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छत्तीसगढ़ में शहादत, झारखंड में मातम:सिमडेगा के गोबरीगढ़ गांव के रहने वाले थे शहीद शांति भूषण तिर्की; परिवार बोला; पिता की कुर्बानी का बदला बेटा लेगा

सिमडेगाएक वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शनिवार को पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में झारखंड का लाल शहीद हो गया। गोलीबारी में अपने प्राणों की आहुति देने वाले CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट शांति भूषण तिर्की सिमडेगा के बोलबा प्रखंड के कसीरा गोबरीगढा गांव के रहने वाले थे। उन्होंने 25 फरवरी 2003 को CRPF 168वीं बटालियन में योगदान दिया था। गांव में शांति भूषण तिर्की का पुराना घर है। वह यहीं पैदा हुए थे।

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घटना की खबर जैसे ही गांव पहुंची। चौतरफा मातम छा गया। परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल था। एक तरफ परिवार के सदस्य की शहादत से लोगों की सीना गर्व से चौड़ा था। दूसरी तरफ अपने चहेते के खोने का गम था। परिवार ने कहा कि वह इस लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। पिता की कुर्बानी का बदला बेटा लेगा।

पैतृक आवास पर मातम
पैतृक आवास पर मातम

स्थानीय लोगों ने बताया कि शांति भूषण तिर्की के पिताजी का नाम स्टीफन तिर्की था। वह भी फौज थे। उन्होंने BSF में अपनी सेवाएं दी थीं। माता का नाम ग्रेस बारला था। करीब तीन वर्ष पूर्व मां का निधन हुआ था। शांति भूषण तिर्की की पत्नी का नाम पुष्पा मंजुला मिंज है। वह बेहरीनबासा के रहने वाली हैं। शांति भूषण तिर्की के दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा अनिकेत तिर्की पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। छोटी बेटी ऐनी अनीशा तिर्की दो वर्ष की है।

शांति भूषण का परिवार रांची में रहता है। शांति भूषण तिर्की की शिक्षा गांव पर रही हुई थी। शांति भूषण के बड़े बाबा जेम्स तिर्की गांव में ही रहकर खेती करते हैं। परिवार की बहू कान्ति तिर्की ने बताया कि शांति भूषण उनकी बड़ी बेटी को भी अपने परिवार के साथ रांची में रखकर पढ़ाते हैं। वह काफी मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थी। गांव और परिवार के लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। शांतिभूषण लंबे समय से छत्तीसगढ़ में पदस्थापित थे। दोपहर को परिवार को घटना की जानकारी मिली।

शहीद अधिकारी शांति भूषण तिर्की
शहीद अधिकारी शांति भूषण तिर्की

कान्ति तिर्की ने कहा कि हमारा परिवार देश की सेवा के लिए समर्पित हैं। हमें अपने परिवार के सदस्य के असमय बिछड़ने का गम है लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं है। पिता की मौत का बदला बेटा लेगा। हम शांति भूषण के बेटे और बेटी को भी वर्दी में ही देखना चाहते हैं।
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(इनपुट : सिमडेगा से शहजादा प्रिंस)