भास्कर ​​​​​​​एक्सक्लूसिव:सोहेया पहाड़ पर ग्रीन ट्रिब्यूनल की गाइडलाइन का पालन नहीं दमदमी में फर्जी रिपोर्ट के आधार पर रिहायशी इलाके में दे दिया गया खनन पट्टा

मेदिनीनगरएक महीने पहले
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हुसैनाबाद के सोहेया पहाड़ पर होता अवैध खनन। - Dainik Bhaskar
हुसैनाबाद के सोहेया पहाड़ पर होता अवैध खनन।

मेदिनीनगर-औरंगाबाद पथ पर छतरपुर प्रखंड से लेकर हरिहरगंज तक एनएच 98 के किनारे अनगिनत क्रशर लगे हुए हैं, जहां वैध से अधिक अवैध माइंस से पत्थर आते हैं। ईडी द्वारा पलामू के डीएमओ सह लातेहार के प्रभारी डीएमओ आनंद कुमार को सम्मन किए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि अवैध पत्थर कारोबार का तार राज्य सरकार व संबंधित विभाग से पूरी तरह जुड़ा हुआ है।

डीएमओ ईडी के समक्ष प्रस्तुत हुए या नहीं यह अबतक पता नहीं चल पाया है। इसी कड़ी में अगर हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र के सोहेया पहाड़ की बात करें तो यह स्पष्ट है कि पत्थर माफिया पर नियम कानून का कोई जोर नहीं है।

लाख शिकायत व विरोध के बाद भी सोहेया पहाड़ पर हो रहे अवैध उत्खनन को रोकने और दमदमी में खनन विभाग द्वारा अवैध ढंग से दिए गए पट्टे को रद्द करने की मांग को लेकर प्रभावित ग्रामीणों द्वारा सोहेया पहाड़ बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन किए जाने के बाद भी अवैध उत्खनन पर रोक लगाने में प्रशासन विफल रहा।

सोहेया पहाड़ पर उत्खनन के मामले में ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देश का भी पालन नहीं किया जा रहा है। संघर्ष मोर्चा के नेता ग्रीन ट्रिब्यूनल मे अपील दायर करने का मन बना लिया है। प्रभावित किसानों के अनुसार हुसैनाबाद अंचल के दमदमी मौजा में कुछ लोगों द्वारा गलत दस्तावेज के आधार पर एवं खनन पट्टा के मानकों के विपरीत फर्जी रिपोर्ट के आधार पर पत्थर उत्खनन का लीज करा लिया गया।

लीज की भूमि से 100 मीटर पर हैं कई घर, 250 मीटर पर स्कूल

लीज पर दी गई भूमि से 20 मीटर की दूरी पर मदरसा विद्यालय, एक सौ मीटर की दूरी पर 100 घर से अधिक घरों का मुहल्ला 250 मीटर के अंदर प्राथमिक विद्यालय, दमदमी, 0 से 20 मीटर की दूरी पर उपजाऊ खेती भूमि और 500 मीटर के अंदर हरही नदी(बुढ़वा बांध) एवं हरही सिंचाई योजना है।

पट्टे वाले इलाके के पास स्कूल है, इसे लीज देने के दाैरान किया अनदेखा
संबंधित अधिकारियों ने अपने जांच प्रतिवेदन में खनन पट्टे से नजदीक के स्कूल, मदरसा, नदी एवं बांध का उल्लेख ही नहीं किया और उच्चाधिकारियों को इस मामले में अंधेरे में रखकर लीज दे दिया। आंदोलन के क्रम में जब अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरना दिया गया तो वन विभाग के एक अधिकारी ने स्थल जांच की।

जांच के क्रम में अधिकारी ने ग्रामीणों को बताया कि खनन पट्टा गलत ढंग से दिया गया है। प्रभावित किसानों का कहना है कि पत्थर उत्खनन का कार्य लीज के नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा है।

ग्रामीणाें का आराेप...ग्रामसभा में बरगला कर कराया गया हस्ताक्षर

ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने सर्वे खतियान में खाता नंबर 16 प्लॉट नंबर 87, 88 एवं 89 में भूमि का किस्म जंगल पहाड़ और जंगल झाड़ी दर्ज है। नियमानुकूल लीज की गई भूमि से दो सौ पचास मीटर की दूरी पर वन भूमि होना चाहिए, जबकि पत्थर उत्खनन का कार्य वन भूमि से बिलकुल सटी हुई भूमि में कराया जा रहा है।

आमसभा के नाम पर ग्रामीणों को बरगला कर हस्ताक्षर करा लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि खनन विभाग द्वारा लीज पर दी गई भूमि का बिना सीमांकन कराए ही कई महीनों तक पत्थर का उत्खनन कराया गया।

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