एसबीएमसीएच में इलाज के दौरान बच्चे की मौत:गुस्साए परिजनों ने काउंटर में की तोड़फोड़, मुख्य गेट पर जड़ा ताला

हजारीबागएक महीने पहले
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  • अस्पताल प्रबंधन के जांच के आश्वासन और पुलिस के पहल पर खुला मुख्य गेट का ताला

शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान 15 वर्षीय एक बालक की मौत से गुस्साए परिजनों ने जमकर हंगामा किया। आयुष्मान भारत का काउंटर तोड़ डालें । हॉस्पिटल का मुख्य गेट में ताला जड़ दिया। हंगामा से मेन रोड पर काफी भीड़ लग गई। सड़क जाम हो गया।

अस्पताल प्रशासन और पुलिस के पहल से डेढ़ घंटे बाद गेट का ताला खुलवाया जा सका। मंगलवार को 12:00 बजे से लगभग दो बजे दिन तक हंगामा चलता रहा। वैसे उनका हंगामा सोेमवार देर रात से ही जारी था। मरीज की मौत से गुस्साए परिजनों ने रात में अस्पताल के आयुष्मान भारत के एक काउंटर में तोड़फोड़ की। काउंटर का शीशा तोड़ दिया।

चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप, परिजन बोले- यहां लाकर की गलती

चुरचु निवासी अनिल कुमार राम ने कहा कि उनके 15 वर्षीय पुत्र ऋषि कुमार की मौत चिकित्सकों की लापरवाही से हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ मनोज कुमार भगत की लापरवाही से उनके बेटे की जान गई है। गुस्साए परिजन अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे और पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ गए। साथ ही मुआवजा की मांग कर रहे थे।

अनिल कुमार ने यहां तक कहा कि उन्होंने सदर अस्पताल आकर गलती की। लेकिन गुस्साए परिजन चिकित्सक पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। आक्रोशित लोगों ने मंगलवार को लगभग 12 बजे अस्पताल के मुख्य गेट पर भी ताला जड़ दिया। दूसरे गेट पर नाला निर्माण नही होने के कारण आने जाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल आने वाले दर्जनों मरीज को दूसरे अस्पताल का रुख करना पड़ा।

अस्पताल प्रबंधन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच का दिया भरोसा

अस्पताल के मुख्य गेट में तालाबंदी कर रहे लोगों को अधीक्षक डॉ विनोद कुमार सिंह ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद जांच का भरोसा दिया। इसके बाद परिजन शव के पोस्टमार्टम के लिए तैयार हो गए। शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद परिजनों को सौंप दिया गया। मौके पर सदर पुलिस की टीम पहुंची। फिर परिजन मृतक के शव को अंतिम संस्कार के लिए चुरचू ले गए।

बताया गया कि सोमवार को शाम 4 से 5 बजे के बीच अनिल कुमार राम अपने बीमार पुत्र को दिखाने के लिए पहुंचे थे। ओपीडी में तैनात डॉ मनोज कुमार भगत ने उल्टी बंद करने वाली दवा और बी कांप्लेक्स की गोली दी। इसके बाद परिजन वापस घर लौट गए। घर जाने के चार-पांच घंटे के बाद मरीज के नाक से खून निकलने लगा और अस्पताल लाने के दौरान मौत हो गई।​​​​​​​

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