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  • Establishment Of Kalash And Worship Of Maa Shailputri On The First Day Of Navratri, Idols Of Maa Durga Have Been Installed At 52 Places In Garhwa, Devotees Drenched In Devotion To Power

कलश स्थापित:नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा, गढ़वा में 52 जगहों पर स्थापित की गई हैं मां दुर्गा की प्रतिमा, शक्ति की भक्ति में सराबोर दिखे श्रद्धालु

गढ़वा19 दिन पहले
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कलश स्थापना के दौरान पूजा पर बैठे श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
कलश स्थापना के दौरान पूजा पर बैठे श्रद्धालु।

या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नम: के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रविवार को शारदीय नवरात्र का नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू हो गया। पहले दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं ने माता के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की आराधना व पूजा-अर्चना की। लोगों ने घरों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापित कर जगतजननी मां दुर्गा का आह्वान किया।

विभिन्न पूजा पंडालों में कलश स्थापित कर नवरात्र पाठ का आयोजन किया गया है। नवरात्र प्रारंभ होते ही पूरा इलाका भक्तिमय हो गया है। शहर में संगत मोहल्ला स्थित जय भवानी संघ, चिनिया रोड नहर चौक मां भगवती पूजा समिति नहर चौक, जय मां दुर्गा पूजा समिति बाजार समिति, चौधराना बाजार, लोहा पट्टी, सूत्री पट्टी, खादी बाजार, सब्जी बाजार, भारत संघ टंडवा चौक, जय माता दी संघ सोनपुरवा, नारायणपुर, तेनार, नवादा मोड़, शिव शक्ति संघ नगवा मुहल्ला, जय गोरिया संघ पुरानचंद चौक सहित 52 जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है।

शहर के ऐतिहासिक मां गढ़देवी मंदिर के पुजारी राजन पांडेय ने कहा कि नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का विधान है। मां शैलपुत्री का संस्कृत में अर्थ होता है पर्वत की बेटी। वे नंदी बैल की सवारी करती हैं। माता सभी की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली है।

कम तीव्रता के लाउडस्पीकर बजाने वाले पूजा पंडाल होंगे पुरस्कृत

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी संजय कुमार ने शहर की दुर्गा पूजा समितियों से आह्वान किया है कि वे एक स्वस्थ मनुष्य के लिए निर्धारित डेसिबल क्षमता से अधिक तीव्रता वाले लॉउडस्पीकर्स/डीजे आदि का प्रयोग करने से बचें। पूजा समितियों के साथ हुई बैठक के दौरान यह तय हुआ है कि पूजा पंडालों के बीच स्वच्छता के मानक के अलावा इस बार कोविड गाइडलाइन अनुपालन तथा ध्वनि तीव्रता मानक को भी पुरस्कार की श्रेणी के रूप में रखा जाएगा। तीनों कोटियों में तीन सर्वश्रेष्ठ पूजा पंडालों को सार्वजनिक तौर से पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

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