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रमजान:सोशल डिस्टेंस के साथ इबादत, मांगी कोरोना से मुक्ति

गुमलाएक महीने पहले
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  • कोरोना के कारण अलविदा जुमे की नमाज में मुस्लिम समाज के लोग कम शरीक हुए, घरों में पढ़ी गई

रमजान का पवित्र माह धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है। तीन अशरे में बंटा यह पूरा माह अपने अंतिम अशरे के सफर पर है। पहले व दूसरे अशरे में रहमतो व बरकतों की बारिश के बाद अब तीसरे अशरे में मगफिरत की बारिश का चरण अंतिम पड़ाव पर है। जरूरत है कसरत के साथ अपने अपने गुनाहों की मगफिरत कराने की। अपने रब को राजी करने की। कोरोना से मुक्ति के लिए फरियाद करने की। शुक्रवार को अलविदा शहर के कई मस्जिदों में अलविदा अलविदा माहे रमजान के खुत्बे के साथ लोगों ने नम आंखों से खुदा की इबादत की।

इस दौरान शासन प्रशासन व विभिन्न इदारा के आह्वान पर सरकार के गाइडलाइन का पालन करते हुए सामान्य लोगों की उपस्थिति में मस्जिदों में नमाज अदा की गई। कई लोगों ने घरों में रहकर जोहर व नफिल नमाज का पाबंद किया। इधर मस्जिदों में जैसे ही इमामों ने अलविदा अलविदा माहे रमजान के खुत्बे को पढ़ा। बरबस ही नमाज में शिरकत करने वाले रोजेदारों की आंखें नम हो गई। लोगों ने रब से अपनी गुनाहों की माफी मांगी। कोरोना से पूरी दुनिया व इंसानियत के बचाव के लिए दुआएं की। कहा कि अल्लाह बहुत रहीम है करीम है। कोरोना के सबब के कारण दुनिया सूनी पड़ी हैं।अलविदा जुमा की नमाज में नमाजी नदारद हैं। पहली बार इस नमाज में मस्जिदों में अपेक्षाकृत भीड़ नहीं है। ए रब अब तू राजी हो जा। मेरी गुनाहों के कारण हुए अपनी नाराजगी को दूर कर दे।और कोरोना से सारी इंसानियत को निजात दे दे। जो अस्पतालों में पड़े हैं उन्हें सिफ़ा दे दे। ए रब तू मेरी इस दुआ को कबूल क र ले।तू कबूल कर लेगा तो तेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा। बल्कि तमाम मखलूक का बन जाएगा।

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