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संपदा योजना:मत्स्य की 16 योजनाओं के लिए 55 लाभुकों का चयन

हजारीबाग13 दिन पहले
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राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एन.सी.डी.सी) के सौजन्य से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम नगर भवन, हजारीबाग में मंगलवार को आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त रूप से उप विकास आयुक्त, निदेशक मत्स्य, रांची, एम.डी झास्कोफिश-सह-संयुक्त मत्स्य निदेशक, मत्स्य निदेशालय, क्षेत्रीय निदेशक एनसीडीसी, आरटीसी, रांची, जिला मत्स्य पदाधिकारी, हजारीबाग एवं जिला मत्स्य पदाधिकारी, कोडरमा ने किया।

इस अवसर पर क्षेत्रीय निदेशक एन.सी.डी.सी ने बताया कि एन.सी.डी.सी सहकारी क्षेत्र के लिए शीर्ष वित्तीय तथा विकासात्मक संस्थान के रूप में कार्यरत एक मात्र सांविधिक संगठन है, यह कृषि एवं संबंध क्षेत्रों के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में सहकारिता को सहयोग करता है। इस कार्यक्रम में प्रबंध निदेशक झास्कोफिश के द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत मत्स्य प्रक्षेत्र की नई योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना प्रारंभ की गई।

इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी तथा बताया कि उक्त योजना का मुख्य उद्देश्य मछली उत्पादन एवं उत्पादकता में गुणात्मक अभिवृद्धि मात्स्यिकी प्रबंधन के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी सहायता एवं आवश्यक आधार रूप संरचनाओं का विकास, आधुनिकीकरण एवं सुदृढीकरण के लिए सहायता उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में भारत सरकार का अंशदान, राज्य सरकार का अंशदान एवं लाभुक का अंशदान निहित है, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति एवं सभी वर्गों के महिला के लिए सरकारी सहायता ईकाई लागत का कुल 60 प्रतिशत एवं अन्य कोटि के लाभुक के लिए ईकाई लागत का 40 प्रतिशत देय है।

उक्त योजना के अंतर्गत वर्ष 2020-21 में हजारीबाग जिले को कुल 16 योजनाओं के अंतर्गत कुल 55 लाभुकों का चयन किया गया है। हजारीबाग जिले के अंतर्गत कुल 17 जलाशय है, जिसका कुल जलक्षेत्र 5139 है तथा उक्त जलाशयों में कुल 390 केज बैट्री का अधिष्ठापन विभागीय/ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूरबन मिशन एवं विशेष केन्द्रीय सहायता योजना के अंतर्गत किया गया है। निर्मित केजों में स्थानीय लोगों के द्वारा सघन मत्स्य पालन का कार्य किया जा रहा है।

निदेशक मत्स्य ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत फिश फार्मर प्रोसेसर आर्गनाइजेशन बनाया जाना है। उन्होंने बताया इसके अंतर्गत एफएफपीओ को अन्य योजनाओं के लाभ के साथ-साथ मत्स्य उत्पादकों द्वारा संगठित तरीके से क्रय एवं विक्रय किया जा सकेगा। कार्यक्रम में हजारीबाग एवं कोडरमा जिले के लगभग 80 से 90 मत्स्य कृषक उपस्थित हुए। उप विकास आयुक्त द्वारा उपस्थित मत्स्य पालकों को संबोधन के क्रम में बताया गया कि हजारीबाग जिले के मत्स्य कृषक के केजों तथा तालाबों में सघन मत्स्य पालन का कार्य किया जा रहा है, जिससे हजारीबाग जिला मत्स्य पालन/उत्पादन में आत्म निर्भर तथा कृषकों के आय में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है।

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