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मौसम में बदलाव:बादलों के कारण इस बार उत्तरायण से दक्षिणायन होता सूर्य नहीं दिखा

बड़कागांवएक महीने पहले
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  • हर वर्ष 22-23 सितंबर और 20 या 21 मार्च को दो पत्थरों के बीच सूर्य के करवट बदलने का दृश्य देखा जाता है

बरवाडीह भोक्ता स्थान के समीप मेगालिथ स्थल में 23 सितंबर को दो पत्थरों के बीच से खराब मौसम व बादल के कारण सूर्य का लोग करवट बदलने का खूबसूरत दृश्य नहीं देख पाए। उक्त मेगालिथ स्थल से 22 या 23 सितंबर को ऑटम इक्विनोक्स एवं 20 या 21 मार्च को वर्नल इक्विनोक्स का नजारा देखा जाता है। इसकी खोज लगभग 2000 ईस्वी में मेगालिथ शोधकर्ता शुभाशीष दास ने की थी। उन्होंने उक्त आशय की जानकारी देते कहा कि जब तक कोरोना का असर है तब तक लोग भीड़ लगाकर मेगालिथ स्थल पर नहीं जाए इसका अवलोकन नहीं करें यह खतरे से खाली नहीं है।

आगे कहा सरकार के द्वारा को इसे संरक्षित करने एवं पर्यटन स्थल बनाने के लिए सरकार को इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। यह हमारे देश का बहुत ही बड़ा धरोहर है। मेगालिथ स्थल से इक्विनोक्स का दृश्य देखने का प्राचीन परंपरा आज भी जीवित है। भारत देश के झारखंड में मात्र बड़कागांव बरवाडीह इकलौते मेगालिथ स्थल की खोज है। लगभग 20 साल पूर्व खोज की थी। मेगालिथ स्थल पर इक्विनोक्स का नजारा देखने पहुंचे बाल विद्या आश्रम के प्रधानाध्यापक रंजीत प्रसाद ने कहा कि बादल होने के कारण इक्विनोक्स का नजारा हम देख नहीं पाए कई बार यहां पर देश-विदेश बाहर से शोधकर्ता आते रहते हैं। मैदान में शराबियों के द्वारा शराब पीकर शराब की बोतल फेंक दी जाती है सरकार को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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