डीसी से दो दिन में रिपोर्ट मांगी:मुरुमातू में महादलित परिवार जिस भूखंड पर रहते थे वह जमींदार बाबू तारकनाथ की थी

पांडू3 महीने पहलेलेखक: नरेंद्र सिंह/राजकुमार
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पांडू प्रखंड के कजरुकला पंचायत के अल्पसंख्यक बहुल मुरुमातू के जिस भूखंड से महादलित परिवार बेदखल किए गए हैं, इस मामले पर राज्यपाल ने संज्ञान लेते हुए डीसी से दो दिन में रिपोर्ट मांगी है। वहीं हाईकोर्ट रांची ने भी इस मामले को स्वत; संज्ञान लिया है। तीन दिन से यह मामला चल रहा है, लेकिन जब बुधवार को पलामू उपायुक्त ने एसडीओ व सीओ से जमीन से उसकी किस्म की जानकारी मांगी तो वे लोग बताने में असमर्थता जाहिर की।

इसके बाद दैनिक भास्कर ने पड़ताल का जिम्मा लिया। जो बाते सामने आई वह पूरी तरह चौंकाने वाली है। महादलित परिवार जहां 179 वर्ष से रह रहा है वह जमीन बाबू तारकनाथ सरकार की जमींदारी पीरियड की थी। हालांकि कागजात में मालिक गैरमजरूआ अंकित है।

अल्पसंख्यक समुदाय का दावा- मदरसे के लिए दान में मिली थी 25 डिसमिल जमीन

साथ ही कहा कि खतियान में पूरे भूखंड जिसका खाता 44 प्लाट 437 जिसका रकबा चार एकड़ 07 डिसमिल है। पूर्व में यह जमीन हल्का 12 में थी ,जो नया सर्वे खतियान में 01 में है। यह जमीन मालिक गैर-मजरुआ टोंगरी के रूप में वर्णित है।। इस संबंध में पांडू के सीआई का प्रभार संभाले ,राजस्व उपनिरीक्षक प्रमोद सिंह ने बताया कि खतियान अंचल में नहीं मिलने के कारण वस्तुस्थिति स्पष्ट नहीं है। जमीन की किस्म पता नहीं चल पा रही है। मुस्लिम समुदाय के लोगों का दावा है कि जमीन 09 मार्च 1943 में डोमन मियां ने बाबू तारकनाथ सरकार से ली थी। उसी परिवार के सदस्य शेख रसूल बताते हैं कि डोमन मियां के तीन लड़के थे।

कासिम मियां, नबी हसन और कमरुद्दीन। कासिम मियां ने 6 मई 1987 को 25 डिसमिल जमीन मदरसा मंजरे इस्लाम के नाम दान किया है। उनके अनुसार मुसहर परिवार के लोग उसी मदरसे की जमीन पर रहते थे। जिसके वे लोग पूर्व से विरोध करते आ रहे हैं। हालांकि इसका दस्तावेज भी मुस्लिम समाज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सका है। रबरी गांव के निवासी और जमीन के अच्छे जानकार धर्मदेव सिंह यादव ने मुसहर परिवार के बसे जमीन को सरकारी गैरमजरूआ होने का दावा किया। उन्होंने 40 साल पूर्व हुए सर्वे में इन्हें हक पर्चा मिलने का दावा किया।

चंद्रवंशी ने कहा- कठोर कार्रवाई हो
"मानवता को कलंकित करनेवाली घटना के दोषियों पर कठोर कदम उठाएं। अन्यथा हम चुप नहीं बैठेंगे। उजाड़े गए लोगों को उसी जगह पर बसाएं।"
-रामचंद्र चंद्रवंशी, पूर्व मंत्री।

सांसद ने कहा- दिलितों से अत्याचार
"महादलित परिवार पर अत्याचार की घटना मानवता पर कलंक है, लोगों का पुन: पुनर्वास होगा, गरीब लोगाें को हर सहायता दी जाएंगी।"
-विष्णुदयाल राम, पलामू सांसद।

राधा कृष्ण ने कहा- प्रशासन विफल
"स्थानीय प्रशासन की विफलता है। यहां के सीओ को लंबे समय से रह रहे मुसहर परिवारों के स्थाई निवास के लिए इन्हें जमीन का कागजात दे देना चाहिए था।"
-राधा कृष्ण किशोर, पूर्व मंत्री।