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सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि:निजी स्कूल के शिक्षकों की तुलना सरकारी शिक्षकों से करना गलत : संघ

गढ़वा7 दिन पहले
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झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ ने राज्य के वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव के शिक्षकों के संबंध में दिए गए बयान की कड़ी निंदा की है। वहीं दिए गए बयान को शिक्षकों का मनोबल तोड़ने वाला बताया है। इस संबंध में प्रमंडलीय अध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने कहा कि वास्तव में मंत्री ने तुलना ही गलत की है। उन्होंने प्राइवेट स्कूल के संचालकों की तुलना सरकारी स्कूल के शिक्षकों से कर दी। सरकारी स्कूल की संचालक सरकार स्वयं है, इसके जिम्मेवार मंत्री है व अधिकारी है।

इसलिए तुलना इन्हीं की जवाबदेही के साथ होनी चाहिए न कि शिक्षकों के साथ। उन्होंने कहा कि स्कूलों के संचालन और प्रबंधन का अंग प्रधानाध्यापक होते है। जो 99 प्रतिशत स्कूलों में है ही नहीं। अधिकारियों का रुतबा कम न हो इसलिए स्कूल प्रभारी प्रधानाध्यापकों के भरोसे चलाये जा रहे है। प्राइवेट स्कूलों में चयनात्मक प्रवेश होता है, सीटें सीमित और बच्चे मजबूत सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आते है। जबकि सरकारी स्कूलों में सभी बच्चों का अबाध्य प्रवेश होता है और बच्चे भी पिछड़े सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। ऐसे में तुलना सदैव सामान पृष्ठभूमि के बीच होनी चाहिए।

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