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दम तोड़ती योजना:ये कब्रगाह के नहीं, चतरा में मेढ़बंदी योजना के अनुपयोगी गड्‌ढे हैं

चतरा2 महीने पहलेलेखक: जफर परवेज
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  • 2020-21 में चतरा में टीसीबी की 15300 योजनाएं ली गई थी इसमें मात्र 4077 योजनाएं ही पूरी

ये किसी कब्रगाह की तस्वीर नहीं है। यह झारखंड सरकार की टीसीबी (ट्रेंच कम बंड) योजना का एक दृश्य है। यह दृश्य इस योजना के दम तोड़ देने की कहानी कहती है। यह तस्वीर चतरा सदर प्रखंड के ब्रह्मणा पंचायत के अंबाडीह गांव के नागेश्वर यादव के खेत की है। उल्लेखनीय है कि राज्य में जल संचयन के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में टीसीबी योजना शुरू की गई थी।

इसका उद्देश्य खेत या टांड के किनारे-किनारे ट्रेंच खोदकर मेढ़ों को मजबूत कर इसमें वर्षा का पानी रोकना था। ताकि सूखे की स्थिति में भी किसान खेती कर सकें। इसे मेढ़बंदी योजना भी कहा जाता है। इस योजना का मकसद मजदूरों को काम देने के साथ जलस्तर को भी मेंटेन रखना था। लेकिन सच ये है कि इस योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ।

यह योजना स्थल पर ठीक तरह से कार्यान्वित भी नहीं हो पा रही है। कई जगह इसकी खुदाई बेतरतीब तरीके से की जा रही है और इसमें मापदंड के अनुसार गहराई भी नहीं की जा रही है। तीन फीट की जगह सवा दो या ढाई फीट ही खुदाई की जाती है। इसी तरह इसकी चौड़ाई भी तीन फिट से कम ही खिड़ी जाती है।

इसके कारण पहली ही बरसात में यह भर भी जा रही है। एक टीसीबी तीन फीट चौड़ी, तीन फीट गहरी और 12 फीट लंबी होती है। जिले में वित्तीय वर्ष 2020-21 में टीसीबी (ट्रेंच कम बंड ) की कुल 15300 योजनाएं ली गई थी। इसमें से 4077 योजनाएं पूर्ण कर ली गई है। इसमें करीब 10 करोड़ 17 लाख रुपए खर्च किए गए हैं।

योजना स्थल का ठीक से चयन भी नहीं : अम्बाडीह के करण यादव के खेत में वर्षा का पानी रुकता ही नहीं है। जिस खेत में टीसीबी की खोदाई की गई है, वह उंचाई से ढलान की ओर है। सरेद के उदेश यादव के खेत काफी छोटा है। खेत की मेढ़बंदी पहले से की हुई है। फिर भी यहां टीसीबी की खोदाई कर दी गई। प्रभु भुइयां का खेत में कब्रगाह की तरह टीसीबी की खोदाई की गई है। यह खेत नीचा है। टीसीबी का निर्माण भी नहीं होता, तो वर्षा का पानी जमा होता है।

डीडीसी सुनील कुमार सिंह : यह योजना समतल और ढालू दोनों तरह की भूमि के लिए है। किसानों के लिए उपयोगी है। यह योजना ठेकेदारी के लिए नहीं है।

प्रगतिशील किसान विनोद : यह योजना किसी काम की नहीं है। इससे पानी नहीं रुकता है। इससे सिर्फ खेत की बर्बादी है।

प्रखंडवार योजना की स्थिति
प्रखंड लक्ष्य पूर्ण योजना
चतरा 1600 965
गिद्धौर 600 83
हंटरगंज 2800 401
ईटखोरी 1200 79
कान्हाचट्टी 1000 787
कुंदा 500 155
लावालौंग 800 213
मयूरहंड 1000 102
पत्थलगड़ा 500 591
प्रतापपुर 1800 170
सिमरिया 1700 145
टंडवा 1800 182

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