भैया दूज:भाई-बहन के प्रेम का पर्व भैया दूज हर्षोल्लास के साथ मना

गढ़वा25 दिन पहले
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जिला मुख्यालय सहित भाई बहन के प्रेम का प्रतीक भैया दूज का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने गोबर से यम - यमीन का प्रतिरूप बनाकर भक्ति भाव से पूजा अर्चना की। पूजा के बाद अकाल मृत्यु से निजात दिलाने के लिए यम - यमीन को डंडे से कुटा। गोबर से निर्मित यमदेव के साथ-साथ चना, कसेलीको कूटने के बाद बहनों ने भाई को गोधन का प्रसाद खिलाया। साथ ही उनकी रक्षा की कामना की। इस संबंध में बहनों ने कहा कि भाइयों की रक्षा एवं उनकी समृद्धि के लिए बहाने यह व्रत रखती हैं।

मान्यता के अनुसार भाइयों को शाप देने के बाद उनकी रक्षा की कामना से अकाल मौत नहीं होती है।आरती कुमारी ने कहा कि यम- यमीन पूजा के बाद बहने अपने भाइयों को शाप देती है। इसके बाद भाइयों की संख्या के अनुसार रंगेली के कांटे गड़ाते हुए कहती हैं कि जिस जिस मुख से भैया को शाप दी। उस मुख को कांटा गड़े। अनीमा कुमारी, बबीता, सुनीता, आकृति, रानी, अनीता आदि ने कहा कि मुख्य रूप से भाइयों की रक्षा के लिए इस व्रत को किया जाता है। उन्होंने कहा कि पुरातन काल से चली आ रही मान्यता के मुताबिक भैया दूज का त्यौहार भाई बहनों के अटूट प्रेम का व्रत है। इस दिन बहने अपने भाई के लिए पकवान भी बनाती हैं।

नगर परिषद अध्यक्ष पिंकी केशरी ने कहा कि भैया दूज के दिन सभी महिलाएं अपने भाई के हर परिस्थिति में चाहे वह आर्थिक मानसिक, शारीरिक व सामाजिक हो किसी भी परिस्थिति में अपने भाई के अच्छे रहने का कामना करती हैं । उन्होंने कहा कि देहाती भाषा में कहावत है कि भाई के जितने भी दुश्मन होते हैं आज उनको इस पर्व के माध्यम से उसमें कुटती है। हर बहन अपने अपने भाई को मिठाई, बजरी खिलाकर आरती उतारती है। पूजा करते वक्त भगवान गोवर्धन का बीता हुआ कल के बारे में कथा कहानी सब एक दूसरे के द्वारा कहती है।

मझिआंव दीपावली के 2 दिन बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीय को मनाई जाने वाली भाई दूज का त्यौहार मझिआंव नगर पंचायत सहित मझिआंव एवं बरडीहा प्रखंड क्षेत्र के तमाम हिंदू बहुल इलाकों में हिंदू धर्मावलंबियों के द्वारा धूमधाम व शांतिपूर्ण मनाई गई।इस दौरान बहनों ने अपनी भाई की लंबी उम्र की कामना करते हुए यम की कुटाई भी की। इस पर्व को यम दुतिया भी कहा जाता है। भाई दूज का पर्व भाई-बहन का पवित्र स्नेह बंधन का त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं।

इस पर्व के बारे में मान्यता है कि भाई दूज के दिन जो भाई बहन के घर जाकर मीठा भोजन करता है, तो उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस दिन बहने सुबह स्नान कर करने के बाद अपने इष्ट देव भगवान विष्णु या गणेश की पूजा कर भाई के हाथों में सिंदूर एवं चावल का लेप लगाने के बाद उस पर 5 पान पत्ता वह सुपारी एवं चांदी का सिक्का डालकर कलाई पर बांध कर उनकी लंबी उम्र की कामना करती है।

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