निर्माण / झारखंड और बिहार के बीच सोन नदी पर श्रीनगर से पडुका तक बनेगा पुल : सांसद

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दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

गढ़वा. पलामू के सांसद विष्णुदयाल राम ने कहा कि वर्ष 2017 से झारखंड और बिहार राज्य के बीच बहने वाली सोन नदी पर श्रीनगर(झारखंड) और पडुका(बिहार) के बीच पुल निर्माण की मांग मेरे द्वारा हरेक स्तर पर निरंतर उठाई गई है। इस संबंध में मैंने अनेकों बार शून्य काल एवं नियम 377 के अंतर्गत लोकसभा में इस विषय वस्तु को उठाया है। वहीं इस मामले में संबंधित पदाधिकारियों को पत्र लिखने का भी काम किया हूं। इतना ही नहीं व्यक्तिगत तौर पर भी अधिकारियों से मुलाकात कर पुल निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया गया है। सांसद ने कहा कि यहां तक इस संबंध में व्यक्तिगत तौर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर वस्तु स्थिति से अवगत कराया है एवं पत्र भी लिखा है। सांसद ने कहा कि इस संबंध में मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा था।

गत वर्ष पुल निर्माण संबंधी प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी। डीपीआर स्वीकृत होने के बाद सॉयल टेस्टिंग का कार्य प्रारंभ हुआ था तथा ब्रिज निर्माण के लिए 1900 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृति हुई थी और इसे केन्द्रीय सरकार के आगामी प्रस्ताव में रखा गया था।  500 करोड़ रुपए की राशि जनवरी 2019 में रिलीज भी की गयी थी। परंतु एकाएक उक्त राशि जो सोन नदी पर पुल निर्माण के लिए रिलीज की गई राशि को बिहार राज्य के बिक्रमशिला भागलपुर में बनने वाले पुल के लिए डाइवर्ट कर दी गयी थी।

इसको लेकर कांडी प्रखंड एवं हरिहरपुर प्रखंड के लोगों के बीच घोर असंतोष फैल गया था। इस प्रोजेक्ट के ठंडे बस्ते में पड़ जाने के बाद पुनः उसे पुनर्जीवित करने का प्रयास प्रारंभ किया गया और पुनः नए सिरे से इसे बनाने का अनुरोध किया गया। पुनः लोकसभा के नियम 377 के माध्यम से इसे उठाया गया। मंत्री से मुलाकात की गई। आज राज्यमंत्री विजय कुमार सिंह का अर्द्ध सरकारी पत्र मेरे द्वारा नियम 377 के अंतर्गत लोकसभा में उठाये गये मामले का हवाला देते हुए यह सूचना दी है कि उपरोक्त प्रोजेक्ट को इंटर स्टेट कनेक्टिविटी के अंतर्गत सीआरआईएफ से प्राथमिक्ता के आधार पर बनाने की सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है। अब इस संबंध में झारखंड एवं बिहार सरकार की सहमति पत्र केन्द्र सरकार को प्राप्त हो गया है और पुल निर्माण के संबंध में 345 करोड़ का डीपीआर स्टिमेट के साथ भेजा गया है जिसका संचिका में विचार किया जा रहा है। एक बार डीपीआर व प्राक्कलन स्वीकृत हो जाएगा तब निर्माण कार्य की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। परंतु इसमें कम से कम दो महीने का समय पदाधिकारियों के अनुसार जरूर लगेगा। यह प्रोजेक्ट पुनर्जीवित हो गया है।

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