झारखंड के निजी फार्मेसी कॉलेज का भास्कर स्टिंग:संचालक बोला- आप चिंता न कीजिए 2 लाख रुपए में क्लास क्या, पेपर भी आउट करा देंगे

रांची10 महीने पहलेलेखक: पवन कुमार
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न कॉलेज जाने का झंझट, न ही पढ़ाई की चिंता। बस 2 लाख रुपए दो और बी फार्मा या डी फार्मा (फार्मासिस्ट) की डिग्री ले जाओ। कुछ इसी थीम पर झारखंड के 62 निजी फार्मेसी कॉलेज और निजी यूनिवर्सिटी दिल खोलकर युवाओं को डिग्री बांट रहे हैं। दो- चार कमरों के घर और फ्लैट में कॉलेज खोलकर संचालक लाखों की कमाई कर रहे हैं। यहां न लाइब्रेरी है और न इंफ्रास्ट्रक्चर। एक संस्थान को 60 स्टूडेंट्स का एडमिशन लेने की इजाजत है। कॉलेज वाले प्रति छात्र 2 लाख रुपए ले रहे हैं। इस हिसाब से 1.20 करोड़ रुपए (डी फार्मा) एक साल में कमा रहे हैं। बदले में हर साल लगभग 3,500 फार्मासिस्ट तैयार हो रहे हैं।

ये फार्मासिस्ट मरीज की जान की परवाह किए बिना दवा दुकान चलाएं या फिर अस्पताल में मरीजों को दवा दें, कोई पूछने वाला नहीं है। शिकायत मिलने पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने निजी फार्मेसी कॉलेजों की जांच कराई थी। गड़बड़ियां मिलीं, पर फाइल विभाग में दबा दी गई। अब स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने फिर से जांच कमेटी बनाई है, पर अब तक जांच शुरू नहीं हुई है। सरकारी जांच से पहले दैनिक भास्कर ने कॉलेजों का स्टिंग किया। 4 कॉलेज संचालकों से बातचीत में पता चला कि ये दो लाख में डिग्री देने की गारंटी दे रहे हैं। पढ़िए, कॉलेज संचालकों से भास्कर रिपोर्टर की बातचीत...

कॉलेज-1: रांची कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी

आप चिंता मत करिए, 5 हजार में काउंसिल सेट हो गई थी, क्वेश्चन भी आउट हुए: संचालक संजीव कुमार

रांची कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी के संचालक संजीव कुमार।
रांची कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी के संचालक संजीव कुमार।
  • रिपोर्टर: आपके यहां एडमिशन में कितना खर्चा लगेगा?
  • संजीव: डी फार्मा के लिए 1.80 लाख रुपए लगेगा। एडमिशन 2022-24 बैच में होगा।
  • रिपोर्टर: क्लास करना जरूरी है क्या, पास तो हो जाएंगे ना...?
  • संजीव : क्लास हम लोग मैनेज कर लेंगे। कहीं कोई दिक्कत नहीं है। पास हो जाइएगा। इस बार काउंसिल में पैरवी हो गई थी। सब पास हो गए। वैसे गारंटी नहीं देंगे। कभी सेटिंग हो जाती है, तो कभी नहीं भी होती है।
  • रिपोर्टर: फिर भी पैसा लग रहा है तो जानकारी लेना जरूरी है...?
  • संजीव : इस बार 5 हजार में सेटिंग हो गई थी। क्वेश्चन भी लीक हो गए थे। जहां सेंटर था, बच्चे सब वहीं फोटो कॉपी करा रहे थे, जिससे एग्जाम कैंसिल हो गया। बिना काउंसिल के मिले थोड़े ही पेपर लीक होता है।

कॉलेज-2: धनवंतरी कॉलेज चकला, ओरमांझी
पास कराने के लिए काउंसिल में प्रति पेपर 4 हजार रुपए लगते हैं, पास होने की गारंटी: संचालक अभय दुबे

धनवंतरी कॉलेज चकला, ओरमांझी के संचालक अभय दुबे।
धनवंतरी कॉलेज चकला, ओरमांझी के संचालक अभय दुबे।
  • रिपोर्टर: फार्मेसी में एडमिशन लेना है, क्या करना होगा?
  • संचालक : हमारे यहां फीस 2 लाख रुपए है, इसमें सब हो जाएगा। बहुत कॉलेज 1.80 लाख रुपए भी बोलेंगे, पर 3 लाख वसूल लेंगे।
  • रिपोर्टर: क्लास नहीं करेंगे, चलेगा?
  • संचालक : क्लास करना जरूरी नहीं है। काहे कि कोई डॉक्टर है, तो कोई डॉक्टर का बेटा है। कैसे आने को कह सकते हैं। अभी 25 स्टूडेंट क्लास करते हैं।
  • रिपोर्टर: 2021 बैच में हो जाएगा, पीतांबरा कॉलेज में तो ले रहा है?
  • संचालक : वहां तो एडमिशन पर ही रोक है। दिसंबर तक ही एडमिशन लेने का निर्देश था।
  • रिपोर्टर: पास तो हो जाएंगे ना?
  • संचालक : 20 नंबर के इंटरनल एग्जाम में हम 18-19 नंबर देते हैं। काउंसिल में प्रति पेपर 4 हजार लगते हैं। अगर दो पेपर खराब हुए, तो 8 हजार लगेंगे।

