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घोषणा:गुमला शहरी क्षेत्र के बेरोजगारों को मिलेगा 100 दिन का रोजगार, 275 रु. होगा मानदेय

गुमला8 दिन पहले
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  • पलायन रोकने के लिए दो अक्टूबर से शुरू की जाएगी श्रमिक योजना
  • शहरी क्षेत्र में वर्ष 2015 के पूर्व से निवास करने संबंधी प्रमाण होना चाहिए

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत एक सौ दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है। उसी प्रकार अब शहरी क्षेत्र में भी बेरोजगार श्रमिकों को एक वित्तीय वर्ष में एक सौ दिन के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इसके तहत कार्य करने वाले श्रमिकों को प्रति कार्य दिवस 274.81 रुपए की दर से भुगतान किया जाएगा।

इस योजना के तहत कार्य करने के लिए न्यूनतम उम्र 18 वर्ष तथा शहरी क्षेत्र में 2015 से पूर्व से निवास करने संबंधी कोई भी एक प्रमाण होना चाहिए। इस योजना को मुख्यमंत्री श्रमिक योजना के नाम से लागू किया जा रहा है। जो आगामी दो अक्टूबर से धरातल पर उतरेगा। इस योजना का फलाफल गरीब परिवाराें में खाद्य सुरक्षा, पोषण व उनके जीवन में उत्तरोतर सुधार लाना एवं राज्य में शहरी गरीबों के पलायन को रोकना है।

डे-एनयूएलएम की सीएमएम बोलीं-पार्षदों की मदद से की जाएगी कामगारों की पहचान

डे-एनयूएलएम की सीएमएम सुनीता कुमारी ने बताया कि कामगारों की पहचान के लिए वार्ड स्तर पर संबंधित पार्षदों की भी सहायता ली जाएगी। ताकि अकुशल श्रमिक की पहचान आसानी से हाे सके। उन्होंने बताया कि काम के बाद 15 दिनों के अंदर मजदूरों को मजदूरी दी जाएगी। श्रमिकों के कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएगी। सुनीता ने यह भी बताया कि योजना के तहत प्रदत्त अधिकारों एवं प्रकिया के उल्लंघन पर संबंधित कर्मी से विभागीय कार्रवाई के अतिरिक्त एक हजार तक का जुर्माना लिया जा सकता है।

इच्छुक व्यक्ति का निबंधन के बाद बनाया जाएगा जॉब कार्ड

इस योजना के तहत कार्य करने के इच्छुक व्यक्तियों का सबसे पहले प्रज्ञा केंद्र, नप कार्यालय, वार्ड स्तर या ऑनलाइन माध्यम से निबंधन कर जॉब कार्ड बनाया जाएगा। इसमें वैसे इच्छुक व्यक्तियों का निबंधन किया जाएगा, जिनकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो और जो एक अप्रैल 2015 या उससे पहले से शहरी क्षेत्र में रह रहे है। इसके प्रमाण पत्र के तौर पर आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली बिल, बैंक पासबुक या सक्षम पदाधिकारी द्वारा निर्गत आवासीय प्रमाण पत्र होना चाहिए।

नप के अलावा सरकार की योजनाओं में लिया जाएगा काम

मुख्यमंत्री श्रमिक योजना के तहत निबंधित श्रमिकों को साफ-सफाई और स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, बागवानी, सार्वजनिक काम व नगर परिषद द्वारा संचालित योजनाओं में तो काम लिया ही जाएगा। यदि नप का काम नहीं चल रहा है, तो शहरी क्षेत्र में राज्य सरकार के अन्य विभागों के द्वारा संचालित सरकार की अन्य योजनाओं में भी इनसे काम लिया जाएगा। योजना का मकसद गरीब परिवारों को रोजगार के साथ उनके जीवन में उत्तरोतर सुधार, शहरी क्षेत्र में साफ सफाई, स्वच्छता और शुद्ध वातावरण का निर्माण, शहरी क्षेत्र में हरियाली का विस्तार करना, शहरी क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं को समय पर पूरा होने की गारंटी करना भी है।

सीआरपी की ली जाएगी सेवा : गुमला नगर परिषद क्षेत्र में वार्ड स्तर पर श्रमिकों का निबंधन व जॉब कार्ड बनाने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए सीआरपी से सेवा ली जाएगी। एक साधन सेवी के जिम्मे दो-तीन वार्ड होंगे। इस प्रकार नप क्षेत्र में 22 वार्ड के लिए आठ सीआरपी होंगे। इनमें वार्ड 16, 17 व 18 में मंजू पाठक, 20, 21 व 22 में खुशी जेदिया, 6, 7 व 8 में गीता देवी, 12 व 13 में बैजयंती देवी, 2, 14 व 11 में सरस्वती देवी, 1, 9 व 10 में रिंकी देवी, 5, 15 व 19 में सोनी देवी और 3 एवं 4 में सीमा दास को जिम्मेवारी दी गई है।

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