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झारखंड में दुर्गोत्सव:श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन करायी पूजा; रजरप्पा के छिन्नमस्तिका मंदिर में कोरोना को लेकर भीड़ कम, सोशल डिस्टेंसिंग का हो रहा पालन

रांची/धनबाद/जमशेदपुर8 दिन पहले
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वीडियो कॉलिंग के जरिए पूजा कराते पुजारी। छिन्नमस्तिका मंदिर के पुजारी ने बताया कि हर साल के मुकाबले इस साल काफी कम संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे हैं।
  • आज से नवरात्र शुरू, नवरात्र के दौरान 18, 19 और 23 अक्टूबर को तीन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं
  • मां दुर्गा तीन सर्वार्थसिद्धि और त्रिपुष्कर योग का मंगल संयोग लेकर आ रहीं, जाएंगी भी खुशियां बिखेरती

झारखंड के विभिन्न जिलों के माता मंदिरों में कलश स्थापना के साथ नवरात्र शुरू हो गया है। रामगढ़ के रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर, धनबाद के शक्ति मंदिर समेत विभिन्न जिलों में शनिवार सुबह से माता मंदिरों में श्रद्धालु पहुंचे। वहीं कोरोना को लेकर कई श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन संकल्प और पूजा अर्चना की। इस दौरान उपासकों ने पंडित के मोबाइल पर वीडियो कॉल कर उनसे पूजा करायी। रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर के पुजारी ने बताया कि कोरोना के चलते मंदिर में भीड़ कम है। उपासकों ने ऑनलाइन संकल्प कराया है। संभवत: नवमी या दशमी को वे मंदिर पहुंच कर हवन करेंगे।

छिन्नमस्तिका मंदिर में पूजा के लिए पहुंचे श्रद्धालु।
छिन्नमस्तिका मंदिर में पूजा के लिए पहुंचे श्रद्धालु।

छिन्नमस्तिका मंदिर सहित राज्य के विभिन्न माता मंदिरों में नवरात्र के पहले दिन भीड़ भी कम जुटी। साथ ही जो लोग मंदिर में पूजा के लिए पहुंचे उन्होंने कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइन का पालन किया गया। उचित दूरी बनाकर श्रद्धालुओं ने पूजा की। बता दें कि पश्चिम बंगाल के बाद झारखंड में नवरात्र यानी दुर्गापूजा धूमधाम से मनाई जाती है। राजधानी सहित राज्य के विभिन्न जिलों में भव्य पंडाल और लाइटिंग की जाती है। लेकिन इस बार कोरोना के चलते राज्य सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक, भव्य पंडाल बनाने और लाइटिंग पर पाबंदी है। साथ ही मेले के आयोजन पर भी रोक है।

छिन्नमस्तिका मंदिर में आरती ग्रहण करते श्रद्धालु।
छिन्नमस्तिका मंदिर में आरती ग्रहण करते श्रद्धालु।

मां दुर्गा का प्रथम रूप शैल-पुत्री के नाम से प्रसिद्ध है। इन्होंने पर्वतराज श्री हिमालय के यहां जन्म लिया। इसलिए इनका नाम शैल-पुत्री हुआ। इनका वाहन वृषभ यानी बैल है, इन्होंने दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में पद्म यानी कमल धारण किया हुआ है। इस बार शारदीय नवरात्र पर तीन सर्वार्थसिद्धि और त्रिपुष्कर योग का अद्भुत संयोग बना है, जो मंगलकारी है। आज से नवरात्र शुरू हो रहा है। पंडित श्यामसुंदर भारद्वाज का कहना है कि नवरात्र के दौरान 18, 19 और 23 अक्टूबर को तीन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं, वहीं 18 अक्टूबर को त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है। नवरात्र के दौरान गुरु और शनि स्वर्ग में रहेंगे, जो बेहद ही सुखदाई माने जाते हैं। इस बार नवरात्र की नवमी और दशमी पूजा एक ही दिन मनेगी। 25 अक्टूबर को सुबह 11:14 तक नवमी होगी और 11:14 के बाद दशमी मनाई जाएगी।

