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परेशानी:कांडी के दो जलाशयों से हर साल बह जाता है बारिश का पानी, ग्रामीण बोले-हल्की मरम्मत से बचा सकते हैं

गढ़वाएक महीने पहले
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  • बारिश का पानी बचा गढ़वा को दिला सकते हैं सूखे से मुक्ति
  • खेतों को पानी मिला तो मजदूरों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी
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साल दर साल पानी के अभाव में गढ़वा जिले की सोने सी फसलें मारी जा रही हैं। इधर चंद घंटों में ही इस धरती पर बरसा लाखों घन मीटर पानी ढाल खेतों से होते पंडी व कोयल नदी से होते सोन नदी में समा जाता है। किसान अपने ही खेत के पानी को हसरत भरी नजरों से दूर देश बहकर जाते निहारता खड़ा रह जाता है। रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून, पानी गये न ऊबरे मोती, मानुष, चून ... के सर्वकालिक सत्य को स्वीकारते हुए बहकर बर्बाद हो रहे पानी को संग्रह करने का जुगाड़ लगाया जाये तो सदानीरा आंखों वाले किसानों का दुख दर्द कारगर तरीके से दूर किया जा सकता है।

कांडी प्रखंड की भौगोलिक संरचना (टोपोग्राफी) इस तरह की है कि जल संग्रहण का यह जुगाड़ यहां बिल्कुल सुगमता से सफल किया जा सकता है। जरूरत इस बात की है कि इस दिशा में एक राय होकर प्रखंड क्षेत्र के लोग और प्रशासन पहल करें। इसके लिए प्रखंड क्षेत्र के मात्र तीन स्थानों पर अधिक से अधिक जितना संभव हो सके बड़े आकार के जल संग्रहण क्षेत्र का विकास किया जाए। बारिश के पानी को इस जल संग्रहण क्षेत्र में जमा कर लिया जाए। लेबलिंग के आधार पर जल संग्रहण क्षेत्र से नाहर, मोरी एवं चैनल निकाल कर पानी को जरूरत के हिसाब से खेतों तक पहुंचाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि डैम की हल्की मरम्मत से बारिश काफी बचा सकते हैं।

दोनों डैमों के तल में भरी मिट्‌टी निकाल उसकी ऊंचाई बढ़ानी होगी
कांडी प्रखंड क्षेत्र में पंडी जलाशय योजना एवं जमुनदाहा जलाशय पहले से बने हुए हैं। लेकिन बांध की कम ऊंचाई एवं जल संग्रहण क्षेत्र के बिल्कुल छोटा होने के कारण यह दोनों लगभग अनुपयोगी होकर रह गए हैं। इसनके तल में भरी मिट्‌टी िनकाल कर ऊंचाई बढ़ानी होगी। दोनों जलाशयों को न्यूनतम 500 मीटर व अधिकतम 1000 मीटर की लंबाई व लगभग इतनी ही चौड़ाई में खुदाई कर बांध को उपयोगी बनाया जा सकता है।

जल संग्रहण की योजनाएं लाकर मजदूरों को रोका जा सकता है 
रोजगार के अभाव में कोरोना संकट में घर वापस आए हैं। वावजूद इसके पापी पेट का सवाल लेकर मजदूरों को वापस जाना उनकी मजबूरी हो गई है। वर्षा जल संग्रहण क्षेत्र के विकास की योजना ली जाए तो पूरे कांडी प्रखंड के साथ-साथ आजू-बाजू के प्रखंड के मजदूरों को भी काफी लंबे दिनों तक रोजगार दिया जा सकता है। क्योंकि अधिकांश मजदूर सिंचाई सुविधा के अभाव में वे परदेस पलायन करके ही बच्चों परिवार पालन करते हैं।

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