प्रतिवर्ष हो रहा करोड़ों के राजस्व का नुकसान:वैध दिखा हो रहा अवैध खनन, 4 पहाड़ हुए गायब, अब 12 का वजूद खतरे में

मेदिनीनगरएक महीने पहलेलेखक: संजय तिवारी
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पलामू जिले की अवैध खनन मांइस - Dainik Bhaskar
पलामू जिले की अवैध खनन मांइस

अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर पलामू के पहाड़ों का वजूद पत्थरों के अवैध उत्खनन की वजह से खतरे में पड़ गया है। अब तक जिले से चार पहाड़ों का नामोनिशान मिट चुका है और एक दर्जन पहाड़ का अस्तित्व खतरे में है। जिला खनन विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस व माफिया के ग॔ठजोड़ से वैध मांइस की आड़ में अवैध मांइस में खनन किया जा रहा है।

इस कारोबार में वन विभाग की भूमिका संदिग्ध है। कारण यह कि सुरक्षित वन क्षेत्र से हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए विभाग कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाता। तथाकथित दबंग कहे जाने वाले पत्थर माफियाओं सारे नियम कानून को ठेंगा दिखाते हुए न केवल अवैध तरीके से पत्थर निकाल रहे हैं।

जिन्होंने वैध मांइस लीज भी लिया है वे भी अपने लीज क्षेत्र में खनन न कर दूसरी जगह से अवैध तरीके से पत्थर खनन कर वैध व अवैध क्रशर में बोल्डर की सप्लाई करते हैं। गौरतलब हो कि पलामू जिले में वर्तमान में वैध रुप से 50 पत्थर मांइस चल रहे हैं, लेकिन 100 ऐसे स्थान हैं, जहां से बिना रोकटोक पत्थर का उत्खनन किया जा रहा है। ऐसा होने से पर्यावरण को भी खासा नुकसान हो रहा है, जबकि इन अवैध उत्खननों की निगहबानी के लिए उत्तरदायी खान विभाग कानों में तेल डाले सोया पड़ा है।

अवैध पत्थर खदान संचालक किसी तरह की रॉयल्टी जमा नहीं करते हैं
जानकारी के अनुसार अवैध पत्थरों को बिना किसी चालान के झारखंड के विभिन्न शहरों के साथ-साथ बिहार, छत्तीसगढ़, यूपी आदि राज्यों में भी भेजा जा रहा है। पत्थर माफिया मालामाल हो रहे हैं। सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है।

वैध पत्थर खदान संचालकों पर सीटीओ में उल्लेखित मात्रा के अनुरूप निर्धारित सालाना रॉयल्टी जमा करने का दबाव होता है। दूसरी ओर अवैध पत्थर खदान संचालक को न कोई रॉयल्टी जमा करना होता है, न ही उन पर पाबंदी होती है।

खतरनाक...बेतरतीब तरीके से हो रहे खनन से पर्यावरण पर प्रतिकूल असर

छतरपुर प्रखंड के बचकोमा, मुरुमदाग, बरडीहा, चराई, खोड़ी, करमा, तेलाड़ी, मसिहानी, डाली, ओकराहा गांव ,पीपरा हरिहर गंज व नौडीहा बाजार प्रखंड क्षेत्र में भी दर्जनों मांइस अवैध रुप से चल रहे हैं। हुसैनाबाद के सोहेया पहाड व पांडू के धजवा पहाड़ में हो रहे अवैध उत्खनन का मामला एनजीटी तक पहुंचा है, लेकिन पत्थर माफिया उत्खनन करने से परहेज नहीं कर रहे हैं।

हेवी ब्लास्टिंग के जरिए अवैध तरीके से पहाड़ो को तोड़ा जा रहा है। इस अवैध धंधे में माफियाओं का एक सुसंगठित तंत्र काम करता है, जिसके तार दूसरे राज्यों तक फैले हुए हैं। ऐसे में बेतरतीब तरीके से की जा रही अवैध उत्खनन से पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

ब्लास्टिंग की वजह से आसपास के गांवों पर भी खतरा मंडरा रहा है। कई जगहों पर तो स्कूलों की दूरी ब्लास्ट साइट्स से चंद फासलों पर है, जिसकी वजह से पढ़ने वाले बच्चों पर भी जान का खतरा बना हुआ है।जिन पहाड़ों की कटाई हो रही है, वो आबादी से बिलकुल सटे हैं।

पुलिस -प्रशासन की मिलीभगत और खनन विभाग की अकर्मण्यता ने स्थिति को और भयानक बना दिया है, जिसकी वजह से पत्थर माफियाओं के हौसले काफी बुलंद हैं और वे बिना किसी वैध लीज के ही पहाड़ों को जमींदोज कर रहे हैं। वहीं इन पत्थरों को तोड़ने के काम में आनेवाले विस्फोटकों का अवैध कारोबार भी जोरशोर से जारी है। इस खेल में पत्थर माफिया के अलावा कुछ भ्रष्ट अफसर और नेता भी शामिल हैं।

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