धर्म-समाज / आज नजर आ सकता है चांद, ईद की तैयारी पूरी

Moon can be seen today, preparation for Eid is complete
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Moon can be seen today, preparation for Eid is complete

  • लॉकडाउन ने डाला असर, हर वर्ष ढाई कराेड़ की सेवइयां बिकती थीं, इस वर्ष 50 लाख की भी नहीं

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

गढ़वा. मो. एनाम खान, जिला मुख्यालय सहित विभिन्न क्षेत्रों में खुशियों का त्योहार ईद-उल-फितर को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों के द्वारा तैयारी पूरी कर ली गई है। आज शनिवार को 29 रमजान-उल- मुबारक होने के कारण चांद दिखने की पूरी संभावना को देखते हुए लोग ईद से संबंधित सामान की खरीदारी पूरी कर चुके हैं। हालांकि लॉकडाउन के कारण इस वर्ष ईद को लेकर बाजार में चहल-पहल नहीं देखी गई। वहीं ईद के अवसर पर सेवई सहित अन्य सामग्रियों की बिक्री में कोई विशेष तेजी नहीं देखी गई। सेवई विक्रेताओं की मानें तो अन्य वर्षों में गढ़वा जिला में इस अवसर पर ढाई करोड़ रुपए का सेवई का कारोबार होता था। लेकिन इस वर्ष गढ़वा जिला में 50 लाख रुपए का भी सेवई का कारोबार होना मुश्किल हो गया है। सेवई विक्रेताओं ने कहा कि लॉक डाउन के कारण सेवई दुगने दामों पर लाया गया। सेवई के दामो में हुई बढ़ोतरी के कारण  व लोक डाउन की वजह से सेवई को बिक्री प्रभावित हुईं है। लॉक डाउन के कारण ग्राहक काफी कम संख्या में पहुंच रहे हैं। सेवई विक्रेता नौशाद खान ने कहा कि इस वर्ष बाजार में सेवई 100 से 160 रुपए, लोकल सेवई सौ रुपए,  बनारस, गया, रांची व पटना का सेवई 160 रुपए, बनारस का दुधफेनी सेवई 180 रुपए प्रति किलोग्राम कि दर से बेची जा रही है। उन्होंने कहा कि अन्य वर्षों में ढाई करोड़ रुपए का सेवई का कारोबार होती थी। लेकिन इस वर्ष 50 लाख का भी कारोबार होना मुश्किल हो गया है। सेवई विक्रेता नियामत अली ने कहा कि इस वर्ष अभी तक दस प्रतिशत भी सेवई की बिक्री नही हुई है। मानदेय नहीं मिलने के कारण पारा शिक्षकों की ईद रहेगी फीकी : जिले के पारा शिक्षकों के लिए इस बार ईद फीकी रहेगी। खास बात यह है कि राज्य सरकार अन्य विभागों में मई माह का अग्रिम भुगतान करने का निर्देश निर्गत किया है। जबकि पारा शिक्षकों को अभी तक अप्रैल माह का भी मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में पारा शिक्षकों के परिवार के सदस्यों के बीच मायूसी देखी जा रही है। इस संबंध में पारा शिक्षकों का कहना है कि उन्हें पिछले अप्रैल माह का मानदेय नहीं मिला है। उधार के सहारे उनकी जिंदगी चल रही है। ऐसे में पारिवारिक दायित्व निभाना मुश्किल हो गया है।

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