लिखित समझौता:दुर्घटना के एक दशक बीतने के बाद भी नहीं मिला मुआवजा

भवनाथपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

अरसली उतरी टोला महुरंव निवासी 34 वर्षिय दिव्यांग वीरेंद्र साह को दुर्घटना के एक दशक बीतने के बावजूद भी मुआवजा नहीं मिला। वर्ष 2010 के अगस्त माह में बीरेंद्र गांव के ही कुछ बिजली मजदूरों के कहने पर अारबीसीएल के संवेदक ओमनारायण सिंह के ठेका कार्य मे 8 अगस्त को बिजली पोल पर कार्य करने के दौरान अचानक करंट लगने से गम्भीर रूप से घायल हो गया। जिसका इलाज के क्रम में डॉ ने बीरेंद्र के दोनों हंथेली को काट दिया। घटना के बाद संवेदक के द्वारा ग्रामीणों के पहल पर मुवाबजा नही मिलती दो हजार रु परिवारिक खर्च देने का लिखित समझौता हुआ था।

कुछ माह के बाद संवेदक द्वारा पैसा समय पर नही मिलने पर बीरेंद्र ने कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया। जिसके कारण उक्त दो हजार रु से भी वंचित होना पड़ा। पूछे जाने पर ओम नारायण सिंह ने बताया कि मैं मुवावजा दे रहा था, लेकिन कोर्ट में मामला जाने के बाद रोक दिया। न्यायालय का जो आदेश होगा उसे सम्मान करूंगा।

खबरें और भी हैं...