टीडीएस वाले पानी से हडि्डयां हो रहीं कमजोर:आरओ वाटर के अधिक प्रयाेग से शरीर में पोषक तत्वों की कमी, बढ़ रहे हैं मरीज

देवघरियाएक महीने पहले
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ऑटों के माध्यम से घरों में सप्लाई किया जा रहा जार का पानी। - Dainik Bhaskar
ऑटों के माध्यम से घरों में सप्लाई किया जा रहा जार का पानी।

गर्मी को लेकर इन दिनों बाजार में बोतल बंद पानी और वाटर प्यूरीफायर प्लांट के माध्यम से घरों में सप्लाई किये जा रहे जार की मांग बढ़ गई है। स्वाद के चक्कर में लोग आरओ के पानी का अधिक इस्तेमाल कर शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए जरूरत के अनुसार मिनरल्स व पोषक तत्वों को खोते जा रहे हैं।

जिसके कारण कम और अधिक टीडीएस वाले पानी के इस्तेमाल से अधिकाशंत: लोगों की हड्डियों तो कमजोर हो ही रही हैं। साथ ही लोग किडनी, हर्ट व ब्लड प्रेशर की बीमारी से ग्रसित होते जा रहे हैं। वहीं आजकल ज्यादातर घरों में लोग स्वाद के चक्कर में स्वच्छ पानी के लिए वाटर प्यूरीफायर आरओ मशीन का उपयोग करते हैं।

जिसका टीडीएस सौ से भी कम होने के कारण मीठा लगने से लोग ज्यादातर इसे ही पसंद करते हैं। लेकिन यह पानी मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। पानी का ज्यादा और कम टीडीएस भी शरीर में मिनरल्स व पोषक तत्वों की कमी होती है।

वहीं शारीरिक तौर पर भी पानी का असंतुलन सेहत की गंभीर समस्या बनकर सामने आ रही है। जिससे लोग तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। पानी की शुद्धता की एक निश्चित सीमा है। उस सीमा से अधिक शुद्ध पानी या अशुद्ध पानी मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्लूएचओ ) और ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड ने आरओ या दूसरी तकनीक से साफ़ किये गये पानी के लिए मानक निर्धारित किया है। पानी की शुद्धता को टोटल डिसोल्वड सोलिड्स ( टीडीएस ) में मापा जाता है।

ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड के अनुसार पानी का टीडीएस 150-250 मिलीग्राम से कम है। तो पीने योग्य माना जाता है। जिससे पानी में मौजूद मिनरल्स मनुष्य के शरीर में पहुंच पाते हैं। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति लीटर पानी में टीडीएस की मात्रा 300 मिलीग्राम से कम होनी चाहिए। टीडीएस में कैलश्यिम, मैगनेशियम, पोटेशियम, सोडियम बाईकार्बोनेट, क्लोराईड, सल्फेट के साथ कुछ मात्रा में कार्बनिक तत्व होते हैं।

100-150 टीडीएस तक पानी मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता राजेश रंजन ने भी कहा स्वाद के चक्कर में लोग अपने घरों में लगाये गये आरओ के पानी का टीडीएस कम कर देते हैं। जिससे पानी में मौजूद मिनरल्स मनुष्य के शरीर में नहीं पहुंचते हैं।

जिसका प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि 100-150 टीडीएस तक का पानी मनुष्य के लिए उपयोगी है। कुछ स्थानों के पेयजल में मिनरल्स की मात्रा अधिक होने के कारण लोग आरओ का टीडीएस 250 तक कर सकते हैं।

इससे ज्यादा टीडीएस का पानी शुद्ध नहीं माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कम टीडीएस 60-70 का पानी लोग अपने आरओ व प्यूरीफायर में स्वाद के चक्कर में सेट करा लेते हैं। लेकिन कम टीडीएस का पानी भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

ब्लड प्रेशर, लीवर और किडनी की बीमारियां बढ़ रहीे हैं: डॉ.

डॉ अवधेश कुमार सिन्हा ने कहा कि कम और अधिक टीडीएस वाले पानी के उपयोग मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। स्वाद के चक्कर में लोगों के शरीर में मिनरल्स व पोषक तत्वों की कमी होती जा रही है।

जिससे हडिडयों के कमजोर होने के साथ-साथ लोग ब्लड प्रेसर, लीवर, किडनी और हर्ट सहित कई घातक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इससे बचने के लिए हमें पानी को गर्म करने के बाद ठंडा कर पीने की आदत डालनी चाहिए।

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