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श्रद्धांजलि:लाल व हरा मैत्री आंदोलन में रामलखन सिंह ने बढ़-चढ़कर लिया था हिस्सा

गिद्दी13 दिन पहले
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  • 1980 के दशक में अपनी पत्नी के साथ मिलकर गिद्दी वाशरी व हेसालोंग माइंस के मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी

बिरसा पार्क गिद्दी में रविवार को वामपंथी नेता स्व. रामलखन सिंह की सातवीं पुण्यतिथि मनाई। सर्वप्रथम झारखंड रसोइया संयोजिका अध्यक्ष संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजीत प्रजापति, प्रदीप रवानी व समाजसेवी धनेश महली ने संयुक्त रूप से उनके चित्र पर माल्यार्पण कर किया। मौके पर अजीत प्रजापति ने कहा कि स्व. रामलखन सिंह का राजनीतिक जीवन शुरू से ही वामपंथियों के लिए काफी प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपनी पत्नी स्व.उर्मिला देवी के साथ मिलकर बेरमो जरीडीह बाजार से महाजनों के खिलाफ लड़ाई छेड़ अपनी राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी।

जिसके कारण महाजनों को बेरमो छोड़ कर भागना पड़ा था। बाद में 1968 में गिद्दी क्षेत्र में आए। 1980 के दशक में अपनी पत्नी के साथ मिलकर गिद्दी वाशरी व हेसालोंग माइंस के मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी। इस दौरान उन्हें पुलिस की लाठियां तो खानी पड़ी, परंतु उनकी जीत हुई। इसके पूर्व वह कुछ दिनों तक सौंदा में रहे। जहां उनका संपर्क सीपीआई, सीपीएम तथा एनसीओईए नेताओं से हुआ। इमरजेंसी के दौरान भी वे 24 माह जेल में रहे। उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में लाल व हरा के मैत्री के दौरान झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो व मासस के एके राय के साथ रामलखन सिंह आंदोलन में शामिल रहते हुए अग्रणी भूमिका निभाई थी। इस अवसर पर राकेश सिंह उर्फ कबलु, अनिता देवी, देवकी महली, शिवचरण बेदिया, संतोष इप्पन, विजय हांसदा, कैलाश गंझू, दिलीप सिंह, बैजनाथ राम, दिलीप बेदिया, मनोहर लाल, मुकेश प्रसाद आदि समेत दर्जनों लोग मौजूद थे।

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