कॉलेज-3: पीतांबरा कॉलेज ऑफ फार्मेसी बूटी
नए सेशन में एडमिशन नहीं हो रहा, पिछले सत्र में लेकर अगले साल ही डिग्री दे देंगे: संचालक राहुल कुमार

पीतांबरा कॉलेज ऑफ फार्मेसी बूटी के संचालक राहुल कुमार।
पीतांबरा कॉलेज ऑफ फार्मेसी बूटी के संचालक राहुल कुमार।
  • रिपोर्टर: फार्मेसी में एडमिशन लेना था, अभी सीट मिल सकती है?
  • संचालक : देखिए, सेशन 2022-24 में एडमिशन अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन 2021-23 बैच में सीट अभी खाली है। एडमिशन हो जाएगा। पहले ईयर का एग्जाम जून में होगा। अगले साल अप्रैल में एग्जाम हो जाएगा और डिग्री मिल जाएगी। एडमिशन आज ही हो जाएगा।
  • रिपोर्टर: फिर पढ़ाई कैसे करेंगे, पास तो हो जाएंगे ना?
  • संचालक : हमारा रिजल्ट 99 प्रतिशत है। श्योर शॉट है कि आप निकाल लीजिएगा। कई डॉक्टर लोग भी डिग्री ले रहे हैं। पिछले साल सभी पास हो गए। सिर्फ चार पास नहीं हुए, क्योंकि उन्होंने परीक्षा ही नहीं दी।

कॉलेज-4. स्वर्ण रेखा कॉलेज ऑफ फार्मेसी

इंस्पेक्शन में बच्चे को क्लास और लैब में उपस्थित दिखा देंगे, कहीं दिक्कत नहीं है: संचालक मुकेश सिंह

स्वर्ण रेखा कॉलेज ऑफ फार्मेसी के संचालक मुकेश सिंह।
स्वर्ण रेखा कॉलेज ऑफ फार्मेसी के संचालक मुकेश सिंह।
  • रिपोर्टर: एडमिशन कराना था?
  • संचालक : हमारे यहां फार्मेसी (डी- फार्मा) की फीस 2 लाख रुपए है, जो पार्ट वाइज देना होगा।
  • रिपोर्टर: क्लास और प्रैक्टिकल करना जरूरी है क्या?
  • संचालक : हम क्लास करने के लिए फोर्स नहीं करेंगे। क्लास के अलावा लैब सहित अन्य एक्टिविटी में बच्चे को उपस्थित दिखा देंगे। PCB का हर साल निरीक्षण होता है, इसमें भी सभी निकल जाएंगे। कहीं कोई दिक्कत नहीं है।
  • रिपोर्टर: परीक्षा में तो पास करा दीजिएगा ना?
  • संचालक : इसकी गारंटी नहीं ले सकते। कारण है कि सब सिचुएशन पर निर्भर करता है। सेटिंग हो जाएगी, तब कोई दिक्कत नहीं होगी।
नोट : जैसा बातचीत में मंत्री ने बताया
नोट : जैसा बातचीत में मंत्री ने बताया

एक ही स्कूल में बना दिया पूरे राज्य का सेंटर

  • पिछले सत्र की फाइनल परीक्षा में पूरे राज्य के फार्मेसी कॉलेजों का सेंटर एक निजी स्कूल में बना दिया गया। रिजल्ट 95% हुआ।
  • कॉपी जांचने के लिए बीएचयू भेजने का प्रस्ताव दिया गया था, पर स्थानीय शिक्षकों ने कॉपी जांची। इसमें भी सेटिंग की गई।

जांच के बाद भी विभाग ने नहीं की कार्रवाई

  • बिना इंफ्रास्ट्रक्चर और पेपर पर चल रहे कॉलेजों की कई बार जांच कराई गई। गड़बड़ी मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
  • पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और वर्तमान मंत्री के कार्यकाल में हुई जांच में गड़बड़ी भी मिली, लेकिन यह फाइल बांधकर रख दी गई।