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अपराध:ग्रामीणों ने लाठी-डंडे से पीटकर युवक की हत्या की, मरने वाला पीएलएफआई उग्रवादी संगठन का सदस्य रहा है

गुमला13 दिन पहले
ऑटो में संदीप तिर्की का शव। मामले में फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
  • 18 साल की उम्र में युवक पीएलएफआई में शामिल हुआ था, परिवार के पांच लोगों की साल 2000 में हत्या हुई थी
  • मृतक के साथी पीएलएफआई एरिया कमांडर बसंत गोप की चार महीने पहले ग्रामीणों के हमले में मौत हुई थी

सदर थाना क्षेत्र के गुमला-सिमडेगा मुख्य मार्ग स्थित टेसेरा गांव में सोमवार सुबह करीब ग्रामीणों ने एक युवक की लाठी डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी। वारदात के बाद सैकड़ों ग्रामीण करीब एक घंटे तक घटनास्थल पर जमे रहे फिर घर चले गए। मरने वाले की पहचान पीएलएफआई उग्रवादी संगठन के पूर्व सदस्य के रूप में की गई है। फिलहाल, मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। वारदात में शामिल लोगों को चिह्नित करने में जुटी हुई है।

मोबाइल लूट के मामले में पीएलएफआई सदस्य का गांव के लोगों से चल रहा था विवाद
मरने वाले की पहचान 38 साल के टेसेरा गांव निवासी संदीप तिर्की के रूप में हुई है। बताया जा रहा है शनिवार को बरगांव के कुछ लड़कों से मोबाइल लूट की घटना हुई थी। मोबाइल की लूट किसने की, यह स्पष्ट नहीं हो सका। लेकिन घटना को लेकर संदीप तिर्की और बरगांव के कुछ लड़कों के बीच विवाद हुआ, इसके बाद मामला शांत हो गया। मोबाइल लूट मामले में ही रविवार को बरगांव के एक और लड़के से संदीप तिर्की की झड़प हो गई। इस दौरान संदीप तिर्की ने लड़के की पिटाई कर दी। इसके बाद संदीप तिर्की ने कमर से पिस्टल निकालकर तान दिया। हालांकि लोगों के बीच बचाव के बाद मामला शांत हो गया।

रविवार रात करीब 8 बजे संदीप तिर्की घर लौटा और खाना खाकर सो गया। सोमवार सुबह करीब 6 बजे उठने के बाद वह घर से कुछ दूर स्थित एक किराना की दुकान पर गया, जहां वह बैठकर अखबार पढ़ने लगा। इस दौरान बरगांव के सैकड़ों ग्रामीण लाठी-डंडा और हथियार लेकर संदीप के घर पहुंचे और उसके घर को घेर लिया। इस दौरान ग्रामीणों को पता चला कि वह घर में नहीं है। इसके बाद कुछ ग्रामीणों ने उसे अखबार पढ़ते देखा जिसके बाद उन्होंने उसे दौड़ाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों की भीड़ देखकर संदीप तिर्की डांडटोली गांव की ओर भागा। लेकिन ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और फिर लाठी-डंडे से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। उधर, सूचना के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर संदीप तिर्की के घर पहुंची। घर में तलाशी के दौरान संदीप के तकिए के नीचे से एक चाकू, जबकि कमरे से 10 कुल्हाड़ी बरामद की गईं।

घटनास्थल पर जुटे ग्रामीण।
घटनास्थल पर जुटे ग्रामीण।

संदीप को पहले से थी हमले की आशंका
संदीप के घर से बरामद कुल्हाड़ी और चाकू से आशंका जताई जा रही है कि उसे हमले की आशंका थी। इसलिए उसने घर में पर्याप्त मात्रा में हथियार रखे थे। हालांकि सर्च के दौरान पुलिस को संदीप के कमरे से पिस्टल बरामद नहीं हुआ।

एक साल पहले जेल से बाहर आया था संदीप तिर्की
बताया जा रहा है कि संदीप तिर्की ने दो साल पहले वृंदा गांव के पंचायत सचिव शनिचर प्रधान की हत्या कर दी थी। इस मामले में वह पकड़ा गया जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। एक साल पहले वह जेल से छूटकर आया था। गांववालों ने बताया कि जेल से छूटकर आने के बाद भी संदीप गांव में दबंगई दिखाता था।

करीब 20 साल पहले संदीप के पांच सदस्यों की हुई थी हत्या
जानकारी के मुताबिक, साल 2000 में संदीप के घर के पांच सदस्यों की पीएलएफआई के भूषण यादव और गुलाब खत्री के दस्ते ने हत्या कर दी थी। दरअसल, संदीप 18 साल की उम्र में ही पीएलएफआई उग्रवादी संगठन में अपने साथी बसंत गोप के साथ शामिल हो गया था। इस दौरान किसी विवाद को लेकर संदीप तिर्की और बसंत गोप ने भूषण यादव के प्रेमिका के भाई का अपहरण कर लिया था। इसके बाद दोनों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी थी।

उधर, भूषण यादव अपने प्रेमिका के भाई की तलाश करता रहा लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में उसे जानकारी हुई कि संदीप तिर्की ने अपने साथी बसंत के साथ मिलकर उसके प्रेमिका के भाई की हत्या कर दी है। इसके बाद संदीप और बसंत संगठन से अलग हो गए। उधर, प्रेमिका के भाई की हत्या का बदला लेने के लिए भूषण यादव और गुलाब खत्री का दस्ता संदीप के घर बराती की शक्ल में तीन वाहनों से पहुंचा। यहां उन्होंने बसंत के घर के पांच सदस्यों की निर्मम हत्या कर दी।

इसके बाद वे बसंत गोप के घर पहुंचे और उसके भी परिवार के चार सदस्यों की हत्या कर दी। यानी एक ही रात उग्रवादी संगठन ने नौ लोगों की हत्या कर दी। हालांकि बाद में फिर से बसंत और संदीप तिर्की संगठन में वापस आ गए थे।

चार महीने पहले संदीप के साथी बसंत गोप की भी हुई थी हत्या
चार महीने पहले सदर थाना क्षेत्र के वृंदा गांव में ग्रामीणों के हमले में संदीप तिर्की का साथी पीएलएफआई का एरिया कमांडर बसंत गोप मारा गया था। दरअसल, बसंत गोप व परमेश्वर गोप के नेतृत्व में नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने पहुंचे थे। सूचना के बाद ग्रामीण भी सचेत थे। करीब एक दर्जन नक्सली ग्रामीणों के हमले के बाद नक्सलियों को भागने पड़ा। सूचना के बाद घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने सर्च अभियान के दौरान पीएलएफआई कमांडर बसंत गोप का शव जंगल से बरामद किया गया।

बताया जाता है कि बसंत गोप साथियों के साथ वृंदा नायक टोली गांव निवासी शनिचर उरांव के बेटे भीम उरांव व पीयूष उरांव की हत्या करने पहुंचे थे। मगर इसकी भनक दोनों भाइयों को भी लग चुकी थी। बसंत व परमेश्वर के नेतृत्व में हथियारबंद नक्सलियों ने जैसे ही उनके घर पर धावा बोला। इस दौरान ग्रामीणों के बीच से चले तेज धारदार हथियार से एरिया कमांडर बसंत गोप गंभीर रूप से घायल हो गया। घायलावस्था में ही उसके साथी उसे उठाकर अपने साथ ले गए। मगर उसकी मौत हो गई।

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