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आसमानी आफत:गुमला में चार वर्षों में वज्रपात ने 143 लोगों की जिंदगी छीनी, 38 मृतक के परिजनों को अबतक मुआवजा नहीं

गुमला24 दिन पहलेलेखक: अश्विनी/आरिफ
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आसमानी बिजली का दृश्य(फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
आसमानी बिजली का दृश्य(फाइल फोटो)
  • पिछले साल सबसे अधिक 44 लोगों की मौत हुई, कई लोग झुलसकर विकलांग बने

जिला मुख्यालय समेत आसपास के प्रखंडों व ग्रामीण इलाकों में आसमान से मौत बनकर गिरती बिजली अब धीरे धीरे बड़ी आपदा बनती जा रही है। आसमान पर बादल गरजने और बिजली चमकने से कई घरों की खुशियां पल भर में छिन जाती है और चीत्कार मच गई है। वहीं कई घर अपनो को खोकर सूने हो गए हैं। किसी मां की गोद से उसका सहारा छीन गया है तो कोई अपनों को खोने का दर्द वर्षों तक समेटे हुए है। कुदरत का यह कहर कई बार तो लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया है।

जिले के अलग- अलग हिस्सों में पिछले चार वर्षों में हुई बारिश के दौरान बिजली गिरने से सैकड़ों लोग अकारण काल के गाल में समा गए हैं। जबकि कई लोग झुलस कर गंभीर रूप से घायल होकर अब भी विकलांगता झेल रहे है। वहीं इन तीन वर्षों में इंसानों के अलावा हजारों मवेशी व जानवरों की भी मौत हो गई। जिला आपदा प्रबंधन विभाग से मिले एक आंकड़े के मुताबिक जिले के सभी 12 प्रखंडों में तीन वर्षों 2017 से लेकर 2021 मार्च माह तक 143 लोगों का आसमानी बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई है।

इनमें वर्ष 2017-2018 में 28 लोगों,2018 -19 में 38 लोगों व 2019 -20 में 44 व 2020 व 2021 में 33 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा कई मामले ऐसे भी है जो सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं हैं। किसी कारणवश वे मुआवजा की गुहार नहीं लगा सके हैं। ऐसे मामलों के सामने आने के बाद यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है।

जिले में कई ऐसे मामले भी होते हैं जो रिकॉर्ड में नहीं दर्ज हो पाते , इसमें मुआवजा नहीं मिल पाता

105 आश्रितों के बीच चार करोड़ 9 लाख 50 हजार रुपए मुआवजा का हो चुका है वितरण

ठनका (आसमानी बिजली) से मरने वाले 143 लोगों में से 105 लोगों के आश्रितों को अब तक आपदा विभाग द्वारा चार करोड़ 9 लाख 50 हजार रुपया मुआवजा प्रदान किया गया है। इनमें 2017-18 के 22 मृत मानव के आश्रित परिवारों के बीच 80 लाख 50 हजार, 2018-19 के 22 मृत मानव परिवार के आश्रितों के बीच 85 लाख व 2019-20 के 28 मृत मानव परिवार के आश्रितों के बीच एक करोड़ 12 लाख व 2020-21 के 33 मृतक के परिवार के बीच एक करोड़ 32 लाख रुपया शामिल है।

जबकि शेष बचे लोगों व वर्ष 2021 मार्च माह के बाद घटित घटना के मामलों के आश्रितों को मुआवजा का भुगतान नहीं हुआ है और न ही मरने वालों की संख्या ज्ञात है। 2021 के बीते मार्च माह के बाद करीब दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत होने का अनुमान है। इनके लिए आवंटन का डिमांड किया गया है। आवंटन मिलते ही ऐसे लोगों को भी जल्द किया जाएगा।

सिलाफरी का ग्रामीण घंटों रखा गया था गोबर में

वर्ष 2020 में दो जून को जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर स्थित सिलाफरी गांव निवासी मोती लाल साहू की मौत वज्रपात की चपेट में आने से हो गई थी।मोती लाल की मौत से पहले ग्रामीण उसे गांव में ही घंटों गोबर में ढक कर रखे थे। इसके बाद उसे अस्‍पताल ले जाया गया था। मगर तब तक गोबर से ढक कर रखे जाने के कारण उनकी मौत हो चुकी थी।

बारिश के समय खिड़की और दरवाजे बंद रखने की सलाह दी गई

आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को सतर्क रहने के लिए जारी किया है दिशा-निर्देश

राज्य सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा लोगों को सतर्क रहने के लिए कई बार दिशा निर्देश जारी किया गया है। कहा गया है कि आप घर के भीतर हों तो बिजली से संचालित उपकरणों से दूर रहें, तार वाले टेलीफोन का उपयोग नहीं करें। खिड़कियां व दरवाजे बंद कर दें। बरामदे और छत से दूर रहें। इसके अलावा ऐसी वस्तुएं जो बिजली के सुचालक हैं उनसे भी दूर रहना चाहिए।

ठनका से मरने वालों के परिजनों को चार लाख रुपए मुआवजा देने का है प्रावधान

आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा आसमानी बिजली से मरने वाले प्रत्येक परिवार के बीच चार लाख रुपए मुआवजा दिया जाता है।जबकि मवेशियों की मौत पर प्रत्येक मवेशी 25 से 30 हजार रुपए देने का प्रावधान है। वहीं घायलों को एक सप्ताह तक इलाजरत रहने पर चार हजार दो सौ व विकलांगता होने पर मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दो लाख देने का प्रावधान है।पीड़ित परिवार को सीओ के पास लिखित आवेदन होता है।

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