श्रद्धालुओं की संख्या कम:भक्तों पर बरसी मां की कृपा...सप्तमी पर कालरात्रि की पूजा, महाअष्टमी पूजन आज

गुमला12 दिन पहले
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शारदीय नवरात्र के छठा दिन बीत जाने के पश्चात मंगलवार को सप्तमी तिथि को पूजा पंडालों में माता के दर्शन के लिए पट खोल दिया गया। सप्तमी तिथि को मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा के पश्चात पूजा पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा के बाद भक्तों के दर्शन के लिए उनका पाठ खोला जाता है। षष्ठी तिथि को पाठकर्ता श्रद्धालुओं ने बाजे-गाजे के साथ बेल का आमंत्रण किया था।

मंगलवार को बेल की पूजा कर उन्हें आमंत्रित कर पंडाल में लाया गया और उसके पश्चात मां भगवती का नेत्र ज्योति खुला। मां कालरात्रि का पूजन शुभंकर माना गया है। वह दुष्टों के संहार तथा भक्तों के मनोकामना को पूर्ण करने वाली देवी मानी जाती हैं। इस वर्ष भी अगले बार की तरह दुर्गा पूजा पंडालों में कोरोना का असर स्पष्ट रूप से देखा गया।

एक तरफ जहां सादगी पूर्वक पूजा के लिए प्रशासन ने दिशा निर्देश जारी किया था। वहीं पूजा समितियों ने भी पूजा के नाम पर केवल धार्मिक परंपरा का निर्वाह किया है। पूजा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि वे लोग हर वर्ष मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं। पूजा में श्रद्धा भक्ति में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होना चाहिए। इस कारण इस वर्ष सादगी पूर्ण माहौल में ही पूजा किया गया।

नवरात्र में दुर्गा पाठ के दौरान सामूहिक पूजा अर्चना पर पूजा समिति के श्रद्धालु पदाधिकारियों ने सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के उपयोग करने संबंधी सरकारी दिशा निर्देश का अनुपालन किया। पूजा समिति के लोगों ने आम लोगों से भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील करते देखे गए। हालांकि मंगलवार को जब दुर्गा पूजा पंडाल का पट खोला गया। तब श्रद्धालुओं की संख्या कम ही देखा गया।

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