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अव्यवस्था:डंडई अस्पताल में न डॉक्टर और न दवा, ओपीडी में लटका ताला

डंडई2 महीने पहले
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अस्पताल के ओपीडी में लटकता ताला। - Dainik Bhaskar
अस्पताल के ओपीडी में लटकता ताला।

कोरोना महामारी में प्रखंड का इकलौता सरकारी अस्पताल में यदि बीमारियों का इलाज ना हो, मरीजों का भर्ती ना हो, अस्पताल में एमबीबीएस चिकित्सक ना हो, कोरोना का नियमित रूप से जांच ना हो तो स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ा सवाल है। अस्पताल बने करीब 6 वर्ष हो गए और 6 वर्षों में भी यहां मरीजों को भर्ती करना शुरू नहीं हुआ।

आखिर विभाग किस उद्देश्यों से करोड़ों की लागत से यह अस्पताल बनवाया था। और मरीजों को भर्ती होना कब से शुरू होगा। कोरोना जैसी महामारी बीमारी में भी स्वास्थ्य विभाग 80 हजार जनसंख्या के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। लोगों का इलाज राम भरोसे छोड़ दिया है।

प्रखंड के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रहा है। आज पूरा प्रखंड कोरोना महामारी की चपेट में है ।लोग कराह रहे हैं ।कितने लोगों की इलाज के अभाव में जान भी जा रही है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग मौन धारण किया हुआ हैं। ऐसी परिस्थिति में भी स्वास्थ्य विभाग इस अस्पताल में प्रखंड के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं करा रही है। जिससे इन दिनों पूरे इलाके के लोग सर्दी, खांसी, मौसमी वायरल बुखार सहित कोरोना से पीड़ित है।

अधिकतर घरों में देखा जा रहा है कि घर के अधिकतर सदस्य बीमारियों से जूझ रहे हैं और अपने घर पर ही बेड पर पड़े हुए हैं। ऐसे में उनके घर के लोग कब स्वस्थ होंगे चिंता का माहौल लोगों में बना हुआ है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग इस प्रखंड के लोगों के लिए सरकारी अस्पताल में समुचित सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा रही है।

आज अस्पताल के ओपीडी पर वर्षों से ताला लटका हुआ है। ग्रामीण अक्षय राम, अशोक प्रसाद ,राजेश मेहता, जसप्रीत राहुल कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की घोर उदासीनता के कारण प्रखंड के इकलौता अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। वही दवा,मास्क, सेनीटाइजर, यूमियनिटी बढ़ाने वाली दवाइयां सहित छोटे-मोटे बीमारियों के इलाज व दवा की समुचित व्यवस्था नहीं है। जबकि पूरा प्रखंड बीमारियों से जूझ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि लॉकडाउन और कोरोना महामारी के बीच लोगों के पास आर्थिक संकट छाई है लोग किराया के अभाव में मरीजों को15-20 किलोमीटर दूर मेराल अस्पताल में जाने से असमर्थ हैं। सिविल सर्जन से कई बार हॉस्पिटल में सभी प्रकार की इलाज और दवाइयों की समुचित व्यवस्था करने की मांग की हैं। पर उनका सिर्फ आश्वासन मिलता है कोई पहल नहीं होती।

अस्पताल में एक दो नर्स कार्यरत है जो सिर्फ महिलाओं का डिलीवरी करवाती हैं। और एक आयुष चिकित्सक हैं। अन्य ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग ग्रामीणों ने बताया कि मरीजों का यहां भर्ती व इलाज नहीं होता है। यदि क्षेत्र में निजी अस्पताल व झोलाछाप डॉक्टर नहीं रहते तो महामारी में सैकड़ों लोगों की प्रतिदिन मौतें होती।

फिलहाल डॉक्टर भेजना संभव नहीं : प्रभारी सीएस

प्रभारी सिविल सर्जन डॉ कमलेश कुमार ने बताया कि कोरोना का इमरजेंसी केस देखने को लेकर डॉक्टरों को प्रतिनियुक्त पर रखा गया है। विभाग में स्वास्थ्य कर्मियों की घोर कमी है। अभी के समय में एमबीबीएस डॉक्टर वहां भेजना संभव नहीं है। मरीजों को मेराल अस्पताल में भर्ती होना होगा।

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