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ईद-उल-अजहा:गाइडलाइन का पालन कर अधिकांश लोगों ने घर में पढ़ी नमाज, दी गई बकरे की कुर्बानी

गढ़वा7 दिन पहलेलेखक: मो. एनाम खान
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मस्जिद में ईद-उल-अजहा की नमाज अदा करने पहुंचे अकीदतमंद - Dainik Bhaskar
मस्जिद में ईद-उल-अजहा की नमाज अदा करने पहुंचे अकीदतमंद
  • सादगी से मनी बकरीद, लोगों ने परिवार के साथ बांटी खुशी

स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के बीच कुर्बानी के प्रतीक ईद-उल-अजहा का त्योहार जिले में सादगी के साथ मनाई गई। कहीं चहल-पहल व भीड़-भाड़ तो नहीं दिखी। लेकिन लोगों के अंदर खुशियां दिखीं। लोगों ने घरों में ही ईद की नमाज अदा की। नमाज अदा करने के बाद लोगों ने खुदा की राह में जानवरों की कुर्बानी दी।

यह कुर्बानी का सिलसिला तीन दिन तक जारी रहेगा। ईद-उल-अजहा के मौके पर लोगों ने अपने परिवार संग ईद की खुशियां बांटी। इसके अलावे सेवाई व अन्य तरह के पकवान का लुत्फ उठाया। ईद-उल-अजहा के दिन मोबाइल फोन व सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों ने एक दूसरे को ईद की बधाई दी। लोगों ने सामूहिक रूप से ईदगाह, मस्जिद व मदरसे में ईद की नमाज पढ़ने से परहेज किया।

वहीं सरकार के गाइडलाइन के अनुसार पांच-पांच लोगों ने ईदगाह व मस्जिद में नमाज-ए-ईद अदा की। इस दौरान शहर के उंचरी रोड स्थित गढ़वा ईदगाह में मौलाना हेलाल अहमद मिसबाही, शहर के रांकी मोहल्ला स्थित जामा मस्जिद में पेश इमाम हाफिज अब्दुस्समद, उंचरी मस्जिद में मौलाना नईमुद्दीन रिजवी, मदरसा तब्लीगुल इस्लाम स्थित तैबा मस्जिद में मुफ़्ती मोजाहिद हुसैन, टँडवा मस्जिद में मौलाना शहजाद आलम मिसबाही ने नमाज-ए-ईद अदा कराई। स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के कारण इस बार ईद-उल-अजहा की रौनक नहीं दिखी। वहीं उत्साह फीका रहा।

टूटी गले मिल ईद की बधाई देने की परंपरा: कोरोना महामारी को लेकर जारी स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह ने पूरी जीवन शैली व परंपरा बदल दी है। सदियों पुरानी परंपरा भी टूट गई। ईद पर गले मिलकर बधाई देने की बहुत पुरानी परंपरा टूट गई। शारीरिक दूरी के नियमों के पालन की वजह से लोगों एक दूसरे के गले नहीं मिले। ईद-उल-अजहा जैसे त्योहार पर परिवार व अपनों के बीच रहकर लगभग एक-दूसरे से दूर रहना सबको खला। सबने कोरोना के खत्म होने की दुआ की।

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