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संगीत दिवस:पूर्ण भाव से प्रभात संगीत को महसूस करें तो रेगिस्तान भी हाे जाएगा हरा-भरा : आचार्य सत्याश्रयानंद अवधूत

गिद्दी13 दिन पहले
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प्रभात संगीत दिवस के शुभ अवसर पर रामगढ़ समेत आस-पास के क्षेत्रों में आनंदमार्गियाें ने प्रभात संगीत पर आधारित नृत्य एवं गायन वेबिनार के माध्यम से प्रस्तुत किया। साथ ही प्रभात संगीत दिवस मनाया गया। इस संबंध में भुक्ति प्रधान जेनरल रामगढ़ प्रतिमा दीदी ने कहा कि वेबिनार में केंद्रीय धर्म प्रचार सचिव आचार्य सत्याश्रयानंद अवधूत ने कहा कि आज से लगभग 7000 वर्ष पूर्व भगवान सदाशिव ने सरगम का आविष्कार कर मानव मन के सूक्ष्म अभिव्यक्तियों को प्रकट करने का सहज रास्ता खोल दिया था।

इसी कड़ी में 14 सितंबर 1982 को झारखंड राज्य के देवघर में आनंद मार्ग के प्रवर्तक भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने प्रथम प्रभात संगीत बंधु हे निये चलो बांग्ला भाषा में देकर मानव मन को भक्ति उनमुख कर दिया। 8 वर्ष 1 महीना 7 दिन के छोटे से अवधि में उन्होंने 5018 प्रभात संगीत का अवदान मानव समाज को दिया। संस्कृत बांग्ला, उर्दू , हिंदी, अंगिका ,मैथिली, मगही एवं अंग्रेजी भाषा में प्रस्तुत प्रभात संगीत मानव मन में ईश्वर प्रेम के प्रकाश फैलाने का काम करता है। मनुष्य जब पूर्ण भाव से प्रभात संगीत के साथ खड़ा हो जाता है, तो रेगिस्तान भी हरा हो जाता है।

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