नक्सली वारदात:40 किलो विस्फोटक, 4 कंटेनर ढूंढ निकालने सहित कई जवानों को बचाने वाला आईईडी स्पेशलिस्ट श्वान ड्रोन शहीद

गुमला3 महीने पहले
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घायल जवान को हेलीकॉप्टर से रांची ले जाते साथी जवान। - Dainik Bhaskar
घायल जवान को हेलीकॉप्टर से रांची ले जाते साथी जवान।
  • नक्सलियों के लगाए बम से एक जवान घायल, वायुसेना के हेलीकॉप्टर से रांची लाया गया
  • नक्सल प्रभावित कुरुमगड़ के केरागानी जंगल में नक्सलियों की टोह में निकली पुलिस उनके बिछाए जाल में फंस गई

नक्सल प्रभावित कुरुमगड़ थाना क्षेत्र के केरागानी जंगल में मंगलवार को अहले सुबह करीब 7 बजे नक्सलियों की टोह में निकली पुलिस उनके बिछाए जाल में फंस गई। नक्सलियों के बिछाया बम ब्लास्ट होने से अब तक 40 किलो विस्फोटक, 4 कंटेनर ढूंढकर कई जवानों की जान बचाने वाला आईईडी स्पेशलिस्ट श्वान ड्रोन शहीद हो गया।

वहीं डॉग स्क्वायड का हैंडलर कोबरा जवान 28 वर्षीय विश्वजीत कुंभकार भी घायल हो गया। जवान के घायल होने के बाद इसकी सूचना बटालियन के वरीय अधिकारियों व मुख्यालय को दी गई। सूचना मिलते ही जिला मुख्यालय से घटनास्थल की ओर अतिरिक्त बल भेजा गया। इसके बाद शहीद डॉग व जवान को जंगल से बाहर निकाला गया।

फिर मुख्यालय से भेजे गए वायु सेना के दो हेलीकॉप्टरों के द्वारा जवान को इलाज के लिए रांची ले जाया गया। जहां मेडिका में उनका इलाज चल रहा है। इधर डॉग स्क्वायड के पार्थिव शरीर को घटनास्थल से पूरे सम्मान के साथ पशु चिकित्सालय लाया गया। जहां डॉक्टरों द्वारा पोस्टमार्टम किये जाने के बाद पार्थिव शरीर को सिलम स्थित सीआरपीएफ 218 बटालियन का कैंप ले जाया गया। कैंप में उसे श्रद्धांजलि दी गई। फिर हजारीबाग के बरही कैंप ले जाया गया।
अपनी सुरक्षा के लिए नक्सली बुधेश्वर ने जंगलों में बिछा रखी है आईईडी

संगठन में जोनल कमांडर के पद पर आसीन 15 लाख रुपए का इनामी नक्सली बुद्धेश्वर उरांव अपनी सुरक्षा के लिए केरागानी व मरवा जंगल समेत कई नक्सल प्रभावित क्षेत्र के जंगलों में जगह-जगह पर आईईडी बम बिछा रखा है। ताकि पुलिस उस तक आसानी से नहीं पहुंच सके। इसके अलावा नक्सलियों कि यह भी मंशा है कि जब भी पुलिस उनकी टोह में जंगल में प्रवेश करें तो वे आईईडी बम की चपेट में आ जाए।

हाल के दिनों में जिले में इस प्रकार आईडी ब्लास्ट की कई घटनाएं घटित हो चुकी है। बीते 25 फरवरी को जिला बल व सीआरपीएफ की टुकड़ी गुप्त व सटीक सूचना के बाद बुधेश्वर को घेरने रोरेद जंगल में घुसी थी। उस समय बुद्धेश्वर अपने दर्जन भर साथियों के साथ पूरी तरह घिर चुका था।

पुलिस उसे जीवित पकड़ने के उद्देश्य से काफी नजदीक पहुंच चुकी थी। परंतु नक्सलियों के नजदीक पुलिस के पहुंचने से पहले ही बुद्धेश्वर को इसकी भनक लग गयी और वह एक आईईडी विस्फोट कर भाग निकला था। इसी आईईडी विस्फ़ोट में सीआरपीएफ का जवान रॉबिन्स कुमार घायल हो गए थे।

