धर्म आस्था:पुत्रों की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा व्रत, उपवास कीं, पूजा कर कथा सुनी

मेदिनीनगर12 दिन पहले
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पुत्र की दीर्घायु एवं मंगलकामना के लिए रविवार को माताओं ने निर्जला उपवास पर रही। जिस प्रकार पति की कुशलता के लिए निर्जला व्रत तीज में रखा जाता है, ठीक वैसे ही माताएं जीवित्पुत्रिका व्रत निर्जला उपवास रखकर करती हैं। व्रतियों ने जीमूतवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित किया। इसके साथ ही मिट्टी व गाय के गोबर से चील एवं सियारनी की प्रतिमा बनायी व माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया। पूजन समाप्त होने के बाद पुरोहितों से व्रतियों ने जीमूतवाहन राजा की कथा सुनी। बंसत पंडित ने बताया कि अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जीवित्पुत्रिका व्रत मनाया जाता है।

इस दिन माताएं संतान की लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं । इसे जीउतीया या जीतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है । तीन दिनों तक चलने वाले इस व्रत में सप्तमी के दिन नहाय-खाय, अष्टमी को व्रत व नवमी को पारण किया जाता है । उन्होंने कहा कि जो माताएं सच्चे मन से इस व्रत को रखकर विधिवत पूजन करती हैं उनकी संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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