फंडिंग से जुड़े लोगों पर कार्रवाई:टेंडर फंडिंग की जांच करने पहुंची एनआईए, कई लोगों के घरों में छापेमारी, मिले अहम दस्तावेज

पिपरवारएक महीने पहले
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चतरा जिला के पिपरवार थाना अंतर्गत ग्राम बेंती एवं बिलारी में एनआईए द्वारा टेरर फंडिंग से जुड़े लोगों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।

पुलिस द्वारा 10 लाख का इनामी टीपीसी के जोनल कमांडर एवं हार्डकोर नक्सली भीखन गंझू की रांची में गिरफ्तारी के बाद एके 47 खरीद मामला एवं उसको फंडिंग करने वाले नेटवर्क के खुलासे के लिए एनआईए द्वारा उसे रिमांड पर लेकर लंबी पूछताछ हुई थी।

चतरा पुलिस द्वारा भी भीखन गंझू को तीन दिन का रिमांड मिला था। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि कोल डंप संचालन समिति के नाम पर कोयला व्यवसायियों से अवैध रूप से वसूली कर उग्रवादी संगठनों तक पैसा पहुंचाने वाले नेटवर्क पर एनआईए कार्रवाई कर सकती है।

इसी कड़ी में एनआईए की टीम सुबह पांच बजे से ही क्षेत्र में पहुंच कर कोल डंप से जुड़े दर्जनों लोगों के घरों पर एनआईए द्वारा ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है। एनआईए की कार्रवाई से क्षेत्र में इससे संबंधित लोगों में हड़कंप मच गया है।

अपनी कार्रवाई के क्रम में एनआईए द्वारा कुछ लोगों को हिरासत में लेने के साथ ही कई घरों से कुछ अहम दस्तावेज बरामद होने की सूचना है। छापेमारी में एनआईए के हाथ कुछ नकदी और हथियार बरामद होने की सूचना भी है। गौरतलब है कि क्षेत्र में विस्थापन के नाम पर कोल डंप संचालन समिति बनाकर कोल व्यवसायियों से अवैध वसूली होती है।

जिसका बड़ा हिस्सा उग्रवादियों तक पहुंचाया जाता है। जिसका इस्तेमाल उग्रवादी संगठन हथियार और बेनामी संपत्ति खरीदने में करते हैं। गौरतलब है कि इससे पूर्व सितंबर 2019 में चतरा पुलिस द्वारा टीपीसी के लिए टेरर फंडिंग करने वाले लोगों के खिलाफ एसआईटी बनाकर कार्रवाई की गई थी। जिसमें कुल 77 लोगों सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।

जिसके बाद कुछ महीनों तक कोल डंप का काम बंद हो गया था। इस मामले में पुलिस ने उस समय कई नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एनआईए की कार्रवाई में चतरा पुलिस अधीक्षक के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन भी मौजूद था।

कोल डंप के माध्यम से ऐसे होती है अवैध वसूली
सीसीएल द्वारा उत्पादित कोयले की आनॅलाइन नीलामी के बाद इसे दो तरह से बाहर भेजा जाता है, एक वह है जो बड़ी-बड़ी कंपनियों एवं बिजली परियोजनाओं में जो कोयला जाता है, उसे हाइवा के माध्यम से नजदीकी रैक पाइंट पर गिरा कर रेलवे के माध्यम से भेजा जाता है।

वहीं दूसरी ओर सीसीएल द्वारा छोटे एवं मध्यम कोयला व्यवसायियों को ई-आॅक्शन के द्वारा जो कोयला बेचा जाता है और उसके उठाव के लिए संबधित कोल डंप के लिए डीओ जारी किया जाता है।

वह कोयला ट्रक के माध्यम से बाहर भेजा जाता है और असली खेल यहीं से शुरु होता है। हर डंप के पास टीपीसी के संरक्षण मे विस्थापितों के कल्याण के नाम पर संचालन समिति बनाकर डीओ होल्डरों से प्रति टन करीब 225 से 300 रुपया एवं ट्रक मालिकों से टोकन के नाम पर 300 से 500 रुपया प्रति ट्रक की अवैध वसूली की जाती है।

उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में मगध, आम्रपाली, पिपरवार एवं एनके एरिया के सभी कोल डंपो को मिला लिया जाए तो हर महीने चार से छह लाख टन कोयला रोड सेल के माध्यम से बाहर भेजा जाता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने की अवैध उगाही का धंधा चलता है।

ऐसा नहीं है कि डंप कमेटी इन पैसों को सिर्फ टीपीसी या अन्य संगठनों को ही पहुंचाती है, इस पैसों में कुछ सीसीएल अधिकारी और सफेदपोश लोगों के यहां भी पैसा पहुंचाने की बाते पूर्व में सामने आ चुकी है। जिसमे कई सीसीएल अधिकारी अभी भी एनआईए की जांच का सामना कर रहे हैं।

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