डॉग स्क्वायड ने जान देकर अपना फर्ज निभाया

नहीं रहा श्वान ड्रोन
नहीं रहा श्वान ड्रोन

केरागानी व मरवा जंगल इलाके में नक्सलियों के आगमन के बाद से ही सेफ जोन रहा है। यहां नक्सली दस्ता पहाड़ों की ऊंचाई पर रहकर पुलिस की हर गतिविधि पर अपनी नजर बनाए रखते है। मंगलवार को हुए आईईडी ब्लास्ट के दौरान पुलिस ने काफी चतुराई से काम लिया। नहीं तो किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था। डॉग स्क्वायड की टीम को आगे चलाना पुलिस के लिए एक ओर कारगर साबित हुआ तो वहीं ब्लास्ट में शहीद डॉग स्क्वायड ने अपना फर्ज अदा कर दिया।

जंगल में विस्फोट के बाद पुलिस तीन ग्रामीणों को कैंप में ले जाकर नक्सलियों की ले रही है जानकारी

सीआरपीएफ, जिला बल व कोबरा के जवान ब्लास्ट के बाद केरागानी जंगल से लौटने के दौरान तीन ग्रामीणों को अपने साथ कैंप लेकर लौटे हंै। जिनसे कैम्प में रखकर पूछताछ की जा रही है। इस दौरान ग्रामीणों नेे नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सुबह में पुलिस ग्रामीणों को ढाल बनाकर सर्च अभियान में निकली थी। तभी ब्लास्ट के बाद ग्रामीण वहां से भाग निकले। मगर जवान के घायल होने पर कोबरा के जवान आक्रोशित थे। वे लोग ग्रामीणों से नक्सली गतिविधि के बारे में जानकारी लेना चाहते है। मगर हम ग्रामीण खेतीबारी में लगे है। हमलोगों का नक्सलियों से किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है।

झारखंड के सभी हिस्सों में संचालित 83 अभियानों में भाग लिया था श्वान ड्राेन ने

ड्राेन ने झारखंड राज्य के लगभग सभी हिस्सों में 83 अभियानों में भाग लिया था। उनकी एक महान उपलब्धि 07:04:2016 को पारसनाथ क्षेत्र में थी जहां उन्हें 40 किलोग्राम विस्फोटक के 04 कंटेनर मिले। इसमें डेटोनेटर, कॉर्टेक्स, मोबाइल फोन, वॉकी टॉकी, जीपीएस भी शामिल है जो किसी भी दुर्घटना से बचने में मदद करता है और बहुमूल्य जीवन बचाता है। इधर, बताया जाता है कि 20 साल से नक्सली बुधेश्वर का दस्ता मरवा केरागानी के जंगलों में घूमता फिर रहा है। विगत 28 मई को भी पुलिस गुप्त सूचना पर बुधेश्वर व उसके दस्ते को घेरने में जुटी थी।

कोबरा बटालियन 203 के ड्राेन ने कई आईईडी डिटेक्ट कर साथी जवानों की जान बचाई थी

बरही|कोबरा बटालियन का चहेता डाग ड्रोन अब नहीं रहे। शहीद डॉग ड्रोन का जन्म 26 सितंबर 2014 को हुआ था। तीन माह की उम्र में ही कोबरा बटालियन के 203 में 27 दिसंबर 2015 को डॉग स्क्वायड टीम में ज्वाइन किया था। कोबरा 203 बटालियन से जुड़ कर इन्होंने 6 साल तक सेवा दी। बताया गया कि डॉग स्क्वायड टीम में रहते हुए इन्होंने विभाग को कई आईडी डिटेक्ट कर जवानों की जान बचाई साथ ही बड़ी घटना को टाला भी। शहीद ड्रोन को कोबरा बटालियन बरही में सलामी दी गई। लोगों ने कहा कि किसी भी बड़े ऑपरेशन में ड्रोन बहुत याद आएगा।

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