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रांची:कांटाटोली फ्लाईओवर का डीपीआर बनाने के लिए दो कंपनियां आगे आई, सचिव ने जल्द टेंडर फाइनल का दिया निर्देश

रांची6 दिन पहले
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फ्लाई ओवर कांटाटोली मार्ग पर योगदा सत्संग के सामने से शांतिनगर तक बनाया जाएगा। (प्रतीकात्मक फोटो)
  • 1250 मीटर लंबा फ्लाईओवर अब तक 2300 मीटर लंबा होगा

राजधानी के महत्वपूर्ण एवं बहुप्रतिक्षित कांटाटोली फ्लाई ओवर के निर्माण कार्य में अब तेजी आएगी। लॉकडाउन के कारण काम में देरी हुई। कांटाटोली फ्लाई ओवर का निर्माण अब नए सिरे से होगा। फ्लाई ओवर कांटाटोली मार्ग पर योगदा सत्संग के सामने से शांतिनगर तक बनाया जाएगा। नए सिरे से फ्लाई ओवर निर्माण के लिए संशोधित डीपीआर बनाया जाएगा। इसके लिए विस्तृत कार्य प्रतिवेदन (डीपीआर) एवं परियोजना प्रबंधन परामर्शी (पीएमसी) बहाल करने के लिए टेंडर निकाला गया था, जिसमें दो कंपनियां शामिल हुई है।

सचिव ने टेंडर जल्द फाइनल करने का दिया निर्देश, तब शुरू होगा काम

नगर विकास सचिव विनय कुमार चौबे ने जुडको के परियोजना निदेशक तकनीकी रमेश कुमार को निविदा का शीघ्र निष्पादन कर डीपीआर बनाने का काम आवंटित करने का निर्देश दिया है। सचिव ने यह भी कहा है कि डीपीआर बनने के बाद फ्लाई ओवर का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाए। इस संबंध में जुडको परियोजना निदेशक ने बताया कि दोनों कंपनियों के कागजात का तकनीकी मूल्यांकन कराया जा रहा है। जल्द ही वित्तीय बीड का भी मूल्यांकन करा कर निविदा में योग्य आने वाली को कार्य आवंटित कर दिया जाएगा। दो से तीन महीने का समय डीपीआर बनाने के लिए दिया जाएगा। डीपीआर बन जाने के बाद फ्लाई ओवर बनाने के लिए नए सिरे से संवेदक कंपनी का चयन करने के लिए निविदा निकाली जाएगी। इसमें चयनित कंपनी को फ्लाईओवर बनाने का ठेका दिया जाएगा।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी से बनेगा फ्लाईओवर

फ्लाईओवर का निर्माण आधुनिक तकनीक सेगमेंटल बाक्स गरडर सिस्टम से कराया जाएगा। नई तकनीकी के आधार पर संशोधित डिजाइन और डीपीआर भी बनेगा। वर्तमान में कांटाटोली फ्लाईओवर का निर्माण पीएससी.आइ गरडर प्रणाली से हो रहा था। पीएससी प्रणाली में गरडर को प्रीकास्ट कर क्रेन के सहयोग से खंभे पर रखा जाता है। अमूमन इस प्रणाली में रात में काम होता। डेक स्लैब की कास्टिंग कार्य स्थल पर ही होती है। यातायात भी प्रभावित होती रहती है। जबकि सेगमेंटल बाॅक्स प्रणाली में प्रस्तावित फ्लाईओवर के मध्य लाइन पर विशेष लांचर के जरिये छोटे प्रीकास्ट सेगमेंट कर आगे बढ़ते जाया जाता है। इस आधुनिक प्रणाली का इस्तेमाल बड़े शहरों में हो रहा है। इस सिस्टम में काम तेज होता है। हालांकि यह कुछ महंगा पड़ता है। इस प्रणाली में यातायात बाधित नहीं होती है। वर्तमान में कांटाटोली फ्लाईओवर का निर्माण बहु बाजार की ओर वाईएमसीए से लेकर कोकर की ओर शांतिनगर तक हो रहा था। इसकी लंबाई 1260 मीटर थी। अब तक 132 पाइल की कास्टिंग हो चुकी है। 19 खंभों में दो पाइल कैप और एक पीयर की कास्टिंग हो चुकी है। योगदा सत्संग से फ्लाईओवर का निर्माण कराए जाने से फ्लाईओवर की लंबाई लगभग 2300 मीटर हो जाएगी।

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