पूजा के दौरान हवन में बैठे श्रद्धालु।
पूजा के दौरान हवन में बैठे श्रद्धालु।

हृषिकेश पंचांग... घोड़े पर आगमन, भैंसे पर प्रस्थान
हृषिकेश पंचांग के अनुसार नवरात्र में इस बार मां घोड़े पर आ रही हैं, जबकि भैंसे पर जा रही हैं। देवी-पुराण के अनुसार नवरात्र सोमवार-रविवार को शुरू हो तो देवी आगमन हाथी पर, शनि-मंगलवार होने से घोड़े पर, गुरुवार-शुक्रवार को डोली पर, बुधवार को नाव पर आगमन माना गया है।

बांग्ला पंचांग...गमन गज से, महामारी का नाश
दुर्गाबाड़ी के मुख्य पुजारी शांतनु भट्टाचार्य ने बताया कि बांग्ला मत के अनुसार इस बार माता का आगमन डोली पर हो रहा है, जिसका प्रभाव मारक या मरण तुल्य होता है। लेकिन मां गज पर जा रही हैं। हाथी पर प्रस्थान शस्यपूर्ण वसुंधरा का प्रतीक है, यानी फसल, धन-धान्य से परिपूर्ण होगा।

छिन्नमस्तिका मंदिर में प्रसाद लेते श्रद्धालु।
छिन्नमस्तिका मंदिर में प्रसाद लेते श्रद्धालु।

झारखंड सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन
दुर्गा पूजा को लेकर जारी किए गए गाइडलाइन में कहा गया है कि मूर्ति की ऊंचाई चार फीट से कम होनी चाहिए। प्रयास यह हो कि दुर्गा पूजा अपने घर में करें या फिर मंदिर में। जहां पर परंपरागत रूप से पंडाल बनाए जाते रहे हैं। वहां छोटा पंडाल बना कर पूजा की जा सकेगी। लेकिन उसमें श्रद्धालुओं की भागीदारी नहीं होगी।

लाइटिंग का डेकोरेशन नहीं होगा
किसी थीम पर पंडाल नहीं होना चाहिए। लाइटिंग का डेकोरेशन नहीं होना चाहिए। तोरण द्वार या स्वागत द्वार नहीं बनाना है। जहां पर मूर्ति की स्थापना होगी, वहां बैरिकेडिंग होगी और बाकी पंडाल खुला रहेगा। कोई भी श्रद्धालु मूर्ति तक ना पहुंचे और भीड़ ना लगे। पंडाल के अगल-बगल या कहीं भी मेला नहीं लगाया जाएगा और ना ही किसी तरह का फूड स्टॉल लगाने की इजाजत होगी।

पंडाल के अंदर सात से ज्यादा लोगों को इजाजत नहीं
पंडाल के भीतर किसी भी स्थिति में पुजारी या आयोजक तथा अन्य किसी के साथ सात की संख्या से अधिक नहीं होना चाहिए। विसर्जन के लिए जुलूस नहीं निकाला जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा चिन्हित किए गए स्थल पर ही मूर्ति का विसर्जन किया जाना है। किसी भी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा। भोग प्रसाद का वितरण या खाना खिलाने जैसी व्यवस्था नहीं करनी है। पंडाल में पूजा करने से संबंधित समिति या आयोजक किसी को भी आमंत्रण नहीं भेजेंगे।

डांडिया जैसे कार्यक्रम भी नहीं होंगे
पंडाल का उद्घाटन समारोह जैसा कार्यक्रम नहीं होना चाहिए ताकि वहां भीड़ ना लगे। डांडिया जैसे कार्यक्रम भी नहीं होंगे। किसी भी पब्लिक प्लेस में रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। सोशल डिस्टेंसिंग रखते हुए पब्लिक प्लेस में 6 फीट की दूरी बनाए रखना होगा और मास्क पहनना अनिवार्य होगा। पंडाल के भीतर रहने वाले लोगों के लिए कोविड-19 को लेकर पहले से जारी गाइडलाइन का पालन करना होगा। जारी किए गए नियमों का उल्लंघन करने पर आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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