उम्मीद:कोरोना काल में निराशा के बीच जग रही उम्मीद, बारिश रही लोगों की मददगार

गढ़वाएक वर्ष पहले
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  • इस बार बंपर धान होने की उम्मीद, बोले किसान सब कुछ समय पर हो तो दिखेगा सकारात्मक असर, अर्थव्यवस्था में बढ़ोत्तरी की जगी है उम्मीद

कोरोना काल के बीच नवरात्र शुरू हो गया है। लोगों में उत्साह है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में रौनक कम है। इसकी वजह यह है कि इस बार नियम, कायदे, कानून के साथ पर्व मनाने की इजाजत लोगों को मिली है। इन सबके बीच गढ़वा के लिए एक अच्छी खबर यह है कि इस बार कई वर्षों के बाद खेती अच्छी हुई है। बंपर पैदावार होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। ऐसे में ना सिर्फ खेतों में हरियाली का असर दिख रहा है। बल्कि उसका असर बाजारों पर भी है। क्योंकि गढ़वा का बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ही टिका हुआ है। इसलिए ऐसा देखा गया है कि जिस साल खेतीबारी अच्छी होती है। उस साल पर्व- त्योहार से लेकर अन्य मौकों पर भी बाजार में उसका सकारात्मक असर दिखता है।

महामारी की निराशा भरे दौर में खेतों से आ रही सकारात्मक खबर
गढ़वा प्रखंड के उडसुगी गांव के रहने वाले किसान जितेंद्र मेहता का कहना है कि निश्चित तौर पर निराशा भरे दौर में खेतों से सकारात्मक खबर आ रही है। ईश्वर की कृपा से बेहतर उत्पादन होगा। लेकिन इसके बाद सरकार पर यह जिम्मेवारी बनती है कि इस बार धान क्रय के लिए समय पर व्यवस्था हो। ताकि किसानों को औने पौने दामों पर अपनी फसल ना बेचना पड़े।

घर में उत्सव का माहौल होगा

ढोंटी गांव के किसान रामजीत मेहता का कहना है कि लगभग 15 वर्षों के दौरान इस बार ऐसी स्थिति बनी है। जब किसानों का मन फसल देखकर हर्षित है। अब यह फसल खलियान से होकर किसानों के घर तक आ जाए तो निश्चित तौर पर किसानों के घर में उत्सव का माहौल होगा। क्योंकि इस बार सभी महत्वपूर्ण नक्षत्रों में बारिश हुई है।

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