पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

पारा शिक्षकों में निराशा:15 अगस्त तक पारा शिक्षकों की मांग पूरी नहीं हुई, तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन-दशरथ

गढ़वा20 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • देश के सभी राज्यो ने अपने-अपने तरीके से पारा शिक्षकों का मानदेय वृद्धि करने के साथ ही स्थायीकरण व वेतनमान देने का काम किया

झारखंड के वर्तमान सरकार के 19 माह गुजरने के बाद भी पारा शिक्षकों की समस्याओं का स्थाई समाधान नही होने के कारण पारा शिक्षकों में निराशा देखने को मिल रहा है। बुधवार को इस संबंध में एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा झारखंड के अष्टमण्डल सदस्य दशरथ ठाकुर ने पत्रकारों से कहा कि झारखण्ड राज्य के 65 हजार पारा शिक्षकों का स्थायीकरण करने व वेतनमान देने का प्रदेश के मुख्यमंत्री व राज्य के सभी मंत्री के द्वारा की गई घोषणा को अभी तक धरातल पर नही उतरना पारा शिक्षकों के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि झारखण्ड राज्य सहित पूरे देश में सर्वशिक्षा अभियान के तहत पारा शिक्षकों की बहाली 2003 से शुरू हुई थी।

देश के सभी राज्यो ने अपने-अपने तरीके से पारा शिक्षकों का मानदेय वृद्धि करने के साथ ही स्थायीकरण व वेतनमान देने का काम किया। इसक्रम में झारखण्ड राज्य के पड़ोसी राज्य छतीसगढ़,बिहार, उड़ीसा व बंगाल के साथ कई राज्यो ने पारा शिक्षकों स्थायी कर चुका है। झारखण्ड राज्य में पारा शिक्षकों की बहाली से लेकर आज तक पारा शिक्षक संघर्ष वआंदोलन करते आ रहे हैं। अभी तक कई पारा शिक्षक की जान भी जा चुकी है। वहीं कई पारा शिक्षक रिटायर भी हो गए हैं। बावजूद इसके अभी तक पारा शिक्षकों का स्थायी समाधान नही हो सका है। जो सरकार के लिए शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि पारा शिक्षकों व उनके परिवार के सदस्यों की स्थिति दिनोंदिन दयनीय होती जा रही है। दशरथ ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2003 में एक हजार रुपए के मानदेय पर पारा शिक्षकों की बहाली शुरू की गई थी।उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में प्रथम बार आंदोलन होने के बाद पारा शिक्षकों के मानदेय में सौ प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इसके बाद 2006 में 50, 2008 में 50, 2011 में 39, 2012 में 10, 2014 में 20, 2016 में 10, 2018 में 42 वर्ष 2019 में 48 प्रतिशत की वृद्धि पारा शिक्षकों के मानदेय में की गई है।

खबरें और भी हैं...