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भास्कर रियलिटी चेक:सरकार के फैसले पर निजी अस्पताल प्रबंधन ने खड़े किए हाथ, मरीज लाचार; निजी अस्पताल बोले; कम पैसे में नहीं कर सकेंगे कोरोना का इलाज

रांची2 महीने पहले
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  • मंत्री ने कहा; ज्यादा चार्ज लेने की शिकायत करें, कार्रवाई होगी
  • कोरोना मरीजों के इलाज की दर 18 हजार से घटाकर 12 हजार की

सरकार ने निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजाें के इलाज की नई दर 18 हजार से घटाकर 12 हजार रुपए तय की है। लेकिन निजी अस्पतालाें ने नई दर पर इलाज करने में अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। उन्होंने दाे टूक कहा है कि लाेग अच्छा इलाज चाहते हैं ताे पैसे देने हाेंगे। हम कम खर्च में इलाज नहीं कर पाएंगे।

वहीं, गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने चेतावनी दी है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाले निजी अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई अस्पताल ज्यादा चार्ज लेता है, इसकी सूचना सरकार को दें। इनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा। दूसरी ओर मरीजों की पीड़ा यह है कि सरकार भले ही इलाज खर्च को कम कर रही है लेकिन इसका लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा।

सरकार के फैसले पर अस्पताल प्रबंधन नाराज

इलाज की दर में कटौती करने के सरकार के फैसले पर निजी अस्पताल प्रबंधन ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कोविड के गंभीर मरीजों का इलाज इतने कम राशि में करना संभव नहीं। बगैर वेंटिलेटर वाले मरीजों का इलाज करने में समस्या नहीं है, लेकिन वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट वाले मरीजों का इलाज निर्धारित राशि में रांची के किसी भी बड़े हॉस्पिटल में नहीं हो सकता है। ऐसे में सरकार एक दिन का अधिकतम चार्ज 18 हजार रुपए निर्धारित करे।

इलाज की पुरानी दर को फिर से लागू करे सरकार
सरकार द्वारा तय की गई राशि में रांची के किसी भी बड़े निजी अस्पतालों में कोविड आईसीयू और वेंटिलेटर की सुविधा के साथ संक्रमित मरीजों का इलाज करना संभव नहीं है। इलाज खर्च की पुरानी दर सही थी। मरीजों के बेहतर इलाज के लिए सरकार पुरानी दर को फिर से लागू करे। - योगेश गंभीर, अध्यक्ष, एएचपीआई

दवाइयां महंगी हैं, कम पैसे में कैसे होगा इलाज
12000 रुपए में कोविड के गंभीर मरीजों का इलाज करना असंभव है। कोविड के गंभीर मरीज को महंगी दवाइयां, इंजेक्शन रोजाना देने पड़ते हैं। ऐसे में इलाज कैसे होगा? बीके पांडेय, सैमफोर्ड हॉस्पिटल

मरीज के परिजनों को ही उठाना होगा दवा का खर्च
वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सहित कई महंगी दवाइयों से गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है। हॉस्पिटल प्रबंधन ने निर्णय लिया है कि मरीज के परिजनों को दवा खर्च उठाना होगा। - डॉ. आसिफ, एस्पिलियस हॉस्पिटल
मरीजों की पीड़ा... दर निर्धारित होने के बाद भी ज्यादा पैसा वसूल रहे अस्पताल

अस्पताल प्रबंधन इलाज के नाम पर मरीज के परिजनों से निर्धारित दर से अधिक पैसा वसूल रहे हैं। पूर्व के आदेश के अनुसार हर दिन अधिकतम 18 हजार के बजाय 40-50 हजार रुपए तक लिये गए। हैरान करने वाली बात तो यह है कि जिन मरीजों से अधिक पैसे लिए गए उनमें कई को न तो ऑक्सीजन की जरूरत थी, न ही वेंटिलेटर की। ऐसे में इलाज के तौर पर प्रतिदिन 12-15 हजार तक का ही बिल होना चाहिए था, लेकिन उनके परिजनों से अस्पताल प्रबंधन ने अधिक राशि वसूल ली।

2 केस से समझें परेशानी

  • 1. कोरोना संक्रमित कोकर की 75 वर्षीय कमला देवी को 3 अक्टूबर की शाम एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। दो दिनों में ही उनका बिल 79600 रुपए हो गया। जबकि वह नॉर्मल आइसोलेशन वार्ड में भर्ती थीं।
  • 2. कोकर के सचिन 32 दिन निजी अस्पताल में भर्ती रहे। सरकार के आदेश के बावजूद 26 अगस्त के बाद के 9 दिनों का खर्च 3 लाख रुपए लिए गए, जबकि यह राशि 162000 रुपए ही होती।

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