राहत:कर्नाटक में डेढ़ महीने से बंधक 5 मजदूर लौटे घर, एक-एक क्विंटल अनाज मिला

गुमला16 दिन पहले
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मजदूरों को राशन देते डीएसओ व श्रम अधीक्षक। - Dainik Bhaskar
मजदूरों को राशन देते डीएसओ व श्रम अधीक्षक।
  • मजदूरों ने दैनिक भास्कर को वापस घर आने पर दिया धन्यवाद, कहा-कभी नहीं भूलूंगा यह पल
  • पांचों मजदूरों का स्टेशन के समीप कोविड टेस्ट, गुमला आने के लिए वाहन की व्यवस्था की

कर्नाटक राज्य के होसपेट जिला से 72 घंटे बाद डेढ़ माह से बंधक बनाए गए पांच मजदूर शुक्रवार को गुमला पहुंचे। मजदूरों को जिला पहुंचने में अपने पॉकेट से तीन हजार रुपए खर्च करना पड़ा। रांची पहुंचने के बाद सुबह में प्रवासी मजदूर नियंत्रण कक्ष के पदाधिकारी, श्रम विभाग के कर्मी बन्धु सिंह व पुलिस कर्मी वाहन के माध्यम से रेलवे स्टेशन के पास मजदूरों को रिसीव किया।

पांचों मजदूरों का स्टेशन के समीप कोविड टेस्ट किया गया। सभी मजदूर प्रकाश महतो, संजू महतो, सचिन गोप, राहुल गोप और मंगरा खड़िया की कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई। एसडीओ रवि आनंद ने मजदूरों का गुमला आने के लिए वाहनों की व्यवस्था कराई। जिला आने के बाद श्रम अधिकारी एतवारी महतो व जिला आपूर्ति पदाधिकारी ग़ुलाम समदानी मजदूरों से वार्ता की। इस दौरान आपूर्ति पदाधिकारी गुलाम समदानी ने पांचों मजदूरों को 50- 50 किलो चावल व 50-50 किलो गेहूं तत्काल सहायता हेतु दिया। इसके बाद सभी मजदूरों को घर भेज गया।

श्रम अधिकारी एतवारी महतो ने बताया कि सभी मजदूरों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। इसके लिए उक्त सभी लोगों को आधार कार्ड, नोमनी का नाम आदि लाने को कहा गया है। दो दिन के अंदर पांचों लोगों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, जिससे जो प्रवासी मजदूर बाहर जाते हैं उसका डाटा हमलोगों के पास तैयार रहता है और जो ठेकेदार बाहर ले जाते हैं काम कराने के लिए उसे वेतन भत्ता पूरी देनी पड़ती है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी गुलाम समदानी ने कहा कि विभाग के ओर से पूरा सहयोग करूंगा। मजदूर संजू महतो का राशन कार्ड तत्काल राशन कार्ड बनाकर दिया गया।

टिकट का पैसा भी प्रशासन ने नहीं दिया : संजू महतो

मजदूर संजू महतो ने बताया कि हॉस्पेट में जब ट्रेन बैठे उसके बाद प्रशासन का काेई आदमी हमलोगाें के साथ नहीं था। मालिक ने धमकी दी थी कि पुलिस तुमलोगों को कबतक बचाएगा। रास्ता में देख लेगें। उस रात तो हमलोगों डर से नहीं सोए। मालिक के पास विजयवाड़ा से भी लोग आते थे, इसलिए विजयवाड़ा में भी डर बना रहा। मालिक मारने के समय धमकी देता था। इस बात को हमलोग हॉस्पेट पुलिस काे बता दिया था।

पुलिस के कहने के बाद भी मालिक ने 15 की जगह केवल 8 हजार रुपए दिए : प्रकाश

मजदूर प्रकाश महतो ने बताया कि हमलोग जिंदा सिर्फ दैनिक भास्कर अखबार के माध्यम से पहुंचे हैं। दैनिक भास्कर को कभी नहीं भुलूंगा। जैसे ही दैनिक भास्कर से सम्पर्क किया, तो वे जिला प्रशासन के माध्यम हमलोगों को मालिक के चंगुल से बचाया।

उन्होंने बताया कि किसी से भी फोन पर बात करते थे, तो मालिक को शक होता था। तीन दिसंबर को अखबार में छपी खबर की जानकारी मालिक तक पहुंच गया। रात में हमलोगों को जान से मारने का धमकी दे रहा था। चार जनवरी को सुबह- सुबह जब होस्पेट जिला की पुलिस पहुंची तब जाकर हमलोगों को राहत हुई। शायद मैं दैनिक भास्कर से संपर्क नहीं करता तो हमलोगों को वह काम करा कर मार देता। राेज 18 घंटे काम कराता था। उसमें भी 15 घंटे पानी में रहकर मछली मारने का काम करना पड़ता था, बचे तीन घंटे बोरा में मछली भरने का काम करना पड़ता था।

पुलिस को देख मालिक व उसका बेटा भाग गया था। पुलिस ने उनलोगों को खोज कर लाया और मजदूरी देने की बात कह थाना ले गए। हमलोगों का प्रति व्यक्ति 15-15 हजार रुपए का मजदूरी होता है। मगर आठ-आठ हजार ही दिया।

हमलोग अपना टिकट लेकर विजयवाड़ा पहुंचे
मजदूर संजू महतो ने बताया कि विजयवाड़ा से जब आधा रास्ता पार किया तो हमलोगों को राहत हुई। वहां के प्रशासन ने भी खाने की कोई व्यवस्था नहीं की थी। सारा टिकट का खर्च भी अपने पैसे से देना पड़ा। टिकट में कुल तीन हजार रुपए का खर्च आया। वहीं चार को हॉस्पेट पुलिस हॉस्पेट स्टेशन से विजयवाड़ा का टिकट काटने के लिए कहा था, मगर मालिक ने टिकट नहीं कटवाया। हमलोग अपने से टिकट कटवाकर विजयवाड़ा पहुंचे।

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