भारी अव्यवस्था:सदर अस्पताल में निजी एंबुलेंस चालकों की बढ़ी मनमानी, बरगला कर ले जा रहे प्राइवेट हॉस्पिटल

गढ़वा2 दिन पहले
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  • पूर्व सिविल सर्जन ने अस्पताल परिसर में प्रवेश पर पहले भी लगाई थी रोक
  • निजी क्लीनिक में ले जाने के साथ-साथ भारी भरकम किराया वसूला रहा है

सदर अस्पताल में निजी एंबुलेंस चालकों की मनमानी बढ़ गई है। दिनभर सदर अस्पताल में मंडराने वाली निजी एंबुलेंस चालक और संचालक मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी क्लीनिक में ले जाने के साथ-साथ भारी भरकम किराया वसूल रहे हैं। अस्पताल के कुछ स्वास्थ्य कर्मी और निजी एंबुलेंस चालकों की मिलीभगत से आए दिन समान मरीज को गंभीर मरीज बताकर रेफर करवा दिया जाता है।

साथ ही साथ परिजनों को यह भी कह कर भड़काया जाता है कि सरकारी एंबुलेंस के चक्कर में अगर रहेंगे तो आपकी मरीज की मौत सदर अस्पताल में ही हो जाएगी। सरकारी एंबुलेंस आने में 4 घंटे से ऊपर का समय लगता है, तब तक आप रांची पहुंच जाएंगे और आपके मरीज की मौत हो जाएगी। मरीज के परिजन ऐसे हालात में पैसे ना देख कर निजी एंबुलेंस को करा कर जाना पड़ता है। ऐसे में मरीज के परिजनों के जेब पर खर्च बढ़ जाता है।

निजी एंबुलेंस को परिसर में लगाना मना है : सीएस
इस संबंध में सिविल सर्जन कमलेश कुमार ने कहा कि निजी एंबुलेंस चालक को परिसर में लगाना मना किया गया है। बावजूद निजी एंबुलेंस के संचालक व चालक अस्पताल परिसर में एंबुलेंस लगा रहे हैं। उस पर अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ हमारी भी नजर बनी हुई है। पिछले दिनों बैठक में यह मुद्दा सामने रखा गया था। प्रबंधन समिति के अध्यक्ष से इस मुद्दे पर बात कर बहुत जल्द इस पर एक ठोस निर्णय लिया जाएगा।

पहले भी निजी एंबुलेंस चालकों पर की गई थी सख्ती
बताते चलें कि सदर अस्पताल में एंबुलेंस चालकों की दलाली को देखते हुए पूर्व सिविल सर्जन ने अस्पताल में निजी एंबुलेंस को लगाने से मना कर दिया था। साथ ही एंबुलेंस चालकों को अंदर घुसने पर भी रोका था। लेकिन एक बार पुनः निजी एंबुलेंस चालकों की मनमानी तेजी से बढ़ गई है। एंबुलेंस चालक मरीज के परिजनों से भारी-भरकम पैसा की उगाही के साथ-साथ अस्पताल के मरीजों को निजी क्लीनिक में पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। निजी एंबुलेंस चालकों की कार्य प्रणाली कोई नई नहीं है। अक्सर निजी एंबुलेंस चालक निजी क्लिनिक से मिलकर उनके अस्पताल तक पहुंचाना उनका धंधा बन गया है।
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