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बकरीद का त्यौहार:साेशल डिस्टेंसिंग के साथ मस्जिदाें में पढ़ी गई बकरीद की नमाज, लोगों ने दी बधाई

हजारीबाग4 दिन पहले
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इस्लाम धर्मावलंबियों का महत्वपूर्ण त्यौहार ईद उल अजहा यानी बकरीद का त्यौहार बुधवार को पूरे जिले में परंपरागत रूप से मनाया गया। त्यौहार में कोविड गाइडलाइन का पालन किया गया। इस अवसर पर अधिकांश लोग अपने अपने घरों में नमाज अदा किया। कुछ लोगों ने मस्जिदों में नमाज अदा की जहां शारीरिक दूरी का पालन किया गया। सभी लोगों ने मास्क लगा रखा था।

बकरीद के मौके पर कुर्बानी की रस्म अदा की गई। इस उपलक्ष्य में मशहूर इस्लामी स्कॉलर मौलाना जावेद हुसैन सिद्दीकी ने कहा कि ईद उल अजहा, मजहबे इस्लाम में बहुत अधिक महत्व है। वही बकरीद पर्व मनाने के पीछे कुछ ऐतिहासिक किंवदन्ती भी है। इसके अनुसार इब्राहिम अली सलाम को अल्लाह का बंदा माना जाता है, जिनकी इबादत पैगम्बर के तौर पर की जाती है, जिन्हें इस्लाम मानने वाले हर अनुयायी अल्लाह का दर्जा प्राप्त है।

एक बार हजरत साहब का इम्तिहान लेने का आदेश दिया कि हजरत अपनी सबसे अजीज की कुर्बानी देंगे तभी वो खुश होंगे। हजरत के लिए सबसे अजीज उनका बेटा हजरत इस्माइल अली सलाम थे जिसकी कुर्बानी के लिए वे तैयार हो गए। जब कुर्बानी का समय आया तो हजरत इब्राहिम अली सलाम ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और अपने बेटे की कुर्बानी दी लेकिन जब आंखों पर से पट्टी हटाई तो बेटा सुरक्षित था। उसकी जगह पर इब्राहिम अली सलाम के अजीज बकरे की कुर्बानी अल्लाह ने कुबूल की ।

हजरत इब्राहिम अली सलाम की इस कुर्बानी से खुश होकर अल्लाह ने बच्चे इस्माइल अली सलाम की जान बख्श दी और उसकी जगह बकरे की कुर्बानी कुबूल किया गया। तभी से बकरीद को कुर्बानी देने की परंपरा चली आ रही है। इधर सर्वधर्म मानवता मंच के संस्थापक-सह-केन्द्रीय अध्यक्ष निसार खान ने जिलावासियों को ईद-उल-अज़हा की बधाई दी है।

शहर में बड़ा जामा मस्जिद सरदार चौक मस्जिद, वंशी लाल चौक मे ईदगाह मस्जिद दाता मदारा शाह मस्जिद, छोटा गोवाला टोली मस्जिद खिरगांव मस्जिद नूरा मस्जिद ग्रामीण क्षेत्रों में मे गदोखर नई गोसिया मस्जिद सहित जिले के विभिन्न मस्जिदों में नमाज अदा की गई।

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