोर की तबीयत खराब होने के बाद स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की ओर से उसके इलाज के लिए किसी तरह की व्यवस्था नहीं की गई। विलुप्त हो रही इस आदिम जनजाति से आने वाले व्यक्ति की जान समय पर इलाज मुहैया कराकर बचाई जा सकती थी। मैने अपने व्यक्तिगत प्रयास से पहले उसे हजारीबाग भेजा। इसके बाद उसे रिम्स रेफर कर दिया गया। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार को दो माह का राशन तक मुहैया नहीं कराया गया था।
कुमारी श्रीती पांडेय, प्रमुख
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बिरहोर की मौत की जानकारी मुझे नहीं है।मैं बाहर हूं ।आज देर शाम वापस आ रही हूं। उसके बाद मैं पीड़ित परिवार के घर जाकर मामले की जानकारी लूंगी। परिवार से मिलकर यथा संभव मदद करूंगी।
सरिता देवी,मुखिया, कटकमसांडी
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बिफया बिरहोर की मौत की जानकारी के बाद पंचायत सचिव राजेंद्र ठाकुर को भेजा गया था। इसके बाद मैं खुद भी मौके पर गई। पीड़ित परिवार को राशन प्रदाता पारस महिला मंडल से सितंबर व अक्टूबर माह का राशन दिलवाया गया है।
वेदवंती कुमारी, बीडीओ
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बिरहोर की मौत के बारे में जानकारी मिली है। परिवार की ओर से स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाना गलत है। समय समय से वहां कैंप लगाता रहता है। रविवार को फिर इलाके में मैं टीम भेज रहा हूं।
डा एसपी सिंह, सिविल सर्जन, हजारीबाग

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